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अभिजीत दिपके के बयान पर भड़के रामदास आठवले, बोले- ‘उनके दिमाग…’


CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के प्रधानमंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिए गए बयान पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अभिजीत दिपके की भाषा और बयानबाजी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की बातें करना बिल्कुल उचित नहीं है. आठवले ने उनसे माफी मांगने का भी निवेदन किया.

रामदास आठवले ने कहा, “लगता है कि अभिजीत दिपके के दिमाग में ज्यादा हवा भर गई है. कुछ युवा लोग उन्हें समर्थन कर रहे हैं, यह अच्छी बात है. उनके भले के लिए युवा वर्ग का समर्थन और उपयोग सकारात्मक तरीके से किया जाना चाहिए. लेकिन माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ गलत बयान देना बिल्कुल ठीक नहीं है.”

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‘बाबा साहेब ने पूरे देश को आगे बढ़ाया’

अभिजीत दिपके के उस कथित बयान को लेकर भी आठवले ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें नेहरू और बाबा साहेब अंबेडकर का जिक्र किया गया था. उन्होंने कहा, “यह कहना कि नेहरू जी ने बाबा साहेब अंबेडकर को आगे बढ़ाया था, ठीक नहीं है. बाबा साहेब अंबेडकर ने पूरे देश को आगे बढ़ाया. संविधान लिखकर बाबा साहेब अंबेडकर जी ने देश के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है.”

आठवले ने आगे कहा, “इसलिए मुझे लगता है कि अभिजीत दिपके की इस तरह की भाषा और बयानबाजी बिल्कुल बकवास है. अभिजीत दिपके का इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है. प्रधानमंत्री जी के खिलाफ इस तरह की आपत्तिजनक बातें करना बिल्कुल उचित नहीं है.”

लोकतंत्र का जिक्र करते हुए रामदास आठवले ने कहा, “लोकतंत्र में क्या होता है, यह हम लोग देखेंगे. अगर आपको हमें हराना है तो आपको हराने का अधिकार है. आप कांग्रेस पार्टी के साथ जाना चाहते हैं तो जाएं, जिधर से जाना है जाएं, लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है.”

फडणवीस पर बयान को लेकर भी जताया विरोध

देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ दिए गए बयान पर भी आठवले ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, “देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ भी उन्होंने जिस तरह का बयान दिया है, मैं उसका विरोध करता हूं. प्रधानमंत्री जी का अपमान किया है, इसलिए मैं उनके बयान का विरोध करता हूं और उनका निषेध करता हूं. मैं उनसे माफी मांगने का निवेदन करता हूं.”

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‘यह हमारी मराठी संस्कृति नहीं है’

रामदास आठवले ने कहा, “वह हमारे समाज से हैं, लेकिन समाज का हिस्सा होने के बावजूद इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बिल्कुल ठीक नहीं है. यह हमारी मराठी संस्कृति नहीं है. अंबेडकरवादी लोगों की ऐसी संस्कृति नहीं है. इसलिए मैं उनके बयान का विरोध और निषेध करता हूं.”





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