‘अनदेखी’ एक ऐसी वेब सीरीज है जो पूरी तरह से अपने कंटेट के दम पर चली, ना कोई बड़ा स्टार, ना कोई धूम धड़ाके वाला प्रमोशन, लेकिन जिसने ये सीरीज बाय चांस भी देखी थी वो पूरी देखकर ही रुका था. अब इस सीरीज का चौथा सीजन आया है. कहने को इसे अनदेखी -द फाइनल बैटल कहा गया है. हालांकि, सीरीज देखकर समझ आएगा कि ये फाइनल है या नहीं, लेकिन ये चारों सीजन में सबसे कमजोर जरूर है.
इस सीरीज के बाकी सीजन में जो फायर नजर आती है वो यहां नहीं दिखती. परफॉर्मेंस सारे शानदार हैं लेकिन स्क्रीनप्ले और कहानी बिखरी हुई सी है. ऐसा लग रहा है कि इस सीजन को बस बनाने के लिए बनाया गया है कि चलो एक कामयाब वेब सीरीज का अगला सीजन बना दिया जाए.
कहानी
इस सीरीज की कहानी आपको तभी समझ आएगी जब आपने बाकी के सारे सीजन देखे होंगे. उसके बिना आप कहानी से कनेक्ट कर ही नहीं पाएंगे. पापाजी जेल में हैं. रिंकू को लगता है कि पापाजी ने ही उसकी बीवी को मारा है. जो रिंकू पापाजी के लिए जान देने को तैयार रहता था वो अब पापाजी की जान का दुश्मन है. कुछ और नए दुश्मन भी पैदा हो गए हैं. ऐसे में रिंकू और पापाजी की ये जंग क्या आखिर खत्म होगी. इसके लिए आपको ये सीरीज देखनी होगी.
कैसी है सीरीज
ये एक एवरेज सीरीज है. जिस तरह की इंटेंसिटी इस सीरीज के बाकी सीजन में दिखी वो यहां गायब है. ये सीरीज देखकर ऐसा लगता है जैसे मेकर्स एक कामयाब फ्रेंचाइजी को बस भुनाना चाहते हैं. इसलिए ना फाइनल बैटल दिया गया है लेकिन एंड में अगले सीजन की गुंजाइश भी छोड़ दी गई है. इस बार के ट्विस्ट एंड टर्न उतना असर नहीं छोड़ते जितने इसके पुराने सीजन ने छोड़ा था.
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इस सीरीज के फैन हैं तो हो सकता है ये सीरीज आपको ठीक-ठाक लग भी जाए लेकिन अगर आपने इस सीरीज को कोई सीजन नहीं देखा तो आपको ना ये समझ आएगी और ना ही आप इसे एन्जॉय करेंगे. सीरीज में गालियां जमकर दी गई हैं जो कि इसके सारे सीजन में हैं. इसलिए फैमिली के साथ तो नहीं देखी जा सकती. इस बार कोई ऐसा हाई मोमेंट नहीं दिखा जो आपको काफी चौंका दे. सीरीज बस चलती है. इमोशनल एंगल डालने की कोशिश जरूर की गई है लेकिन आप इमोशनली उतना कनेक्ट करते नहीं हैं.
करीब 45 -45 मिनट के 8 एपिसोड आपको कई बार बोरिंग लगते हैं. आपको लगता है सीरीज खत्म क्यों नहीं हो रही, जो कुछ खुलासे होते भी हैं वो मजा नहीं देते. पुलिस का रोल तो ऐसा है जैसे उन्हें सैलरी गुंडे ही देते हों. इस सीजन के कमजोर लगने की वजह इसके बाकी सीजन का शानदार होना भी है. इस सीरीज ने जैसा बैंचमार्क सेट किया वो ये सीजन छू नहीं पाता और इसलिए आप निराश हो जाते हैं.
एक्टिंग
इस सीरीज की जान हैं इसके एक्टर्स. हर्ष छाया ने पापाजी के रोल में जान डाल दी है. हर्ष की एक्टिंग इस सीरीज की सबसे बड़ी खूबी है. ऐसे किरदार में आपने उन्हें इसी सीरीज में देखा है. इस बार वो इमोशनल सीन्स में भी अच्छा काम कर गए हैं. हालांकि कमजोर राइटिंग के आगे उनकी एक्टिंग फीकी पड़ जाती है. सूर्या शर्मा ने रिंकू के किरदार में कमाल का काम किया है. पहले सीजन से ही वो इस किरदार को कमाल तरीके से निभाते आ रहे हैं. दिब्येंदु भट्टाचार्य ने अच्छा काम किया है लेकिन पुलिस अफसर का उनका किरदार अच्छे से लिखा नहीं गया. पुलिस को इतना कमजोर नहीं दिखाया जा सकता. वरुण बडोला ने ठीक ठाक काम किया है, बाकी के एक्टर्स ने भी अपना काम अच्छे से किया है.
राइटिंग एंड डायरेक्शन
आशीष आर शुक्ला ने सीरीज डायरेक्ट की है और कई लोगों ने मिलकर इसे लिखा है. इस बार राइटिंग मजेदार नहीं है. पहले सीजन के मुकाबले राइटिंग काफी कमजोर है. ऐसा लगा कि ये सीजन बस भरपाई के लिए लिखा गया. डायरेक्शन ठीक है लेकिन कमजोर राइटिंग ने सीरीज को लेवल काफी गिरा गया.
कुल मिलाकर इस सीरीज के फैन हैं तो देख सकते हैं.
रेटिंग- 2.5 स्टार्स
