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NSD ने 3 बार किया रिजेक्ट, आया सुसाइड का ख्याल, फिर ‘सत्या’ ने बनाया मनोज बाजपेयी को स्टार


मनोज बाजपेयी आज उस मुकाम पर हैं, जहां हर बड़ा निर्देशक उनके साथ काम करना चाहता है. उनकी गिनती बॉलीवुड के शानदार एक्टर्स में होती है. मनोज बाजपेयी ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग के दम पर इंडस्ट्री में अलग जगह बनाई है, लेकिन शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. मनोज बाजपेयी 23 अप्रैल को अपना 57वां बर्थडे सेलिब्रेट करने वाले हैं. आइए ऐसे में उनके स्ट्रगल्स पर एक नजर डालते हैं. 

पिता चाहते थे कि डॉक्टर बने बेटा
मनोज बाजपेयी का जन्म 23 अप्रैल, 1969 को बिहार के बेलवा में हुआ था. उनके पिता किसान थे. ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति खास अच्छी नहीं थी. मनोज के पिता चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बनें. उनकी इस इच्छा के पीछे का कारण ये था कि वो खुद डॉक्टर बनना चाहते थे. यही वजह रही कि 7 साल की उम्र में मनोज को हॉस्टल भेज दिया गया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. 

बचपन से एक्टर बनना चाहते थे मनोज बाजपेयी
बिहार के छोटे से गांव में जन्मे मनोज ने पहला ख्वाब ही एक्टर बनने का देखा था. इसके लिए उन्हें शुरुआत से ही बहुत पापड़ बेलने पड़े थे. परिवार में किसी का ताल्लुक फिल्म इंडस्ट्री से नहीं था. बढ़ती उम्र के साथ मनोज का एक्टिंग के लिए जुनून बढ़ता चला गया. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 5वीं क्लास के आसपास मनोज ने राज बब्बर, ओमपुरी और नसीरुद्दीन शाह का इंटरव्यू पढ़ा और तीनों एक्टर्स ने अपनी लाइफ जर्नी में NSD का जिक्र किया था.

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मैंने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी- मनोज बाजपेयी
12वीं पास करने के बाद मनोज दिल्ली चले गए, जहां उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया और साइड में स्ट्रीट थिएटर करने लगे. ग्रेजुएशन पूरा हो जाने के बाद उन्होंने जब पहली बार NSD का एग्जाम दिया तो फेल हो गए. राज शमानी के पोडकास्ट में मनोज ने बताया कि, ‘NSD में फेल होने के बाद में उदास हो गया था. मुझे सुसाइडल थॉट्स आते थे. मेरी हालत देख मेरे दोस्तों को डर लगता था कि कहीं मैं आत्महत्या ना कर लूं. इसलिए हर समय मेरा कोई न कोई दोस्त मेरे साथ मौजूद रहता था.’

3 बार दिया NSD का एग्जाम
मनोज ने दोबारा NSD का एग्जाम दिया और वो फिर से फेल हो गए. इसके बाद वो बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल से जुड़ गए, जहां 1,500 रुपये में बच्चों को एक्टिंग सिखाते थे. मनोज ने हार नहीं मानी और एक बार फिर NSD का एग्जाम दिया था, लेकिन बतौर स्टूडेंट नहीं हुआ. इंडिया टुडे के अनुसार, NSD के प्रोफेसर ने मनोज से कहा था, ‘हम आपको बतौर स्टूडेंट तो नहीं ले सकते हैं, लेकिन आप चाहें तो यहां बतौर टीचर काम कर सकते हैं.’

 कैसे मिली पहली फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि मनोज की पहली फिल्म किस्मत से मिली है. दरअसल, एक दिन वो रिहर्सल कर रहे थे, तभी उनके पास तिग्मांशु धूलिया पहुंचे और बताया कि शेखर कपूर उनसे मिलना चाहते हैं. ये सुन मनोज शॉक्ड रह गए. शेखर कपूर ‘बैंडिट क्वीन’ के सिलसिले में मनोज से मिलना चाहते थे. मुलाकात के बाद उन्हें फिल्म में विक्रम मल्लाह का रोल ऑफर हुआ, लेकिन कुछ समय बाद यह रोल निर्मल पांडे को मिल गया. इस बात को कुछ ही दिन बीते थे. तभी मनोज के पास तिग्मांशु का कॉल आया और कहा, ‘तुम जल्दी से दिल्ली आ जाओ. नसीर साहब ने मानसिंह का किरदार करने से मना कर दिया है. शेखर कपूर तुम्हें उनकी जगह इस रोल में कास्ट करना चाहते हैं.’ इस तरह वो फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ का हिस्सा बने.

भीकू म्हात्रे बन छाए मनोज बाजपेयी
मनोज बाजपेयी को 1988 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या’ ऑफर हुई, जिसमें उन्होंने भीकू म्हात्रे का रोल प्ले किया. इस फिल्म ने मनोज की किस्मत बदल कर रख दी. वो रातोंरात सुपरस्टार बन गए हैं. राज शमानी के पोडकास्ट में मनोज भाजपेयी ने इस फिल्म को अपने करियर का गेम चेंजर बताया है. इसके बाद मनोज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक कई फिल्में दीं. 

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मनोज बाजपेयी की बेहतरीन फिल्में
मनोज बाजपेयी ने अपने अब तक के लंबे करियर में ‘पिंजर’, ‘शूल’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘सोनचिड़िया’, ‘अलीगढ़’, ‘द फैमिली मैन’, ‘राजनीति’ और ‘जुबैदा’ जैसी बेहतरीन फिल्मों और वेब सीरीज में काम किया है.



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