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US Iran War: फिर शुरू हुआ ट्रंप की धमकियों का सिलसिला, अब चीन पर US लगाएगा 50% टैरिफ, बीजिंग पर ईरान को हथियार देने का आरोप


US Iran War: पाकिस्तान में शनिवार को शांति वार्ता विफल हुई तो जैसे डोनाल्ड ट्रंप के मंसूबे पूरे नहीं हुए लगते हैं. ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि, उन्होंने धमकियों का सिलसिला फिर से शुरू कर दिया है. चीन को भी निशाने पर लिया है. वह उन रिपोर्ट्स पर अपना रिएक्शन दे रहे हैं, जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि चीन पिछले बुधवार को शुरू हुए दो सप्ताह के सीजफायर के बीच अमेरिका को खेप भेजने की तैयारी कर रहा है.

ट्रंप अगले महीने चीन का दौरा करेंगे, ऐसे में उन्होंने कहा कि मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे, लेकिन अगर हमने उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लिया, तो उनपर हम 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाएंगे. यह एक बड़ी रकम है. 

ट्रंप ने यह धमकी सिर्फ चीन को नहीं सभी देशों को दी है. वह सीएनएन से बातचीत कर रहे थे. एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन अगले हफ्तों के भीतर ईरान को डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है. इस रिपोर्ट में तीन अनाम सूत्रों का भी हवाला दिया गया है.

इनमें कहा गया है कि ट्रंप ने चीन को कच्चा तेल बेचने की पेशकश की. यह तेल अमेरिका से भी और वेनेजुएला से भी बेचा जा सकता है. वेनेजुएला का फिलहाल प्रशासन अमेरिका के हाथ में है. साल के शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया था. 

उन्होंने कहा कि चीन अपने जहाज हमारे पास भेज सकता है. वेनेजुएला भेज सकता है. हमारे पास तेल बहुत ज्यादा है. यह ओवर कैपिसिटी में है. शायद तेल ईरान तुलना में और भी कम कीमत पर बेचेंगे. 

क्या है ट्रंप का टैरिफ वॉर? 
ट्रंप ने टैरिफ का इस्तेमाल भारत, ब्राजील, और चीन जैसे देशों पर किया था. जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से बेहद ही गलत था. इसे रद्द कर दिया गया था.ऐसे में चीन के मामले में फरवरी 2026 को यह शुल्क 30 प्रतिशत पर पहुंच गया था. जब दोनों देशों में बातचीत हुई तो इसे घटाकर 30 प्रतिशत पर कर दिया गया. इसके बाद एक अलग इंटरनेशनल बिजनेस कानून के तहत एक अस्थायी टैरिफ को लागू कर दिया गया. इस वजह से वर्तमान शुल्क 10 से 15 प्रतिशत है. 

इधर बीजिंग ने दावा किया है, उसने सीजफायर करवाने में भूमिका निभाई है. इसी वजह से ईरान और अमेरिका का युद्ध रुक गया है. वहीं अमेरिकी इंटेलिजेंस का आशंका है कि ईरान इस सीजफायर का इस्तेमाल हथियार भंडार भरने में कर सकता है. बिजिंग से हथियारों की खेप भेजी जा रही है. वह तीसरे देश के सहारे इसे ईरान तक पहुंचा रहा है. चीन जिन हथियारों को भेज रहा है, वो कंधे से दागी जाने वाली एंटी एयर मिसाइलें हैं. इन्हें मैनपेड कहा जाता है. यह अमेरिका के उड़ने वाले विमानों के लिए खतरा मानी जाती रही है. 

अमेरिका के दावे को ट्रंप ने पूरी तरह नकारा

जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर चीन ऐसा करता है, तो उसे बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. वहीं चीनी दूतावास ने इस तरह के आरोपों को सिरे से नकार दिया है. कहा है कि यह जानकारी पूरी तरह से गलत है. 

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