राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ की नियुक्ति पर सियासत तेज हो गई है. रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कई सवाल उठाए हैं. ओवैसी ने कहा कि पहले ट्रस्ट में जो नियुक्तियां हुई थीं, वे भी सरकार की ओर से ही की गई थीं.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की कथित चोरी हुई. ओवैसी ने कहा कि लोग इसलिए नाराज हैं क्योंकि उनकी आस्था के साथ मजाक किया गया है.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “आप जिसे चाहें नियुक्त कर सकते हैं, क्योंकि सरकार आपके हाथ में है. लेकिन जिन लोगों पर चोरी के आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच रिपोर्ट भी सरकार के पास है. फिर वह रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?” ओवैसी ने आरोप लगाया कि आस्था के नाम पर लोगों से वोट लिए गए, लेकिन कुछ लोगों ने उसी आस्था का फायदा उठाकर कथित रूप से भ्रष्टाचार किया.
अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सीईओ की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नई नियुक्ति की चर्चा में पुराने सवालों को नहीं भुलाया जाना चाहिए. उन्होंने मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले का जिक्र करते हुए पूछा कि यदि बड़े जिम्मेदार लोगों को क्लीन चिट मिल चुकी है, तो छोटे कर्मचारी अब भी जेल में क्यों हैं.
अखिलेश ने कहा, “अगर बड़े लोगों को क्लीन चिट मिल गई है, तो छोटे कर्मचारियों को भी रिहा किया जाना चाहिए.” उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भगवान राम को चढ़ाए गए चढ़ावे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी.
सपा नेताओं ने भी की जांच की मांग
सपा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने भी इस मामले में सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि नई कमेटियां और नया सीईओ नियुक्त किया जा रहा है, लेकिन पहले हुई कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए. सुमन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी निष्पक्ष न्याय दिलाने में विफल रही है. उन्होंने मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग दोहराई.
नियुक्ति का स्वागत भी हुआ
वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि भगवान राम के आशीर्वाद से नए सीईओ के नेतृत्व में मंदिर का कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ेगा.
संत समाज का विरोध
वाराणसी के पातालपुरी मठ के प्रमुख जगद्गुरु बालक दास देवाचार्य महाराज ने इस नियुक्ति का विरोध किया. उनका कहना है कि धार्मिक संस्थानों का संचालन संतों और धार्मिक परंपराओं के जानकार लोगों की देखरेख में होना चाहिए, न कि सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों के माध्यम से. उन्होंने आशंका जताई कि सीईओ व्यवस्था से मंदिर में वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा मिल सकता है और प्रशासनिक हस्तक्षेप बढ़ सकता है. उनके अनुसार, धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखना आवश्यक है.
