Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं निर्जला व्रत रखती हैं. लेकिन क्या हत्या जैसे गंभीर अपराध में सजा काट रही महिलाओं को भी जेल में व्रत रखने और पूजा करने की अनुमति मिलती है? जानिए भारतीय कानून और जेल प्रशासन के नियम क्या कहते हैं.
जेल की सलाखें किसी व्यक्ति की आजादी छीन सकती हैं, लेकिन उसकी धार्मिक आस्था को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकतीं. अहोई अष्टमी से पहले मेरठ जेल की कुछ महिला बंदियों को लेकर ऐसी ही चर्चा सामने आई है. इनमें चर्चित हत्याकांडों से जुड़ी महिलाएं भी शामिल हैं, जो अपनी संतान के कल्याण के लिए व्रत और पूजा करना चाहती हैं.
यह मामला केवल धार्मिक परंपरा का नहीं, बल्कि एक कानूनी सवाल भी उठाता है. क्या गंभीर अपराध में दोषी महिला को भी जेल में पूजा-पाठ करने का अधिकार है?
मुस्कान, रविता और दामिनी ने मांगी पूजा की अनुमति
मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद मुस्कान रस्तोगी, रविता और दामिनी ने 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखने की इच्छा जताई है.
चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाली मुस्कान अपनी दो बेटियों के लिए व्रत रखना चाहती है. उसने सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की है. वहीं, पति अमित कश्यप की हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा पा चुकी रविता भी अपने बच्चों के लिए व्रत रखेगी. पति अतुल पंवार की हत्या के आरोप में जेल में बंद दामिनी ने भी अपने बेटे के लिए पूजा करने की अनुमति मांगी है.
जेल प्रशासन ने क्या कहा?
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के अनुसार तीनों महिला बंदियों ने व्रत रखने और पूजा सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है. जेल प्रशासन ने नियमानुसार आवश्यक पूजा सामग्री उपलब्ध कराने की बात कही है.
क्या जेल में पूजा करना कैदियों का अधिकार है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है. जेल में बंद व्यक्ति भी इस अधिकार से पूरी तरह वंचित नहीं होता. हालांकि जेल की सुरक्षा, अनुशासन और स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन अनिवार्य है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय की मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016 में बंदियों की धार्मिक भावनाओं और गरिमा के सम्मान पर जोर दिया गया है. चूंकि जेल राज्य का विषय है, इसलिए व्यावहारिक व्यवस्थाएं संबंधित राज्य के नियमों से तय होती हैं.
जेल में व्रत और पूजा कैसे होती है?
महिला बंदियों को व्रत रखने के लिए जेल प्रशासन को जानकारी देनी होती है. नियमानुसार पूजा सामग्री और फलाहार की व्यवस्था की जा सकती है. दीपक, अगरबत्ती और अन्य सामग्री के उपयोग पर सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध लागू हो सकते हैं.
अहोई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग अनुसार अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर 2026 को है. दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक रहेगा. तारों के दर्शन का समय शाम लगभग 6 बजे है.
यह मामला याद दिलाता है कि अपराध की सजा और धार्मिक स्वतंत्रता दो अलग विषय हैं. जेल में बंद व्यक्ति कानून के दायरे में रहकर अपनी आस्था का पालन कर सकता है.
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