उत्तर प्रदेश में 23 अक्टूबर को बीते विधान परिषद चुनाव में वोटर लिस्ट में कई जगह मतदाता या उसके पिता या फिर पते का नाम अजीबो-गरीब सामने आए. जिसके बाद चुनाव आयोग पर सवाल खड़े हो गए. यही नहीं गलतियों में भी जातिवादी होने के आरोप लगने लगे. इस पर अब आयोग ने सफाई दी है.
आयोग ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया जिसमें लिखा, “हालिया विधान परिषद के चुनाव की मतदाता सूची में एक अजीबोगरीब नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ भी है. कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है. हमारे द्वारा गलती किया जाना स्वीकार है लेकिन हमारे सौभाग्य से गलती होते समय भी जाति का भेदभाव नहीं हुआ है.भगवान का यह भी शुक्र है की राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा है. नहीं तो जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का इल्ज़ाम भी लगता.”
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आप नेता संजय सिंह के पोस्ट पर जवाब
सीईओ उत्तर प्रदेश एक हैंडल से आप नेता संजय सिंह को जवाब दिया गया है और इलाहबाद-झांसी स्नातक एमएलसी चुनाव के लिए वोटर लिस्ट की स्क्रीन शॉट है, जिसमें पिता का नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ लिखा गया है. इस पोस्ट के माध्यम से आयोग ने अपने ऊपर लग रहे जातिवादी होने के आरोप को नकारा है और नाम गलत होने की गलती वह स्वीकार कर चुका है. उसमें सुधार का दावा कर रहा है.
स्नातक और शिक्षक MLC में मिलीं थीं शिकायतें
यहां बता दें कि इस तरह के कई और नामों और पते पर अजीबो-गरीब नाम दर्ज मिले. जिस पर राजनीतिक दलों ने सवाल खड़े किए. बाद चुनाव अधिकारियों ने सफाई दी कि ये गलती सॉफ्टवेयर द्वारा नाम के ट्रांसलेशन से हुई है जिसे सुधारा जा रहा है.
यूपी में के कई जिलों में SIR के बाद वोटर लिस्ट में गड़बड़ी मिली है. पीलीभीत में एक ही एपिक कार्ड पर 13 हजार से ज्यादा नाम उर पते दर्ज मिले जिसके बाद बवाल हो गया था. बाद में आयोग ने तत्कालीन एसडीएम समेत कई कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई. बस्ती और आजमगढ़ में भी डुप्लीकेट नाम के कई मतदाता मिले.
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