तेलंगाना सरकार ने 15 अप्रैल 2026 को सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक-रोजगार-राजनीतिक और जाति (SEEEPC) सर्वेक्षण 2024 के नतीजे जारी किए. यह सर्वे पूरे देश के लिए एक नई मिसाल बन गया है. इसमें राज्य की करीब 97 प्रतिशत आबादी यानी 3.55 करोड़ से ज्यादा लोगों और 1.12 करोड़ परिवारों का घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा किया गया. सर्वेक्षण 6 नवंबर 2024 को शुरू किया गया था, जो 50 दिनों में पूरा हुआ और दो महीने तक अतिरिक्त जानकारी जुटाई गई. कुल 242 जाति समूहों पर आय, शिक्षा, रोजगार, पानी और शौचालय जैसे 42 अलग-अलग पैमानों को नापा गया है, लेकिन सरकार इस सर्वे से क्या करेगी? जानते हैं एक्सप्लेनर में…
सवाल 1: तेलंगाना की कुल आबादी में विभिन्न वर्गों और जातियों का सटीक प्रतिशत क्या है?
जवाब: इंटेपेंडेंट एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप (IEWG) ने इस डेटा की परतें खोली हैं. इस ग्रुप की रिपोर्ट में राज्य का औसत पिछड़ापन सूचकांक (CBI) 81 निकला है. सर्वे के मुताबिक, राज्य की कुल आबादी लगभग 3.55 करोड़ है. इसमें:
इस तरह BC, SC और ST मिलाकर 74.13 प्रतिशत आबादी है, जबकि OC सिर्फ 13.31 प्रतिशत है. सबसे बड़ी जातियां मदिगा (SC), शेख मुस्लिम (BC-E), मुदिराज (BC) और लंबाड़ी/बंजारा (ST) हैं.
जाति सर्वे के मुताबिक, 11,96,482 लोग (कुल आबादी का 3.4 प्रतिशत) ने ‘नो कास्ट’ का विकल्प चुना. यह संख्या राज्य की 10वीं सबसे बड़ी कम्युनिटी बन गई है. इनमें से लगभग आधे से ज्यादा लोगों के पास जाति प्रमाण-पत्र उपलब्ध हैं. यह कल्याण योजनाओं, नौकरियों और शिक्षा के लिए इस्तेमाल होते हैं. ये लोग ज्यादातर शहरी इलाकों में रहते हैं, खासकर ग्रेटर हैदराबाद के आसपास. ये ग्रुप राज्य के सबसे कम पिछड़े समूहों में आता है. इनकी शिक्षा का स्तर और आय ज्यादा है.
सरकारी नौकरियों में इनकी हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत, प्राइवेट जॉब्स में 13.3 प्रतिशत, IAS और IPS में 22.9 प्रतिशत, अन्य केंद्रीय सरकारी पदों में 13.2 प्रतिशत और न्यायपालिका में 9.3 प्रतिशत है. यह साफ दिखाता है कि जाति का लेबल छोड़ने का फैसला मुख्य रूप से पढ़े-लिखे, अच्छी आय वाले और शहरी लोगों में ज्यादा आम है.
सवाल 2: राज्य में पिछड़ापन कितना गहरा है?
जवाब: कुल 242 जातियों में से 135 जातियां राज्य के औसत CBI स्कोर (81) से ज्यादा पिछड़ी हैं. ये 135 जातियां राज्य की 67 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं. इनमें 69 BC जातियां, 41 SC समूह और 25 ST जातियां शामिल हैं. SC और ST वर्ग सामान्य वर्ग (OC) से तीन गुना ज्यादा पिछड़े हैं. BC वर्ग OC से 2.7 गुना ज्यादा पिछड़ा है. इन 135 जातियों में शिक्षा, रोजगार, घर, साफ पानी, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत कम उपलब्ध हैं. लोग छोटे-भीड़भाड़ वाले घरों में रहते हैं, जमीन कम है, सूदखोरों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेते हैं और कर्ज के जाल में फंस जाते हैं.
IEWG ने वर्ग-वार CBI स्कोर निकाले हैं:
- SC वर्ग का स्कोर: 96
- ST वर्ग का स्कोर: 95
- BC वर्ग का स्कोर: 86
- OC (सामान्य वर्ग) का स्कोर: 31
सबसे पिछड़ी SC उप-जाति ‘डक्कल’ का CBI स्कोर 116 है, जबकि सबसे कम पिछड़ी कपु जाति का स्कोर सिर्फ 12 है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ‘हर पिछड़ी जाति बराबर पिछड़ी नहीं होती.’ यह पहली बार डेटा के साथ साबित हुआ है. 135 जातियां औसत से ज्यादा पिछड़ी हैं, जबकि बाकी 107 जातियां औसत से कम पिछड़ी हैं.

सवाल 3: आय की स्थिति में विभिन्न वर्गों के बीच कितना अंतर है?
