Snoring Sound Effect Sleep: सोते समय हमारे आसपास होने वाली छोटी सी खटपट या किसी के द्वारा हमारा नाम पुकारने पर हमारी नींद तुरंत खुल जाती है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जो व्यक्ति रात भर भयंकर खर्राटे लेता है, उसे खुद अपनी आवाज बिल्कुल सुनाई नहीं देती. वह बिना किसी परेशानी के आराम से सोता रहता है.
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब कान और दिमाग नींद में भी सक्रिय रहते हैं, तो वे खुद के खर्राटों को क्यों नजरअंदाज कर देते हैं. विज्ञान के पास इसका बेहद सटीक और दिलचस्प जवाब है. इंसानी मस्तिष्क के भीतर एक खास फिल्टर सिस्टम काम करता है, जो खुद से पैदा होने वाली आवाजों को गैर-जरूरी मानकर खारिज कर देता है.
दिमाग का खास फिल्टर और थैलेमस की भूमिका
नींद के दौरान हमारे कान पूरी तरह खुले रहते हैं और सिग्नल्स को दिमाग तक भेजते हैं. हमारे मस्तिष्क में थैलेमस नाम का एक हिस्सा होता है, जो एक फिल्टर की तरह काम करता है. इसका मुख्य काम यह होता है कि कौन सी आवाज हमें जगाने के लिए जरूरी है और किसे नजरअंदाज करना है.
जब हम सोते हैं, तो थैलेमस बाहर की अनजान या अचानक होने वाली आवाजों को हाई-प्रायोरिटी वाले सिग्नल के रूप में देखता है, क्योंकि वे किसी खतरे का संकेत हो सकती हैं. इसके विपरीत, चूंकि खर्राटे हमारे अपने शरीर के भीतर से ही पैदा होते हैं, इसलिए हमारे मन को पहले से ही इस आवाज का पता होता है. दिमाग इसे एक परिचित और पूरी तरह सुरक्षित आवाज मानकर फिल्टर कर देता है, जिससे नींद नहीं टूटती.
मांसपेशियों का ढीला पड़ना और खर्राटों का पैदा होना
खर्राटे आने की मुख्य वजह हमारे श्वसन तंत्र से जुड़ी हुई है. जब हम गहरी नींद में जाते हैं, तो हमारे गले और जीभ की मांसपेशियां पूरी तरह से रिलैक्स हो जाती हैं. कई बार जरूरत से ज्यादा ढीली होने के कारण ये सांस लेने वाली नली के रास्ते को आंशिक रूप से छोटा या संकरा कर देती हैं.
ऐसी स्थिति में जब हम सांस लेते हैं, तो हवा उस संकरी नली से टकराकर तेजी से बाहर निकलती है, जिससे गले के ऊतकों में एक तेज कंपन पैदा होता है. यही कंपन भारी और तेज आवाज में बदल जाता है जिसे हम खर्राटे कहते हैं.
यह भी पढ़ें: किचन के कपड़े से नहीं जा रही बदबू, करें ये काम
क्या सच में खर्राटे लेने वालों की नींद नहीं टूटती?
वैज्ञानिक शोधों में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है. ऐसा नहीं है कि खर्राटे लेने वाले लोग रात में बिल्कुल नहीं जागते. वास्तव में, बहुत तेज खर्राटों के कारण उनके दिमाग में रात भर में कई बार माइक्रो-अराउजल्स यानी बहुत छोटे पलों के लिए हलचल होती है. कई बार वे कुछ सेकंड के लिए जागते भी हैं और तुरंत वापस सो जाते हैं. सुबह उठने पर उन्हें यह बिल्कुल याद नहीं रहता कि वे रात में कभी जागे भी थे. हालांकि, अगर खर्राटे बहुत ज्यादा तेज हैं और इसकी वजह से सांस लेने में बार-बार रुकावट आ रही है, तो यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जिसके लिए डॉक्टरों से उचित जांच करानी बेहद जरूरी होती है.
यह भी पढ़ें: Brain Stroke: सोते-सोते कैसे आ जाता है स्ट्रोक, इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
