Headlines

जमीन विवाद से चर्चा में आये नरेंद्र मेहता कौन हैं?


बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता इन दिनों मीरा-भायंदर की एक जमीन विवाद को लेकर चर्चा में हैं. ये विवाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बचपन के स्कूल के सहपाठी असगर अली वोरा से जुड़ा है. ये मामला काफी पुराना है, लेकिन जिस तरह वोरा की पीएम मोदी से मुलाकात के बाद नरेंद्र मेहता ने मंगलवार को ऐलान किया कि वो विवादित जमीन से कब्जा छोड़ देंगे.

मेहता के इस ऐलान के बाद से वो काफी चर्चा में हैं. ये मामला साल 2011 के एक जमीन विवाद से जुड़ा है और चूंकि विवाद पीएम मोदी के सहपाठी से जुड़ा था इसलिए चर्चा में है. 

कौन हैं नरेंद्र मेहता?

नरेंद्र मेहता महाराष्ट्र के ठाणे (मीरा-भायंदर) क्षेत्र से बीजेपी के विधायक हैं. इसके साथ ही वो रियल एस्टेट कारोबारी भी हैं. मेहता  निर्माण कंपनी सेवन इलेवन ग्रुप के मालिक हैं. उनका जन्म  राजस्थान के देसूरी में 25 सितंबर 1972 को हुआ था. वो एक मध्यमवर्गीय मारवाड़ी परिवार से आते हैं. पिता की असमय मृत्यु के बाद उन्हें जल्द ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. उन्होंने केवल कक्षा 8वीं तक ही पढ़ाई की है.

PM मोदी से मिलते ही सुलझ गया बचपन के दोस्त का मैटर, BJP विधायक पीछे हटे

नरेंद्र मेहता का सियासी सफर

साल 2007 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, तब मेहता मीरा-भयंदर नगर निगम के महापौर बने थे. इसके बाद साल 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा और मीरा-भांयदर सीट से विधायक चुने गए थे.  अपने राजनीतिक करियर के दौरान मेहता ने मीरा भयंदर के विकास और आधुनिकीकरण के लिए काम किया. साल 2019 के चुनाव में वह निर्दलीय उम्मीदवार गीता जैन हार गए थे, लेकिन साल 2024 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर दोबारा विधायक बने हैं. 

जमीन से जुड़े मामले को लेकर सुर्खियों में क्यों?

नरेंद्र मेहता वर्तमान में  मीरा-भायंदर (ठाणे) में एक बड़े जमीन विवाद मामले को लेकर सुर्खियों में हैं. पीएम मोदी के बचपन के दोस्त रहे असगर अली वोरा (81 वर्ष) ने भायंदर पूर्व के नवघर इलाके में स्थित उनकी जमीन पर आरोप लगाया था कि नरेंद्र मेहता की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कब्जा कर रखा है. वोरा ने इस संबंध में पीएम मोदी से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर संज्ञान लिया.  

इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में एक बैठक हुई. इस बैठक में असगर अली वोरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम की कमिश्नर राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए थे. बैठक में ही मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा और कहा कि वो जमीन पर अपना कब्जा छोड़ रहे हैं. इसके साथ ही ये भी जानकारी दी कि ये जमीन उन्होंने 2019 में मर्विन फर्नांडीस नाम के एक शख्स से खरीदी थी. उनके इसी कदम के बाद से वो चर्चा में हैं. 

असगर अली वोहरा ने क्या आरोप लगाए थे?

वोरा ने पीएम मोदी से मुलाकात में दावा किया था कि उन्होंने 1989 में नवघर इलाके में लगभग 2,810 वर्गमीटर जमीन खरीदी थी और इसे कभी नहीं बेचा न ट्रांसफर किया. वोरा ने आरोप लगाया कि साल 2011 में जाली दस्तावेज तैयार कर उनकी जानकारी के बिना ही जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया गया. वोरा ने बताया कि जमीन के एक हिस्से पर स्वयं बिल्डर्स का कब्जा है, जबकि दूसरा हिस्सा मेहता से जुड़ी कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स का है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मीरा-भयंदर नगर निगम के टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने जमीन पर उनके मालिकाना हक के दावे के बावजूद निर्माण को मंजूरी दी है.

वोरा ने इस मामले में CBI जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि उनकी शिकायतों के बाद भी इस मामले में नगर पालिका, राजस्व और पुलिस विभागों के अधिकारियों ने कोई एक्शन नहीं लिया. वोरा ने ये भी बताया कि इस मामले में साल 2015 में उन्होंने एक FIR भी दर्ज कराई थी, जिसकी रिपोर्ट CID ने इसी साल सौंपी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *