जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने PDP प्रेसिडेंट महबूबा मुफ्ती के जंतर-मंतर वाले बयान बड़ा हमला बोला है. इस बयान में महबूबा ने कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को सही ठहराते हुए कहा था कि कश्मीर के साथ तो ऐसा होना ही था क्योंकि वहां एक तरफ मिलिटेंट थे. उमर अब्दुल्ला ने मांग की कि महबूबा मुफ्ती इस बयान के लिए जम्मू-कश्मीर के लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें.
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि महबूबा मुफ्ती का बयान इस बात का सबूत है कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुई थीं. उन्होंने महबूबा पर विरोधाभासी रुख अपनाने और बाद में वायरल वीडियो को AI-जनरेटेड बताकर विवाद को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
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महबूबा मुफ्ती पर उमर ने बोला तीखा हमला
उमर अब्दुल्ला ने कहा, “वह जम्मू-कश्मीर के लिए जंतर-मंतर नहीं गई थीं. वह बेहतर जानती हैं कि वह वहां क्यों गई थीं और इसका जवाब खुद दे सकती हैं. लेकिन उन्होंने वहां जो कहा वह कश्मीर में मिलिटेंसी होने का तर्क देकर सत्ता के कथित दुरुपयोग, गिरफ्तारियों और अन्य कार्रवाइयों को सही ठहराना गंभीर सवाल खड़े करता है.”
उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल को सही ठहराकर उन्होंने हर कश्मीरी को आतंकवादी करार दिया है. उमर अब्दुल्ला ने कहा, “क्या मिलिटेंसी होने का मतलब यह है कि यहां कानून का राज लागू नहीं होना चाहिए? क्या इसका मतलब यह है कि बच्चों को न्याय नहीं मिलना चाहिए? क्या इसका मतलब यह है कि लोगों के पासपोर्ट रोक दिए जाने चाहिए? मुझे यह लॉजिक समझ नहीं आता.”
उन्होंने यह भी कहा कि PDP प्रेसिडेंट की आदत है कि वह अपनी क्षमता से ज्यादा करने की कोशिश करती हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा दोहरी राजनीति की है. कश्मीर में सड़क पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर “दूध और टॉफी” वाले पुराने बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “दिल्ली में एक बात और कश्मीर में दूसरी बात कहने की उनकी पुरानी आदत अभी भी नहीं गई है. लेकिन जब उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने जो कहा वह गलत था और लोगों ने उसे स्वीकार नहीं किया, तो उन्होंने माफी मांगी.”
महबूबा मुफ्ती के बयान पर PDP ने पेश की सफाई
बढ़ते राजनीतिक दबाव के जवाब में, वहीद पारा सहित पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के नेताओं ने मुफ्ती का बचाव किया है. उनका दावा है कि विरोधी पार्टियां वीडियो का गलत या एडिट किया हुआ वर्जन शेयर कर रही हैं. PDP का कहना है कि उनके शब्दों को संदर्भ से हटकर पेश किया गया. पार्टी का तर्क है कि वह केवल यह बता रही थीं कि कैसे केंद्र सरकार उग्रवाद का बहाना बनाकर कश्मीर में सख्त कार्रवाई को सामान्य बनाती है. एक ऐसी सख्त संस्कृति जो दुर्भाग्य से अब भारत के बाकी हिस्सों में छात्रों तक भी फैल रही है.
सीएम ने पीडीपी विधायक की भी आलोचना की
उमर अब्दुल्ला ने PDP विधायक वहीद पारा की भी आलोचना की. जिन्होंने दावा किया था कि बयान में बदलाव किया गया है और यह AI से बनाया गया है, न कि महबूबा मुफ्ती ने दिया है. उमर ने कहा कि गलत बयान के लिए माफी मांगने से नेता की गरिमा कम नहीं होती. उमर ने कहा, “गलती मानने में कोई बुराई नहीं है. बाद में किसी विधायक के जरिए यह दावा करने के बजाय कि वीडियो AI से बनाया गया था, उन्हें बस अपनी कही बात मान लेनी चाहिए थी. वहां पूरी मीडिया मौजूद थी.”
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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने 2015 में BJP के साथ गठबंधन के लिए कभी माफी नहीं मांगी. उमर ने कहा, “माफी तो दूर की बात है, उन्होंने 2016 की घटनाओं पर कभी अफसोस भी नहीं जताया. उन्होंने बार-बार ‘दूध और टॉफी’ वाली बात को सही ठहराने की कोशिश की, और अब तो उन्होंने यह कहकर और भी आगे बढ़ गईं कि ‘यह सही है’.”
कश्मीर घाटी में सेना की कार्रवाई पर उठाए सवाल
उमर अब्दुल्ला ने अनंतनाग हमले के बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों द्वारा की गई सख्त कार्रवाई पर भी सवाल उठाए, जिसमें 3500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था. उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से जनता में नाराजगी पैदा होती है और स्थानीय नेताओं को भी सुरक्षा तंत्र की ऐसी कार्रवाइयों का विरोध करना चाहिए.
उमर अब्दुल्ला ने कहा, “असल मुद्दा यही है. फिर भी महबूबा मुफ्ती कहती हैं कि ऐसी कार्रवाइयाँ सही हैं. हम क्या कह सकते हैं जब जिम्मेदार नेता इन बातों को नजरअंदाज करने को तैयार हों… अगर हम यहां ऐसी कार्रवाइयों के खिलाफ बोलते हैं, लेकिन हमारे ही वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय राजधानी जाकर कहते हैं कि ये सही हैं, तो जाहिर है कि ऐसी कार्रवाइयाँ जारी रहेंगी. यही असली समस्या है.”
उन्होंने आगे कहा कि बाद में यहां वापस आकर इन कार्रवाइयों की आलोचना करने का कोई फायदा नहीं है. उमर ने कहा, “इनका विरोध करने की जगह जंतर-मंतर थी, जहां पूरे देश की मीडिया मौजूद थी और देश का ध्यान वहीं केंद्रित था.”
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले सीएम उमर?
NEET मुद्दे पर छात्रों के जबरदस्त विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जीत का श्रेय छात्रों को जाता है, न कि उस मंत्री को जिन्होंने “छात्र कल्याण” का दावा करते हुए अपने इस्तीफे को सही ठहराने की कोशिश की. उन्होंने कहा, “अगर उन्हें इस्तीफा देना ही था, तो उन्हें पहले ही दे देना चाहिए था. 10, 15, 20 या 25 दिन इंतजार करने की कोई वजह नहीं थी.”
उन्होंने कहा, “उनके इस्तीफे के पत्र में जिन हालात का जिक्र किया गया है, वे लगभग एक महीने से बने हुए थे.” उमर ने आगे कहा कि अब हर कोई इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है. जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, कई लोग उनके इस्तीफे का श्रेय लेने का दावा करेंगे. सफलता के तो कई दावेदार होते हैं, जबकि विफलता अनाथ होती है. लेकिन असली श्रेय उन छात्रों को जाता है जिन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया और अपनी मांगों पर डटे रहे.”
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