UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने को लेकर देश में राजनीति गरमाई हुई है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी दल ने इस आदेश को वापस लेने की मांग की है. सरकार का कहना है कि जिस नीति का कांग्रेस अब विरोध कर रही है, उसे संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने खुद अपनी रिपोर्ट में लागू करने की सिफारिश की थी. इस कमेटी में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे, जिन्होंने बिना किसी असहमति के इस रिपोर्ट को अपनाया था.
संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने जब 12 अगस्त 2026 को इस रिपोर्ट को मंजूरी दी, तब समिति में पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी और गौरव गोगोई जैसे दिग्गज कांग्रेस सांसद मौजूद थे. सरकार का कहना है कि राहुल गांधी समेत विपक्षी सासंदों ने इस सिफारिश पर तब कोई आपत्ति या असहमति क्यों नहीं जताई थी और अब आपत्ति जता रहे हैं.
UPI पेमेंट को लेकर संसद समिति से की गई सिफारिश
2026 की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने UPI इकोसिस्टम के लिए एक टियर-आधारित रेवेन्यू मॉडल की सिफारिश की थी. इसमें कहा गया था कि ज्यादा रकम वाले ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के लिए एक तय फ्रेमवर्क को नोटिफाई और लागू किया जाए. समिति ने सरकारी आवंटन और इंडस्ट्री की अनुमानित ऑपरेशनल लागत के बीच के अंतर पर चिंता जताई और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) की जरूरत पर जोर दिया.
समिति के सदस्यों में कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम (पूर्व वित्त मंत्री), मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ मौजूद थे. TMC से सांसद सौगत रॉय, सपा से हरेंद्र सिंह मलिक और DMK सांसद अरुण नेहरू शामिल थे.
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यूपीआई (UPI) पेमेंट पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नियमों का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की. कांग्रेस का कहना है कि भले ही यह चार्ज व्यापारियों पर लगाया जा रहा हो, लेकिन कारोबार की लागत बढ़ने से इसका अंतिम बोझ महंगाई के रूप में आम ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा. सरकार का कहना है कि यह शुल्क बहुत सीमित और मामूली है और लगभग 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन इससे प्रभावित नहीं होंगे. साथ ही, ग्राहकों से किसी भी प्रकार का एमडीआर वसूलने की अनुमति नहीं है.
