UP Doctors News: उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के डॉक्टर के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है. अब राज्य के सरकारी डॉक्टर पीजी के बाद अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए सुपर स्पेशियलिटी और दूसरी उच्चतर चिकित्सा प्रोग्राम की पढ़ाई कर सकेंगे. उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देशों के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव भी वी. हेकाली झिमोमी ने इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू हो गया है. सरकार के इस कदम से आने वाले समय में सरकारी अस्पतालों में एक्सपर्ट और सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की उपलब्धता में बड़ा इजाफा होगा.
क्या है दाखिले के नियम और योग्यता?
नए शासनादेश के अनुसार पीजी डिग्री और डिप्लोमा धारक पीएमएचएस डॉक्टर नीट प्रवेश परीक्षा माध्यम से उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम में एडमिशन ले सकेंगे. हालांकि इसके लिए डॉक्टर को विभाग से अनुमति लेनी होगी. इसके अलावा कुछ नियमों और शर्तें भी तय की गई है. आवेदन करने वाले डॉक्टर के खिलाफ किसी भी तरह की विभागीय कार्रवाई, सतर्कता जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए. वहीं डॉक्टरों की प्रोबेशन अवधि पूरी होनी चाहिए और उनका स्थायीकरण आदेश जारी होना जरूरी है. साथी उनका सर्विस रिकॉर्ड भी सही होना चाहिए.
आयु सीमा और डिग्री की योग्यता
नए आदेश के अनुसार उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए डॉक्टरों की अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है. इसकी गणना आवेदन वर्ष से पहले के वर्ष की 31 दिसंबर के आधार पर की जाएगी. वहीं पढ़ाई के लिए जाने वाले डॉक्टर को अपनी एमबीबीएस और पीजी की मूल डिग्रियां महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के कार्यालय में जमा करनी होगी.
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10 साल की अनिवार्य सेवा और 1 करोड़ का बॉन्ड
सरकार ने इस सुविधा के साथ एक बड़ी शर्त यह जोड़ी है कि उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद डॉक्टरों को 10 साल तक सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य रूप से अपनी सेवाएं देनी होंगी. अगर कोई डॉक्टर पढ़ाई पूरी करने के बाद इस शर्त का उल्लंघन करता है, तो उसे जुर्माने के तौर पर एक करोड़ रुपये का बॉन्ड भरना होगा. वहीं अगर कोई डॉक्टर बीच में ही पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसे अगले 5 साल तक किसी दूसरे उच्चतर चिकित्सा प्रोग्राम में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसके अलावा अगर कोई डॉक्टर परीक्षा में तीन से ज्यादा बार असफल होता है, तो दोबारा परीक्षा देने के लिए शासन की अनुमति लेनी होगी.
पहले से PG कर चुके डॉक्टर के लिए नियम
नए आदेश के अनुसार पहली बार अनुमति लेकर उच्चतर चिकित्सा प्रोग्राम करने वाले डॉक्टरों को 2 साल का विशेष सवेतन अध्ययन अवकाश और 1 साल का बिना वेतन असाधारण अवकाश मिलेगा. वहीं जो डॉक्टर पहले भी पीजी कर चुके हैं और दोबारा उच्च शिक्षा ले रहे हैं, उन्हें अपनी पहले की पढ़ाई के बाद तय 10 साल की अनिवार्य सेवा में से कम से कम 5 साल पूरे करने होंगे. इसके बाद ही उन्हें दोबारा पढ़ाई की अनुमति मिलेगी. ऐसी स्थिति में डॉक्टरों को कुल मिलाकर 15 साल तक सरकारी अस्पताल में काम करना होगा और पढ़ाई के दौरान उन्हें बिना सैलरी असाधारण अवकाश दिया जाएगा.
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