UPTET Controversy 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल हुए हजारों उम्मीदवारों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बड़ी खबर आई है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सख्त निर्देश दिया है कि यूपीटीईटी 2026 के मास्टर सेट के 2 विवादित प्रश्नों की मूल्यांकन प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर किया जाए और अब कुल 148 प्रश्नों के आधार पर नए सिरे से रिजल्ट और स्कोर कार्ड घोषित किया जाए.
बताया जा रहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस आदेश से उन उम्मीदवारों को राहत मिल सकती है, जो निर्धारित कट ऑफ से कुछ नंबरों के अंतर से फेल हो गए थे. वहीं आपको बता दें कि बदले हुए रिजल्ट के आधार पर एलिजिबिलिटी मिलने का अर्थ सीधे शिक्षक भर्ती में चयन या नियुक्ति का अधिकार मिलना नहीं है.
क्या था पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से इस साल 3 जुलाई को प्राथमिक स्तर की यूपीटीईटी 2026 परीक्षा आयोजित की गई थी. इसके बाद जब परीक्षा की अंतिम आंसर की जारी की गई, तो उसमें मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 के दो-दो ऑप्शन को सही मान लिया गया. मूल्यांकन के दौरान आयोग ने केवल उन उम्मीदवारों काे अंक दिए, जिन्होंने उन दो मान्य विकल्पों में से किसी एक को चुना था. जबकि अन्य विकल्प चुनने वाले परीक्षार्थियों को कोई अंक नहीं मिला. इसके चलते कई उम्मीदवार सामान्य और ओबीसी वर्ग के निर्धारित 82 अंकों की कट ऑफ से जरा से अंतर से फेल हो गए थे. इसके खिलाफ विजय सोनकर और अन्य व्यक्तियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब किसी एमसीक्यू प्रश्न में एक से ज्यादा विकल्प सही मान लिए जाते हैं, तो वह प्रश्न अपनी मूल्यांकन क्षमता खो देता है. ऐसे गलत प्रश्नों को या तो पूरी तरह हटाया जाना चाहिए या फिर इसका लाभ सभी को मिलना चाहिए.
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हाई कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि वस्तुनिष्ठ परीक्षा में अगर चयन संस्था खुद दो विकल्पों को सही मान लेती है, तो वह प्रश्न योग्य और अयोग्य अभ्यर्थी के बीच भेद करने में असमर्थ हो जाते हैं. कोर्ट ने यह भी हवाला दिया कि आयोग ने इसी प्रश्न पत्र के प्रश्न संख्या 38 को पहले ही गलत मानकर हटा दिया था, ऐसे में इन दो प्रश्नों के साथ अलग व्यवहार करने का कोई तार्किक आधार नहीं है.
अदालत ने क्या दिया निर्देश?
मामले पर कड़ी टिप्पणी करने के बाद अदालत ने निर्देश दिया कि मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर किया जाए. अब मूल्यांकन 150 की जगह 148 प्रश्नों के आधार पर किया जाएगा और इसी के अनुसार अहर्ता अंकों की गणना होगी. आयोग याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ समान स्थिति वाले सभी प्रभावित अभ्यर्थियों के अंकों की पुनर्गणना करें और संशोधित स्कोर कार्ड जारी करें. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस संशोधन से मिलने वाली पात्रता केवल यूपीटीईटी 2026 के संशोधित परिणाम तक सीमित रहेगी और यह स्वत ही किसी भावी शिक्षक भर्ती में सीधे चयन या नियुक्ति का अधिकार नहीं देगी.
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