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कर्नाटक के साथ कावेरी विवाद, CM विजय ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा


कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु आमने-सामने हैं. कर्नाटक सरकार की ओर से कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन (CWRC) समिति के आदेशों के कथित तौर पर उल्लंघन के बाद तमिलनाडु सरकार ने सोमवार (3 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और राज्य को कावेरी जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की है.

तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, तमिलनाडु के सीएम विजय ने राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में जाने का निर्देश दिया है, यह फैसला कर्नाटक की ओर से कथित तौर पर CWMA और CWRC की ओर से जारी किए गए निर्देशों के बाद भी कावेरी जल का तय हिस्सा जारी नहीं करने के बाद लिया गया है.

कावेरी जल विनियमन (CWRC) ने बीती 28 जुलाई को कावेरी बेसिन की जलवैज्ञानिक और मौसम संबंधी स्थितियों का आकलन करने के बाद कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह कृष्णा राजा सागर (KRS) और काबिनी जलाशयों से पानी छोड़कर 29 जुलाई से 12 अगस्त 2026 तक बिलिगुंडलू में 3,500 क्यूसेक जल की निकासी सुनिश्चित करे. इस फैसले के बाद 30 जुलाई को आयोजित सीडब्ल्यूएमए की 54वीं आपातकालीन बैठक में मंजूरी मिली थी.

तमिलनाडु सरकार का क्या तर्क?

तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया कि कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का पानी आनुपातिक रूप से छोड़ने में कोई कठिनाई नहीं है. सरकार ने यह भी बताया कि केआरएस और काबिनी जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ी हुई वर्षा के चलते तमिलनाडु आनुपातिक आधार पर बिलिगुंडलू जलाशय में 26.954 टीएमसी पानी हासिल करने का हकदार है. सरकार ने कहा कि यह सीडब्ल्यूएमए द्वारा निर्देशित 4.536 टीएमसी से काफी ज्यादा है.

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विजय सरकरा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

कर्नाटक की ओर से तमिलनाडु को पानी का आनुपातिक हिस्सा भी जारी करने में विफल रहने का हवाला देते हुए और वरिष्ठ कानूनी सलाहकार की सलाह के आधार पर, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य को सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में उचित आदेश प्राप्त करने के लिए याचिका दायर करने का निर्देश दिया. इस मुद्दे को सुलझाने और यह तय करने के लिए कि तमिलनाडु को निर्धारित समय के भीतर कावेरी जल का उसका उचित हिस्सा मिलने का निर्देश देने की मांग को लेकर 3 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई.

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