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World Press Freedom Index: ‘स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र की आवाज, लेकिन आज…’, कांग्रेस ने प्रेस फ्रीडम रैंकिंग को लेकर सरकार को घेरा


कांग्रेस ने रविवार (3 मई 2026) को भारत में प्रेस की आज़ादी की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा हमला किया. पार्टी ने वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026 का हवाला देते हुए कहा कि इस सूची में भारत 157वें स्थान पर है, जिसे बहुत गंभीर कैटेगरी में रखा गया है. वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे के मौके पर कांग्रेस ने कहा कि एक आज़ाद मीडिया लोकतंत्र की आवाज़ होती है, लेकिन आज इस आवाज़ पर दबाव बढ़ रहा है.

पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन पत्रकारों और लोगों के साथ एकजुटता जताई जो सत्ता से सवाल करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए काम करते हैं. कांग्रेस ने लिखा कि वे हर उस निडर आवाज़ के साथ खड़े हैं जो सच बोलती है.

3 मई को हर साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे मनाया जाता है. इस दिन का मकसद सरकारों को यह याद दिलाना होता है कि वे प्रेस की आज़ादी का सम्मान करें. साथ ही यह दिन मीडिया से जुड़े लोगों के लिए अपने काम के नियमों और जिम्मेदारियों पर सोचने का भी अवसर होता है. यह दिन प्रेस की आज़ादी के बुनियादी सिद्धांतों को याद करने, दुनिया भर में मीडिया की स्थिति को समझने, और उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि देने का भी होता है जिन्होंने अपनी ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाई है. इसके साथ ही यह मीडिया को किसी भी तरह के दबाव या हमले से बचाने की जरूरत पर भी जोर देता है.

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वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे की शुरुआत कब हुई थी?

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे की शुरुआत 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने की थी. इससे पहले 1991 में यूनेस्को की एक बैठक में इसकी सिफारिश की गई थी. यह पहल अफ्रीकी पत्रकारों की उस अपील के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने मीडिया की आज़ादी की जरूरत को उठाया था. उसी समय विंडहोक डिक्लेरेशन सामने आया, जो प्रेस की आज़ादी के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है. यह 1991 में अफ्रीका के विंडहोक शहर में आयोजित एक सेमिनार के दौरान तैयार किया गया था. इसने न सिर्फ अफ्रीका में बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी मीडिया की आज़ादी और विविधता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई.

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