Headlines

Xप्लेन: US के जवाबी कार्रवाई में 8 ईरानी तेल टैंकर तबाह, कितने अरब डॉलर का नुकसान!


मध्य पूर्व के समुद्री इलाकों में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने एक बड़ी सैन्य और आर्थिक जवाबी कार्रवाई को अंजाम दिया है. अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर हुए मिसाइल हमलों के बाद, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के ‘शैडो फ़्लीट’ (गुप्त बेड़े) पर कड़ा प्रहार करते हुए उसके 8 कच्चे तेल के टैंकरों को पूरी तरह नष्ट या बेकार कर दिया है.

यह कार्रवाई न केवल सैन्य दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम है, बल्कि इसने ईरान की अर्थव्यवस्था, उसके तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की रणनीतियों पर बहुत गहरा आघात पहुंचाया है.

नौसैनिक मुठभेड़ से टैंकरों की तबाही तक

यह पूरा घटनाक्रम फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में शुरू हुआ. अमेरिकी सेना द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी नौसेना के एक गश्ती युद्धपोत को दो बार निशाना बनाने की कोशिश की.

अमेरिकी वायु रक्षा और एंटी-मिसाइल प्रणालियों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों मिसाइल हमलों को हवा में ही सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया. इस हमले में अमेरिकी युद्धपोत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और न ही कोई अमेरिकी सैनिक हताहत हुआ. इसके तुरंत बाद, अमेरिकी नौसेना ने इलाके में अपनी गश्त जारी रखी और ईरान के इन “नाकाम हमलों” का आक्रामक जवाब देने की योजना बनाई.

CENTCOM ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 सितंबर को 3 टैंकरों को निशाना बनाया, जिसके बाद 8 और 9 सितंबर 2026 के बीच चलाए गए अभियानों में 5 अन्य जहाजों को तबाह कर दिया गया.

निशाना बनाए गए मुख्य जहाज:

-M/T कवज़ (Kaviz)

-M/T चारमीनार (Charminar)

-M/T होराइज़न 1 (Horizon 1)

-M/T रिस्को (Riesco)

-M/T डेर्या (Derya)

-M/T डाउनी (Downy)

-M/T स्टार्क 1 (Stark 1)

-M/T काइलो (Kylo)

इनमें से चार प्रमुख जहाजों को ओमान की खाड़ी में निशाना बनाया गया, जबकि M/T डेर्या को ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप (Kharg Island) के निकट तबाह किया गया.

दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने भी दो स्थानों जास्क बंदरगाह और खार्ग द्वीप के पास अपने तेल टैंकरों पर हुए अमेरिकी हमलों की पुष्टि की है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हमलों के तुरंत बाद चालक दल (Crew Members) को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई. हालांकि, इस घटना के बाद तेहरान ने कुवैत और बहरीन के तटों के पास मौजूद अन्य व्यापारिक जहाजों और बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी देकर तनाव को और बढ़ा दिया है.

ईरान को हुआ कुल नुकसान

इन 8 तेल टैंकरों के नष्ट होने से ईरान को हुए नुकसान को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित करके समझा जा सकता है

1. जहाजों की संपत्ति का प्रत्यक्ष नुकसान ($150 मिलियन – $250 मिलियन)

समुद्री परिवहन उद्योग में कच्चे तेल के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले जहाजों (जैसे अफ़्रामैक्स, स्वेज़मैक्स या विशाल VLCC श्रेणी के टैंकर) की बाज़ार में बहुत अधिक कीमत होती है. भले ही ये जहाज सेकंड-हैंड या पुराने बेड़े का हिस्सा हों, फिर भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इनकी कीमत $20 मिलियन से $50 मिलियन प्रति जहाज के बीच होती है.