जवाब: 88.2 प्रतिशत SC परिवारों और 86.2 प्रतिशत ST परिवारों की सालाना आय 1 लाख रुपये से कम है. सामान्य वर्ग (OC) में यह संख्या 56.2 प्रतिशत है. कुल मिलाकर 78 प्रतिशत पिछड़े परिवारों की आय 1 लाख से कम है. वहीं OC परिवारों में 13 प्रतिशत की आय 5 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है.
SC-ST में 5 लाख से ज्यादा कमाने वाले सिर्फ 2.1 प्रतिशत हैं. यहां तक कि समान आय (1 लाख से कम) वाले परिवारों में भी SC परिवारों का CBI स्कोर 49 है, जबकि OC परिवारों का सिर्फ 16. यानी आय बराबर होने पर भी जाति की वजह से पिछड़ापन बना रहता है.
सवाल 4: शिक्षा में तेलंगाना ने क्या बदलाव किया है और वर्गों के बीच अंतर क्या है?
जवाब: 2014 में अलग राज्य बनने के बाद सरकार ने अंग्रेजी माध्यम पर भारी निवेश किया. ‘मना वूरु मना बाड़ी’ योजना के तहत स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम, शौचालय, पीने का पानी और शिक्षक प्रशिक्षण दिए गए. नतीजा यह कि 6 से 29 साल के बच्चों में 60.5 प्रतिशत अब अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहे हैं, जबकि तेलुगु माध्यम सिर्फ 35.3 प्रतिशत है. शहरों और अच्छी आय वाले परिवारों में यह बदलाव और तेज है. सामान्य वर्ग के 33 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जाते हैं, जबकि SC/ST के 10 प्रतिशत से भी कम.
सवाल 5: रोजगार, कर्ज और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति क्या है?
जवाब: कुल आबादी में सिर्फ 43.4 प्रतिशत लोग सक्रिय रोजगार में हैं…
- SC में 50 प्रतिशत लोग दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि OC में सिर्फ 10 प्रतिशत हैं.
- ST में प्राइवेट सेक्टर की नौकरियां सिर्फ 5 प्रतिशत हैं.
- 44.4 प्रतिशत परिवारों पर कम से कम एक लोन है.
- ज्यादातर कर्ज खेती, शादी, इलाज और शिक्षा के लिए लिया जाता है.
- ग्रामीण इलाकों में 56.7 प्रतिशत कर्ज खेती से जुड़े हैं.
- 6.8 प्रतिशत लोग सूदखोरों से कर्ज लेते हैं.
- SC परिवारों में इलाज के लिए कर्ज लेने की दर 16.2 प्रतिशत है.
- पूरे राज्य में 10.5 प्रतिशत कर्ज स्वास्थ्य खर्च के लिए हैं.
- सरकारी बैंक 41.6 प्रतिशत कर्ज देते हैं, लेकिन 9.5 प्रतिशत अभी भी अनौपचारिक स्रोतों से आता है.
सवाल 6: घर, पानी, शौचालय, बिजली और जमीन की सूरत कैसी है?
जवाब: ग्रामीण इलाकों में 74.7 प्रतिशत परिवार अपने मकान के मालिक हैं, जबकि शहरों में 53.15 प्रतिशत किराए के मकान में रहते हैं.

सवाल 7: महिलाओं की भूमिका, अंतर-जातीय विवाह और अन्य सामाजिक पहलू क्या हैं?
जवाब: राज्य में 25.1 प्रतिशत परिवार महिलाओं के नेतृत्व में हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में. 5.6 प्रतिशत परिवारों में अंतर-जातीय विवाह हुए हैं. 94.3 प्रतिशत परिवारों में सदस्यों को मंदिर, मस्जिद या चर्च जाने की पूरी आजादी है. 47.8 प्रतिशत लोगों के पास जाति प्रमाण-पत्र है, जिसमें ST (59.9 प्रतिशत), SC (61.5 प्रतिशत) और OC (24.5 प्रतिशत) हैं. प्रवासन दर सिर्फ 1.1 प्रतिशत है, लेकिन कुछ जिलों में विदेश जाने वाले ज्यादा हैं.
सवाल 8: सरकार अब इन नतीजों से क्या करने वाली है?
जवाब: तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का मल्लू और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोनम प्रभाकर ने कहा कि 135 पिछड़ी जातियों और उप-जातियों के लिए शिक्षा, रोजगार और जरूरत-आधारित विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी. हर परिवार की असली जरूरत देखकर मदद दी जाएगी ताकि सच्चा सामाजिक न्याय मिल सके. रिपोर्ट में साफ है कि कल्याण योजनाओं का फायदा भी अब जाति-आधारित पिछड़ापन को ध्यान में रखकर बेहतर तरीके से बांटा जाएगा.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सर्वेक्षण सिर्फ तेलंगाना के लिए नहीं, पूरे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह बताता है कि जाति अभी भी सामाजिक-आर्थिक असमानता का बड़ा कारण है, लेकिन सही डेटा और सही नीतियों से इसे बदलना पूरी तरह संभव है.
