उत्तराखंड के मेडिकल एजुकेशन से जुड़ा एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है. दरअसल राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग ने मानकों में गंभीर अनियमितताएं, शिक्षकों की फर्जी हाजिरी और अस्पताल में खामियां पाई जाने के बाद राज्य के प्रमुख संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रुख अपनाया है. आयोग ने दून के ओल्ड मसूरी रोड स्थित उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज में नए सत्र के लिए बीएएमएस और पीजी प्रोग्राम में एडमिशन पर पूरी तरह रोक लगा दी है. इसके अलावा हरिद्वार स्थित राज्य के एकमात्र उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज पर भी शिक्षकों के कागजी दाखिले और फर्जी हाजिरी के आरोप में बीयूएमएस की सीटों पर रोक लगाने के साथ-साथ संस्थानों पर एक करोड़ रुपये का भारी जुर्माना ठोका गया है. उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने दोनों मामलों में आयोग की ओर से जारी आदेशों, जुर्माने और मान्यता पर लगी रोक की पुष्टि की है.
उत्तरांचल के कॉलेज में क्यों लगी एडमिशन पर रोक?
आयोग के मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की टीमों ने 30 जुलाई को उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज पर सरप्राइज इंस्पेक्शन किया था. वहीं अक्टूबर में हुई सुनवाई के बाद आयोग ने संस्थान में पाई गई गंभीर कमियों के आधार पर 120 सीटों, जिसमें बीएएमएस की 100 सीटें और पीजी की 20 सीटों पर एडमिशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी. एडमिशन प्रक्रिया पर रोक की वजह जांच में आई खामियां है. इसमें जांच टीम को शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के पर्याप्त सबूत नहीं मिले. बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और सीसीटीवी फुटेज की जांच में पाया गया कि कई शिक्षक केवल कागजों पर ही दर्ज थे. वहीं अस्पताल के ओपीडी रजिस्टर में दर्ज मरीजों की संख्या और हकीकत में मौके पर मौजूद मरीजों की संख्या में बड़ा अंतर पाया गया. इसके अलावा 105 बेड की क्षमता वाले अस्पताल के पास वैलिड रजिस्ट्रेशन और फायर ब्रिगेड की एनओसी नहीं थी. वहीं दवा वितरण व्यवस्था, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण, पैथोलॉजी लैब और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधाओं में भी मानक के अनुरूप भारी कमियां दर्ज की गई.
हरिद्वार के कॉलेज पर भी गिरी गाज
उत्तराखंड के एकमात्र यूनानी मेडिकल कॉलेज में बीयूएमएस की सभी 60 सीटों पर नए एडमिशन पर रोक लगा दी है. जून में हुई छापेमारी के दौरान पता चला था कि 20 प्रोफेसर और शिक्षक केवल कागजों पर रजिस्टर्ड थे, जबकि वे असल में पढ़ाते ही नहीं थे. वहीं जांच टीम ने पाया कि शिक्षकों के आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया जा रहा है. सबूत मांगने पर कॉलेज प्रशासन ने एडिट किए गए लूप वाले फर्जी सीसीटीवी फुटेज सौंपे थे इसके अलावा प्रत्येक फर्जी शिक्षकों के मामले में कुल सीटों में 5% की कटौती का नियम है. वहीं 20 फर्जी शिक्षक पाए जाने पर आयोग ने 100% कटौती लागू करते हुए सत्र 2026-27 के लिए एडमिशन शून्य कर दिए और एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया.
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कॉलेज प्रबंधन का पक्ष, हमें किया जा रहा टारगेट
कार्रवाई के बाद कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी कंबोज ने आयोग के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि एनसीआईएसएम ने बहुत कठिन और व्यावहारिक मानक तय कर दिए हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि नियम के अनुसार मान्यता रद्द करने की जानकारी दो महीने पहले दी जानी चाहिए थी, लेकिन यह फैसला दूसरी काउंसलिंग के समय बताया जा रहा है. प्रबंधन ने बायोमेट्रिक खामियों के पीछे ग्रामीण इलाके में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी खराबी का तर्क दिया. वहीं कॉलेज प्रबंधन ने इस फैसले के खिलाफ आयोग के अध्यक्ष के समक्ष अपील करने और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है.
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