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Nepal Paper Leak: CJP आंदोलन का असर नेपाल तक! अब पेपर लीक पर घिरी बालेन सरकार


नेपाल में परीक्षा पेपर लीक होने का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसके बाद बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है. सरकार ने देश के युवाओं को भरोसा दिलाया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को नहीं बख्शा जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी. माना जा रहा है कि सरकार की इस तेजी के पीछे हाल ही में दिल्ली में हुए बड़े छात्र आंदोलनों का भी असर है. दिल्ली में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ एक महीने से ज्यादा समय तक विरोध प्रदर्शन चला, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जाकर शांत हुआ.

नेपाल के शिक्षा और खेल मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा है कि त्रिभुवन यूनिवर्सिटी (TU) के MBS फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा का पेपर लीक होना बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने साफ कहा कि जो भी लोग इस घटना में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है.

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पेपर लीक करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई

सस्मित पोखरेल ने कहा कि जैसे ही पेपर लीक होने की जानकारी मिली, उसके बाद गृह मंत्रालय और नेपाल पुलिस के बीच बातचीत हुई और निगरानी बढ़ा दी गई. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति शिक्षा व्यवस्था और अच्छे प्रशासन के खिलाफ काम करेगा, उसे कानून के अनुसार सजा दी जाएगी. नेपाल पुलिस की सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (CIB) ने एमबीएस फर्स्ट सेमेस्टर के ऑर्गनाइजेशनल बिहेवियर विषय का प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. यह परीक्षा 24 जुलाई को आयोजित की गई थी. परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद एग्जाम का पेपर सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया था. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

इस पूरे मामले की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि दिल्ली-बिहार समेत देश भर में भी पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए थे. जुलाई महीने में छात्रों ने लगातार विरोध प्रदर्शन किया. 20 जुलाई को स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी. यह आंदोलन NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ था. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र संगठनों के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए इस आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा था. बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.

नेपाल में हो चुके हैं बड़े प्रदर्शन

दिल्ली में हुए इन प्रदर्शनों का असर पड़ोसी देशों के युवाओं पर भी पड़ सकता है. नेपाल पहले भी बड़े छात्र और युवा आंदोलनों का अनुभव कर चुका है. अगस्त और सितंबर 2025 में नेपाल में बड़े पैमाने पर हुए ‘जेन जी’ आंदोलन ने देश की राजनीति को प्रभावित किया था. उस आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी. इसी वजह से नेपाल की मौजूदा सरकार युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर काफी सतर्क दिखाई दे रही है. सरकार नहीं चाहती कि शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के कारण छात्रों का भरोसा टूटे या फिर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हों. इसलिए पेपर लीक के इस मामले में शुरुआत से ही सख्त रुख अपनाया गया है और जांच एजेंसियों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

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