8 टैंकरों के पूरी तरह नष्ट या निष्प्रभावी होने से ईरान को केवल जहाजों के धातु ढांचे, इंजन और नेविगेशन हार्डवेयर के रूप में लगभग $250 मिलियन (एक चौथाई बिलियन डॉलर) की सीधी संपत्ति का नुकसान हुआ है.

2. तेल कार्गो और राजस्व का नुकसान ($50 मिलियन – $100+ मिलियन)

एक पूरी तरह से भरा हुआ कच्चा तेल टैंकर अपनी क्षमता के अनुसार लगभग 7,00,000 से 10,00,000 बैरल तक क्रूड ऑयल ले जा सकता है.

वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 प्रति बैरल से अधिक रहने के कारण, यदि इनमें से केवल दो या तीन जहाज भी पूरी तरह लदे हुए थे, तो ईरान को सीधे तौर पर $60 मिलियन से $90 मिलियन से अधिक के कच्चे तेल का नुकसान हुआ है. जो जहाज खाली भी थे, उनके नष्ट होने से भी उस तेल की भावी बिक्री रुक गई जो वे खार्ग द्वीप से लादने वाले थे.

3. ‘शैडो फ़्लीट’ (गुप्त बेड़े) का विनाश

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, निशाना बनाए गए ये सभी जहाज ईरान के “डार्क/शैडो फ़्लीट” के रीढ़ की हड्डी थे.

शैडो फ़्लीट क्या है? पश्चिमी देशों और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान ऐसे जहाजों का इस्तेमाल करता है जो अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS/ट्रांसपोंडर) बंद रखते हैं, अपने झंडे बदलते हैं और समुद्र के बीच में ही एक जहाज से दूसरे जहाज पर तेल ट्रांसफर करते हैं.

फंडिंग का मुख्य जरिया: इस गुप्त बेड़े से मिलने वाले राजस्व का सीधा इस्तेमाल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अभियानों को फंड करने के लिए किया जाता था.

बदलाव की असम्भवता: अमेरिकी नौसेना द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में बढ़ाई गई सख्त नाकेबंदी और उपग्रह निगरानी के कारण, तेहरान के लिए रातों-रात इन जहाजों की जगह नए शैडो टैंकरों को शामिल करना लगभग असंभव हो गया है.

4. ईरान पर व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभाव

तेल निर्यात क्षमता पर रोक: खार्ग द्वीप ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा संभालता है, जहां से मुख्य रूप से चीन और अन्य एशियाई बाज़ारों को तेल भेजा जाता है. खार्ग द्वीप और जास्क के बिल्कुल मुहाने पर अमेरिकी हमलों ने यह साबित कर दिया है कि ईरान के मुख्य निर्यात चैनल अब असुरक्षित हैं. इससे ईरान की हर महीने होने वाली अरबों डॉलर की एक्सपोर्ट कमाई पर खतरा मंडराने लगा है.

समुद्री बीमा और परिवहन लागत में उछाल: इस घटना के बाद फारस की खाड़ी से गुजरने वाले किसी भी ईरानी या उससे जुड़े जहाज के लिए मरीन इंश्योरेंस और ‘वॉर रिस्क’ फीस अत्यधिक बढ़ गई है. अत्यधिक जोखिम के कारण अब खरीदार और शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त भारी डिस्काउंट की मांग करेंगी, जिससे ईरान को प्रति बैरल तेल पर मिलने वाला शुद्ध मुनाफा बहुत कम हो जाएगा.

अमेरिकी नौसेना की यह जवाबी कार्रवाई केवल एक तात्कालिक सैन्य प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसने ईरान की अनौपचारिक तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी है. 8 महत्वपूर्ण टैंकरों के नष्ट होने से जहां तेहरान को तुरंत अरबों रुपये का सीधा नुकसान हुआ है, वहीं लंबे समय में उसके कच्चे तेल के निर्यात और IRGC की फंडिंग प्रणालियों पर ऐसा संकट खड़ा हो गया है जिससे उबर पाना ईरान के लिए बेहद कठिन साबित होगा.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *