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अक्षय तृतीया पर चंदन अनुष्ठान से आएगी सुख-समृद्धि? इंद्रेश उपाध्याय से जानिए सही तरीका और महत्व


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  • भक्ति मंत्रों संग नाम-स्मरण से मन एकाग्र, साधना गहरी होगी।

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का बेहद ही खास और पवित्र तिथि है. माना जाता है कि, इस दिन दान, पूजा और पुण्य कर्म करने से अक्षय फल यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है. इसी वजह से इस दिन को समृद्धि, सौभाग्य और आधात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है. मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन शुरू किए गए कार्य दीर्घकाल तक शुभ परिणाम देते हैं. 

इस साल अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल 2026, रविवार के दिन पड़ रहा है. ऐसे में वृंदावन के कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने एक प्रवचन में चंदन से जुड़े विशेष भक्ति-भावपूर्ण अनुष्ठान का उल्लेख किया गया है. उन्होंने बताया कि, अक्षय तृतीया के दिन पहले से ही घर पर चंदन घिसना शुरू कर देना चाहिए. इसे नियमित रूप से एकत्र किया जाए, ताकि पर्याप्त मात्रा में शुद्ध चंदन तैयार हो सके.  

यह प्रक्रिया केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि मन को शांत और भक्ति के प्रति स्थिर भी करती है.

अक्षय तृतीया पर चंदन से जुड़ा उपाय

अपनी कथा में इंद्रेश महाराज ने बताया कि, घिसे हुए चंदन को एक साफ कपड़े में डालकर निचोड़कर उसका रस (पानी) अलग कर लेना चाहिए. इस प्रक्रिया के बाद चंदन का एक मुलायम पेस्ट या गोले के रूप में तैयार कर लेना चाहिए, जिसे शुद्ध और पवित्र माना जाता है. इसे पूजा के लिए सुरक्षित और साफ रखें, ताकि अक्षय तृतीया के दिन इसका इस्तेमाल किया जा सके. 

अक्षय तृतीया के दिन इस चंदन का इस्तेमाल ठाकुर जी के श्रृंगार के रूप में करने की परंपरा है. इसमें सिर से लेकर पैरों तक चंदन का लेप लगाना चाहिए. इसे केवल बाहरी सजावट नहीं, बल्कि शरीर को शीतलता देने और भक्ति भाव को गहरा करने का प्रतीक माना जाता है.

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भारतीय संस्कृति में चंदन को पवित्रता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसका इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठान में खास महत्व रखता है. 

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान “राम रामा राम रामा, हरे हरे” जैसे नाम का उच्चारण और स्मरण और भक्ति मंत्रों का उच्चारण करने की सलाह दी जाती है. इसका उद्देश्य मन को एकाग्र करना और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को बढ़ाना बताया गया है. मान्यताओं के मुताबिक, नाम-स्मरण से मन की चंचला कम होती है और साधना में गहराई आती है. 

हालांकि इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि, यह एक आध्यात्मिक और भक्ति आधारित परंपरा है, जिसे श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाया जाता है. इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से यह मनोवैज्ञानिक शांति और सकारात्मक से जोड़ा जाता है. 

कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया पर चंदन का यह इस्तेमाल एक प्रतीकात्मक साधना है, जिसका उद्देश्य बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धता, शांति और भक्ति को जागृत करना माना जाता है.

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