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कब खत्म हो जाएगा पृथ्वी में दबा कच्चा तेल? जानिए कब तक है इसकी एक्सपायरी डेट


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  • कई तेल भंडार दुर्गम, प्राकृतिक गैस 50, कोयला 100-150 साल शेष.

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने थमने का नाम नहीं लिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर गैस और ईंधन की समस्याएं और गहरी होती जा रही हैं.. इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इस संकट ने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हमारी धरती के भीतर छुपा यह सीमित काला सोना कब तक हमारा साथ निभा पाएगा और इसकी आखिरी तारीख क्या है. चलिए जानें.

कितना बचा है धरती का खजाना?

वैज्ञानिकों और भूगर्भशास्त्रियों के रिसर्च के अनुसार, पृथ्वी के सीने में अभी भी कच्चे तेल की अच्छी-खासी मात्रा मौजूद है. मगर इस कहानी में एक बड़ा पेंच यह है कि इस तेल का बहुत बड़ा हिस्सा या तो जमीन की अत्यधिक गहराई में छिपा है या फिर ऐसे दुर्गम और जटिल इलाकों में स्थित है जहां तक इंसानी पहुंच आसान नहीं है. इन छिपे हुए ठिकानों से तेल को बाहर निकालना तकनीकी और आर्थिक रूप से बेहद खर्चीला काम माना जाता है.

दुनिया के पास कितने दिन का तेल मौजूद?

अगर दुनिया में मौजूदा समय में हो रही ईंधन की खपत की रफ्तार को पैमाना माना जाए, तो दुनिया के पास अब केवल 40 से 50 साल तक इस्तेमाल करने लायक प्रमाणित तेल का भंडार ही बचा है. आंकड़ों की मानें तो प्रमाणित भंडार के आधार पर हमारे पास करीब 47 से 50 साल की अवधि शेष है. हालांकि, इस समय सीमा को विज्ञान की नई खोजें, आधुनिक तकनीकें और नए क्षेत्रों की पहचान थोड़ा आगे जरूर बढ़ा सकती हैं.

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इंसानी पहुंच से अछूते रह जाएंगे भंडार

विशेषज्ञों का दावा है कि धरती पर मौजूद सारा का सारा तेल कभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाएगा. इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि तेल के कई बड़े भंडार अंटार्कटिका के बर्फीले मैदानों या फिर बेहद गहरे समंदर की अतल गहराइयों के नीचे दबे हुए हैं, जो इंसानी पहुंच से कोसों दूर हैं. भविष्य में तेल की कमी होने पर कीमतें इतनी बढ़ जाएंगी कि लोग खुद ही सौर और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों पर शिफ्ट हो जाएंगे.

कितने साल में तैयार होता है कच्चा तेल?

प्रकृति को इस कच्चे तेल को तैयार करने में लाखों-करोड़ों साल का लंबा वक्त लगता है. यह ईंधन प्राचीन काल के जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के अवशेषों से बनता है. जब ये अवशेष जमीन के नीचे गहराई में समा जाते हैं, तो वहां की अत्यधिक गर्मी और भारी दबाव के कारण वे धीरे-धीरे तरल ईंधन में तब्दील हो जाते हैं. यही वजह है कि इसे दोबारा इतनी जल्दी बनाना इंसानों के बस की बात नहीं है.

बेलगाम खपत की रफ्तार कितनी?

बीते करीब 150 सालों में मानव आबादी ने अपनी सुख-सुविधाओं के लिए इस प्राकृतिक संसाधन का दोहन बहुत बेरहमी से किया है. गाड़ियों के लिए पेट्रोल-डीजल की मांग, प्लास्टिक का बढ़ता उत्पादन और भारी उद्योगों के लगातार विस्तार ने कच्चे तेल की खपत को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है. जितनी तेजी से हम इसे खर्च कर रहे हैं, उस तुलना में इसके नए विकल्प तैयार होने की रफ्तार काफी धीमी दिखाई देती है.

गैस और कोयले की उल्टी गिनती शुरू

केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि अन्य जीवाश्म ईंधन भी तेजी से खत्म होने की कगार पर हैं. वर्तमान खपत की दर को देखें तो प्राकृतिक गैस के भंडार भी अगले 50 से 53 वर्षों में पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं. राहत की बात सिर्फ कोयले को लेकर है, जो सबसे लंबा चलने वाला जीवाश्म ईंधन है. पृथ्वी पर मौजूद कोयले के भंडार को पूरी तरह खत्म होने में अभी लगभग 100 से 150 साल का समय लग सकता है.

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