उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर चल रही अंदरूनी गुटबाजी अब पूरी तरह से खुलकर सामने आ गई है. सपा नगर अध्यक्ष और आजम खान के बेहद करीबी माने जाने वाले आसिम राजा ने पार्टी के नए कैंप कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थानीय सांसद मुहिबुल्लाह नदवी पर इशारों-इशारों में तीखा हमला बोला है. इसके साथ ही आसिम राजा ने दावा किया है कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव जल्द ही रामपुर आकर आजम खान के आवास पर जाएंगे. इस ऐलान ने यूपी की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है.
सांसद नदवी पर आसिम राजा का निशाना
जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सागर की मौजूदगी में आयोजित इस प्रेस वार्ता में आसिम राजा ने पार्टी के ही कुछ लोगों पर गुटबाजी और जिला अध्यक्ष के खिलाफ गलत बयानबाजी करने का आरोप लगाया.
- जेल में मुलाकात पर उठाया सवाल: आसिम राजा ने सपा सांसद मुहिबुल्लाह नदवी का नाम लिए बिना कहा कि उनसे पूछना चाहिए कि वह अभी तक जेल में आजम खान से मिलने क्यों नहीं गए.
- जीत का श्रेय आजम खान को: उन्होंने कहा कि नदवी को टिकट मिलना बड़े नेताओं का फैसला था, लेकिन वह केवल आजम खान की वजह से चुनाव जीते हैं.
- विरोध के आरोप को किया खारिज: आसिम राजा ने उन आरोपों को झूठा बताया जिनमें कहा जा रहा था कि आजम खान के समर्थकों ने नदवी का विरोध किया था. उन्होंने कहा, “अगर आजम समर्थक विरोध करते, तो नदवी चुनाव नहीं जीत पाते.”
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‘जेल से बन रही 2027 की रणनीति’
आसिम राजा ने स्पष्ट किया कि 2027 का विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव और आजम खान के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और रामपुर की सभी 5 विधानसभा सीटों पर सपा जीत दर्ज करेगी. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जल्द ही अखिलेश यादव रामपुर में आजम खान के घर आएंगे.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भले ही आजम खान जेल में हैं, लेकिन पार्टी और रामपुर में उनके दबदबे में कोई कमी नहीं आई है. आगामी चुनावों में टिकट वितरण से लेकर रणनीति तक में आजम खान की अहम भूमिका होगी और राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके द्वार पर आना ही पड़ेगा.
अखिलेश यादव के सामने ध्रुवीकरण की चुनौती!
अखिलेश यादव का संभावित रामपुर दौरा उनके लिए किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं माना जा रहा है.
- ध्रुवीकरण का खतरा: अगर अखिलेश यादव चुनाव से पहले आजम खान के घर जाते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को राज्य में ध्रुवीकरण करने का एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है, जिससे अखिलेश बचना चाहते हैं.
- नाराजगी का डर: दूसरी ओर, यदि अखिलेश यादव रामपुर नहीं जाते हैं, तो उन्हें आजम खान और उनके समर्थकों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है.
गौरतलब है कि पिछली बार जब आजम खान जेल से बाहर आए थे, तब अखिलेश यादव ने उनकी शर्तों पर ही रामपुर का दौरा किया था. अब देखना दिलचस्प होगा कि रामपुर जेल से आजम खान के खेमे द्वारा चली गई इस राजनीतिक चाल पर अखिलेश यादव क्या फैसला लेते हैं.
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