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आशुतोष रांका, सौरव दास पर किन धाराओं में FIR, हो सकती है कितनी सजा?


कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को दिल्ली पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. दावा किया जा रहा है कि मंगलवार देर रात तीनों की गिरफ्तारी के बाद बुधवार सुबह उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया जाएगा. इसको लेकर सीजेपी सदस्यों के वकील अंगद गौतम ने जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि रांका, दास और शिंदे पर क्रिमिनल ट्रेसपास की धाराएं लगाई गई हैं लेकिन कई बार मांगने के बावजूद उन्हें एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है.

मीडिया से बात करते हुए एडवोकेट अंगद गौतम ने बताया, “कनॉट प्लेस पर जो एफआईआर हुई है, उसकी कॉपी अभी तक हमें मिली नहीं है. हमने कई बार कॉपी मांगी है पर जवाब नहीं मिला. हमें बताया गया है कि क्रिमिनल ट्रेसपास की धाराएं लगाई गई हैं. पब्लिक अफसर की बात न मानने के सेक्शन लगेंगे. BNS की धाराएं 269 और 320-321 में से कुछ लगाई गई हैं. हम कंफर्म नहीं कर सकते जब तक कॉपी हमारे हाथ में न आ जाए.”

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बैरिकेड और गेट फांदकर आए थे आशुतोष रांका और सौरव दास

दरअसल, मंगलवार (13 अक्टूबर) को रांका और सौरव दास जंतर-मंतर के पास प्रतिबंधित जोन में पहुंच गए थे. फिलहाल, प्रशासन की ओर से पूरा इलाका बंद किया गया है और वहां किसी भी तरह के प्रोटेस्ट की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद भारी बैरिकेडिंग और कड़ी सुरक्षा को भेदते हुए जंतर-मंतर पहुंच गए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए.

‘किसी सरकारी आदेश से ऊपर आते हैं हमारे संवैधानिक अधिकार’

CJP सदस्यों को हिरासत में लेने और उनके खिलाफ FIR दर्ज किए जाने पर वकील अभिष्ट हेला ने बताया, “भले ही प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) के आधार का इस्तेमाल किया जा रहा हो, मैं बस एक बात कहना चाहूंगा: आर्टिकल 19 के तहत बोलने और अपनी बात रखने की आजादी का हमारा संवैधानिक अधिकार, और साथ ही शांतिपूर्ण विरोध का हमारा अधिकार, सेक्शन 163 के तहत किसी सरकारी आदेश या किसी अन्य आदेश से ऊपर नहीं हो सकता. हालांकि, सेक्शन 163 के तहत पाबंदियां लगाई जा सकती हैं, लेकिन हमारे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता. इस मामले में सरकार का रवैया और तरीका लोगों के मौलिक अधिकारों को कमजोर करता है. ये अधिकार संविधान द्वारा गारंटीकृत हैं और समय-समय पर अदालती फैसलों से और मजबूत हुए हैं. किसी भी व्यक्ति से ये अधिकार छीने नहीं जा सकते. सरकार ने अब लोगों के मौलिक अधिकारों की सीमा का उल्लंघन किया है.”

‘देश का झंडा फहराने पर हिरासत में लिया गया’

वहीं, CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने जानकारी दी, “अभी हम देख रहे हैं कि दिल्ली पुलिस एक रूलबुक के हिसाब से काम कर रही है, और वह रूलबुक यह है कि उन्हें ऊपर से आदेश मिलते हैं. वे कानून को दरकिनार कर उस रूलबुक का पालन करते हैं. आज हमने यह भी देखा कि कैसे ये सभी लोग सिर्फ तिरंगा फहराने के लिए जंतर-मंतर गए थे. तिरंगा फहराने के कारण उन्हें हिरासत में ले लिया गया. अब लगभग 24 घंटे हो चुके हैं. उन्हें किसी वकील से मिलने नहीं दिया गया. उन्हें हिरासत में लेने का कारण भी नहीं बताया गया. अब, जब उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है, तो कारण बताया गया है.”

इन धाराओं में होती है कितनी सजा?

अगर रांका और दास पर आपराधिक अतिक्रमण की धारा लगती है तो इसमें 3 महीने की जेल, और 5,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है. वहीं, वैध रूप से जारी आदेश की अवज्ञा, जिससे सरकारी काम करने वाले व्यक्ति को बाधा/परेशानी या नुकसान का जोखिम हो, तो दोषी को 6 महीने की साधारण जेल हो सकती है. इसके अलावा, आदेश की अवज्ञा से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा हो, या दंगा होने की आशंका पैदा हो तो एक साल की जेल हो सकती है. अगर जानबूझकर अपमान करके शांति भंग करने के लिए उकसाने का दोष सिद्ध हो तो 2 साल की जेल का प्रावधान है.

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दिल्ली पुलिस की ओर से अभी FIR की कॉपी सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए सीजेपी सदस्यों पर कौन सी धाराएं लगी हैं इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. CJP के वकील को भी इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है क्योंकि उनका दावा है कि बार-बार मांगे जाने के बावजूद पुलिस ने उन्हें FIR की कॉपी नहीं दी है.

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