उत्तर प्रदेश में राज्य निर्वाचन अधिकारी को बयान को लेकर आखिरकार अपनी गलती का एहसास हो गया. करीब 26 घंटे बाद राज्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकृत अकाउंट से माफी मांगी गई है.
अपने पुराने बयान को रिपोस्ट करते हुए सीईओ यूपी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा- इस हैंडल के उद्धृत पोस्ट में टिप्पणियों की भाषा के स्तर और भाव और इनकी तीखी प्रकृति इस आधिकारिक हैंडल से अपेक्षित संचार की प्रकृति के अनुरूप नहीं है. पोस्ट में टिप्पणियों से उत्पन्न वास्तविक आक्रोश को अच्छी तरह से नोट किया गया है. हम इससे अचंभित और नाराज़ लोगों से ईमानदारी से माफी मांगते हैं. अब से हमारा संचार शालीन और औपचारिक होगा.
इससे पहले 26 अक्टूबर को एक बयान में कहा गया था- हालिया विधान परिषद के चुनाव की मतदाता सूची में एक अजीबोगरीब नाम “राम ने शर्मा को मारा” भी है. कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है. हमारे द्वारा गलती किया जाना स्वीकार है लेकिन हमारे सौभाग्य से गलती होते समय भी जाति का भेदभाव नहीं हुआ है. भगवान का यह भी शुक्र है की राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा है. नहीं तो जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का इल्ज़ाम भी लगता.
CEO UP के बयान का क्या है पूरा मामला?
बाद में इस बयान की काफी आलोचना हुई थी. इस बयान को लेकर, राज्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के एक्स अकाउंट को टैग कर के कई नेताओं ने टिप्पणियां कीं और इस बयान को भारतीय जनता पार्टी से जोड़ा.
बता दें उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने गलत मतदाता पर्ची को लेकर जातिगत पक्षपात के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार को कहा था कि कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते. रिणवा ने हाल में हुए विधान परिषद चुनाव में मतदाता सूची में ‘राम ने शर्मा को मारा” जैसे अजीबोगरीब नाम की प्रविष्टि पर अपनी सफाई देते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि भगवान का यह शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, अन्यथा जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का इल्ज़ाम भी लगता. सीईओ ने आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह द्वारा निर्वाचन आयोग से उठाए गये सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी अपने आधिकारिक ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में की थी.
