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TMC के 20 बागियों को स्पीकर ने दी बड़ी राहत, महुआ मोइत्रा बोलीं- ‘सरप्राइज…’


लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को अयोग्यता मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 22 सितंबर तक का अतिरिक्त समय दिया है. इस पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा हैरानी जताई है. टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने 18 जून को स्पीकर ओम बिरला से इन बागी सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य करार देने की मांग थी. इस मामले पर 18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होनी है.

ओम बिरला के फैसले से हैरान हुईं महुआ मोइत्रा

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘सरप्राइज… लोकसभा स्पीकर ने अब TMC के 20 बागी नेताओं को जवाब देने के लिए 22 सितंबर तक 3 हफ्ते का अतिरिक्त समय दे दिया है. इस वजह से अब 18 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल कोर्ट में खड़े होकर इसी बहाने से सुनवाई टालने और देरी करने की मांग करेंगे. आप किसी को बेवकूफ नहीं बना सकते. बीजेपी + एनसीपी = बहुत बड़े झूठे.’

टीएमसी के 20 बागी सासंदों ने 14 जून को खुद को पार्टी से अलग कर लिया था. बाद में वे नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए. इसके बाद इन्होंने NDA को समर्थन का ऐलान किया था. सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार इस बागी गुट के मुख्य नेता हैं. दलबदल कानून से बचने के लिए इन 20 सांसदों ने त्रिपुरा की ‘नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय का ऐलान किया था.

बागी सांसदों के लिए सदन में अलग जगह

स्पीकर ओम बिरला ने बागी 20 सांसदों के सदन में बैठने की व्यवस्था तो अलग कर दी है, लेकिन अभी तक उनकी पार्टी के विलय को मंजूरी नहीं दी है. वहीं अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर ओम बिरला से मिलकर मांग की थी कि बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और TMC में बचे 8 वफादार सांसदों के बैठने का अलग इंतजाम किया जाए. 

सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को TMC के 20 सांसदों की अयोग्यता पर कार्यवाही तय समयसीमा में करने की बात कही थी. अभिषेक बनर्जी ने कोर्ट से मांग की थी कि वह उन 20 बागी टीएमसी सांसदों की सदस्यता खत्म करने की याचिकाओं पर जल्द फैसला लें, जिन्होंने पार्टी से अलग होने की कोशिश की है.

बागी सांसदों की ये मांग

इन सांसदों ने लोकसभा में खुद को एक अलग राजनीतिक समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है. टीएमसी का कहना है कि ये सभी सांसद टीएमसी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे, इसलिए किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी और गठन के साथ जाना दल-बदल विरोधी कानून के तहत आता है और उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए.



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