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Pankaj Bhadouria Chemotherapy Hair Loss: कीमो में बाल झड़ना महिलाओं को इतना क्यों तोड़ देता है? जानें वजह


Pankaj Bhadouria Chemotherapy Hair Loss:  मास्टरशेफ इंडिया की विनर शेफ पंकज भदौरिया ने हाल ही में कीमोथेरेपी के दौरान अपने बाल झड़ने का दर्द सबके सामने रखा, और कंघी में बालों का गुच्छा दिखाती एक तस्वीर पोस्ट की. उन्होंने बताया कि यह पल उनकी सांस रोक देने वाला था, भले ही उन्हें पहले से पता था कि कीमोथेरेपी से बाल झड़ सकते हैं. दरअसल यह सिर्फ एक साइड इफेक्ट नहीं, बल्कि खुद को आईने में पहचान न पाने का झटका होता है. दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में ब्रेस्ट ऑन्कोलॉजी की क्लिनिकल एडवाइजर डॉक्टर ने इस पूरे मनोवैज्ञानिक असर को विस्तार से समझाया. उन्होंने अपना दर्द इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर किया.

कीमोथेरेपी से बाल क्यों झड़ते हैं?

कीमोथेरेपी उन सभी सेल्स को टारगेट करती है जो तेजी से बढ़ती हैं, जिसमें कैंसर सेल्स के साथ साथ बालों के फॉलिकल सेल्स भी शामिल हैं. इसी वजह से कई कीमो दवाएं बालों के नैचुरल ग्रोथ साइकल को रोक देती हैं, जिससे बाल पतले होने लगते हैं या फिर पूरी तरह झड़ जाते हैं. यह असर दवा, डोज और मरीज पर निर्भर करता है, और सिर के अलावा आइब्रो, आईलैशेज और शरीर के दूसरे बालों पर भी कर सकता है.

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बॉडी इमेज पर पड़ता है गहरा असर

मरीजों को पहले ही बता दिया जाता है, कि बाल झड़ेंगे, सर्जरी से निशान बन सकते हैं, वजन बदल सकता है या स्किन नाखूनों का रंग रूप अलग दिख सकता है. वैसे डॉक्टर कहते हैं कि कंसल्टेशन रूम में यह सब सुनने में मैनेज करने लायक लगता है, लेकिन जब यही बदलाव आईने में दिखने लगते हैं, तो एहसास पूरी तरह अलग हो जाता है.

बाल इतने अहम क्यों लगते हैं?

बाल चेहरे को फ्रेम करते हैं और खूबसूरती, स्त्रीत्व और पहचान से जुड़े होते हैं. कई महिलाओं के लिए दशकों से बाल ही उनकी खुद की पहचान का हिस्सा रहे हैं. इसीलिए बाल झड़ना एक तरह की बॉडी इमेज गड़बड़ी पैदा करता है. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी भी बाल झड़ने को कैंसर ट्रीटमेंट के सबसे नजर आने वाले असर में गिनती है, जो बॉडी इमेज, इमोशनल हेल्थ और लाइफ क्वालिटी तीनों को प्रभावित करता है.

कंट्रोल खोने का एहसास भी है वजह

कैंसर खुद ही जिंदगी पर से कंट्रोल छीन लेने जैसा एहसास कराता है. डायग्नोसिस, सर्जरी, कीमो, स्कैन और ट्रीटमेंट शेड्यूल, यह सब ऐसी चीजें हैं जिन्हें मरीज खुद तय नहीं कर पाते. बाल झड़ना इस एहसास को और गहरा कर देता है, क्योंकि यह साफ नजर आता है, और इसे छुपाना मुश्किल होता है.

आईने के सामने का मनोविज्ञान

कई बार महिला आईने में खुद को पहचान ही नहीं पाती. नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक बाल झड़ने के साथ शर्मिंदगी, गुस्सा और डिप्रेशन जैसी भावनाएं भी जुड़ी हो सकती हैं.

रिश्तों और आत्मविश्वास पर भी पड़ता है असर

बॉडी इमेज का असर पर्सनल रिश्तों पर भी पड़ता है. सर्जरी के निशान, ब्रेस्ट में बदलाव और बाल झड़ना सेक्शुअल कॉन्फिडेंस को भी असर कर सकते हैं.

बाल वापस आने के बाद भी बाकी रहता है असर

कीमो से जुड़ा हेयर लॉस आमतौर पर अस्थायी होता है. ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद बाल दोबारा उगने लगते हैं, लेकिन मानसिक रिकवरी शरीर की रिकवरी जितनी तेज नहीं होती. डॉक्टर के मुताबिक कैंसर ट्रीटमेंट में मरीज के पूरे व्यक्तित्व का ध्यान रखा जाना चाहिए, सिर्फ मेडिकल असर नहीं, अपीयरेंस में होने वाले बदलावों के इमोशनल असर के लिए भी तैयार करना उतना ही जरूरी है.

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