दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाई गई. 5 दिन बाद यानी 25 जुलाई को बिहार के सीवान में NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग का वीडियो सामने आया. एक तरफ पैलेट गन छर्रे बिखेरकर जानलेवा साबित हो सकती है, तो दूसरी तरफ AK-47 जंग का हथियार है. दोनों ही हथियार आम प्रदर्शनों में भीड़ कंट्रोल करने के लिए चला नहीं सकते. आखिर इन हथियारों को चलाने का कानून-गाइडलाइंस क्या हैं और धज्जियां कैसे उड़ा दीं…
पैलेट गन का विवाद और RAF की ‘गंभीर कमियां’
20 जुलाई को CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई. दावा किया गया कि पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया. मेडिकल रिपोर्ट में पैलेट इंजरी मिली. सोशल मीडिया पर वीडियो आए. इनमें RAF के जवान प्रदर्शनकारियों को जानबूझकर गिराते और मारते दिखे. 80 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए. कम से कम 130 पुलिसकर्मी और करीब 65 छात्र घायल हुए. 15 FIR दर्ज हुईं.
क्या है पैलेट गन?
पैलेट गन एक एयरगन है. इसमें धातु की छोटी गोली होती है जिसमें 100 से 150 छर्रे होते हैं. ये छर्रे त्वचा को फाड़ सकते हैं, आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जानलेवा साबित हो सकते हैं. इसे ‘लेस-लेथल’ (कम-घातक) हथियार कहा जाता है, लेकिन असल में यह बेहद खतरनाक है.
संयुक्त राष्ट्र (UN) का मानना है कि पैलेट गन से नागरिकों को बहुत ज्यादा चोट पहुंचती है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों का सीधा उल्लंघन है.
क्या कहती हैं गाइडलाइंस?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 148 में गैरकानूनी भीड़ को हटाने के लिए बल के इस्तेमाल का प्रावधान है. इसके मुताबिक, कोई कार्यकारी मजिस्ट्रेट, पुलिस थाने का प्रभारी अधिकारी या उसकी गैरमौजूदगी में कम से कम सब-इंस्पेक्टर भीड़ को तितर-बितर करने का आदेश दे सकता है.
सरकार की संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, पैलेट गन का इस्तेमाल बेहद गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए और अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए. जम्मू-कश्मीर पुलिस के रिटायर्ड DGP डॉ. शेष पाल वैद के मुताकि, पैलेट गन चलाने से पहले तीन स्टेप्स जरूरी हैं:
- पहली चेतावनी: लाउडस्पीकर से भीड़ को चेतावनी देना.
- दूसरी चेतावनी: भीड़ को ‘गैरकानूनी सभा’ घोषित करना.
- तीसरा कदम: फिर भी भीड़ न हटे तो पानी की बौछार मारना.
- आखिरी रास्ता: इन सबके बाद भी अगर भीड़ हिंसक बनी रहे, तो ही पैलेट गन या अन्य लेस-लीथल हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
यानी पैलेट गन चलाना कोई पहला कदम नहीं, बल्कि आखिरी कदम है.
कैसे उड़ाई गईं धज्जियां?
असली खुलासा 22 जुलाई को हुआ, जब RAF की इंस्पेक्टर जनरल सीमा ढुंढिया ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की. ढुंढिया ने ‘अत्यधिक बल प्रयोग’ पर हामी भरी. उन्होंने RAF के प्रदर्शन पर ‘गंभीर असंतोष’ जताया. RAF ने ‘गंभीर परिचालन कमियों’ को मान लिया.
26 सुधारात्मक उपाय लागू किए गए. ढुंढिया ने पैलेट गन (PAG), दंगारोधी गन (ARG), इलेक्ट्रिक शॉक हथियार और इलेक्ट्रिक शील्ड के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी.
इस समीक्षा में पाया गया कि जो जवान भीड़-नियंत्रण में तैनात थे, उन्हें सही ब्रीफिंग नहीं दी गई थी. जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवाद-रोधी अभियानों से ट्रांसफर हुए जवानों को भीड़-नियंत्रण में तैनात कर दिया गया. वीडियो में जवानों को भीड़ से अलग हो चुके लोगों पर बल प्रयोग करते, लोगों को जानबूझकर गिराते और बैरिकेड्स के बाहर खड़े लोगों पर हमला करते दिखाया गया.
गाइडलाइंस के मुताबिक पैलेट गन का इस्तेमाल तो दूर, जो हथियार इस्तेमाल हुए, उन्हें भी बाद में बैन कर दिया गया. जो जवान तैनात थे, उन्हें सही प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था.
बिहार में AK-47 का बवाल और पुलिस अधिकारी की सस्पेंशन
25 जुलाई 2026. बिहार के सीवान में NEET पेपर लीक के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया. इस दौरान AK-47 से फायरिंग का वीडियो सामने आया.
AK-47 पूरी तरह से एक घातक (lethal) हथियार है. भारत में AK-47 राइफल का इस्तेमाल सिर्फ आर्मी या पुलिस की स्पेशल फोर्स कर सकती है. इसके अलावा किसी के लिए भी इसका इस्तेमाल करना अवैध है. यहां तक कि इसे रखना भी गैरकानूनी है.
आम नागरिकों के खिलाफ AK-47 का इस्तेमाल भारतीय कानून में कहीं भी स्वीकार्य नहीं है. यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इसे ‘अत्यधिक बल’ माना जाता है.
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
- 27 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर सख्त टिप्पणी की.
- CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा, ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से गारंटीड है. सिर्फ इसलिए कि प्रदर्शन हो रहा है, पुलिस अत्याचार को सही नहीं ठहराया जा सकता. सिर्फ इसलिए कि आंदोलन है, इसका मतलब यह नहीं कि लाठीचार्ज हो.’
सुप्रीम कोर्ट ने खुद माना कि पुलिस की कार्रवाई में ज्यादती हुई है और देशभर में एक समान गाइडलाइंस की जरूरत है.
राहुल ने कहा- ‘सिस्टम स्टूडेंट्स के खिलाफ जानलेवा’
27 जुलाई 2026 को राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सबसे तीखा हमला किया. उन्होंने 3 बड़ी बातें कहीं:
- AK-47 और पैलेट गन का आरोप: राहुल ने कहा, ‘दिल्ली में स्टूडेंट्स पर पैलेट गन चलाई गई और बिहार में AK-47 चलाई गई. चाहे UP हो, पश्चिम बंगाल हो, बिहार हो या दिल्ली, हर जगह पैटर्न एक जैसा है.’
- PM से माफी की मांग: राहुल ने कहा, ‘मिस्टर मोदी, देश के स्टूडेंट्स से माफी मांगिए. स्टूडेंट्स पर हमला और कुचलने वालों के खिलाफ कार्रवाई कीजिए.’
- ‘जानलेवा सिस्टम’ का आरोप: राहुल ने कहा, ‘पूरा सिस्टम स्टूडेंट्स के खिलाफ जानलेवा है.’ उन्होंने PM मोदी से पूछा, ‘मिस्टर मोदी, आपका वादा कहां गया कि स्टूडेंट्स के खिलाफ FIR नहीं होगी और उन्हें रिहा किया जाएगा?’
राहुल ने इसे ‘स्टूडेंट्स के खिलाफ ब्रुटैलिटी’ करार दिया और कहा कि सरकार स्टूडेंट्स की आवाज को दबाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है.
