जम्मू-कश्मीर में बिजली की दरों में औसतन 6.83 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी मिलने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. जॉइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने 22 अगस्त को बिजली की नई दरों को मंजूरी दी है. ये दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होंगी. फैसले के बाद सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं.
JERC ने कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड दोनों के टैरिफ में बदलाव को मंजूरी दी है. इसका मकसद 2922.85 करोड़ रुपये के कुल रेवेन्यू गैप को भरने में मदद करना है.
हालांकि रेगुलेटरी कमीशन का कहना है कि सरकार की तरफ से 2420.78 करोड़ रुपये की सब्सिडी नहीं मिलती तो बिजली की दरों में बढ़ोतरी करीब 40 फीसदी तक पहुंच सकती थी.
जरूरी खबर, 1 सिंतबर से बिजली उपभोक्ताओं को लगेगा महंगाई का झटका
सरकार और बिजली विभाग का तर्क है कि ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और बिजली वितरण में हो रहे भारी नुकसान को कम करने के लिए टैरिफ के ढांचे को तर्कसंगत बनाना जरूरी है.
BJP ने पूरे जम्मू में किया प्रदर्शन, CM के पुतले जलाए
बिजली की दरों में बढ़ोतरी को लेकर बीजेपी ने जम्मू में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. J&K बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा और सांसद जुगल किशोर के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पुतले जलाए.
बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर अपने चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना है कि सरकार ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था, लेकिन अब आम लोगों पर बिजली के बढ़े हुए बिल का बोझ डाला जा रहा है.
बीजेपी ने 31 अगस्त 2026 को बड़े स्तर पर सचिवालय घेराव करने की भी धमकी दी है. इससे आने वाले दिनों में बिजली दरों का मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है.
यह पुरानी चालबाजी का हिस्सा- सज्जाद लोन
पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने भी बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने इसे पुरानी चालबाजी बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार पहले बिजली के बिल बढ़ाती है और बाद में लोगों को छोटी-मोटी राहत देकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश करती है.
सज्जाद लोन ने X पर लिखा, “जम्मू-कश्मीर के लोगों को अब बिजली के लिए अपनी जेब से ज्यादा पैसे देने होंगे. रेगुलेटर ने बिजली टैरिफ में 6.83% की बढ़ोतरी को मंजूर किया है और कहा है कि इससे टैरिफ का बड़ा झटका नहीं लगेगा. लेकिन उन लोगों के लिए यह निश्चित रूप से एक झटका है, जिनसे सत्ताधारी पार्टी ने 2024 में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था.”
PDP ने भी सरकार को घेरा
पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता वहीद-उर-रहमान पारा ने भी सरकार के मुफ्त बिजली के चुनावी वादे पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “मुफ्त टैरिफ के वादे से लेकर ज्यादा बिल तक, उस वादे का क्या हुआ?”
वहीद ने सभी के लिए एक जैसी बढ़ोतरी की आलोचना करते हुए कहा कि कश्मीर में बिजली सर्दियों में जीवन के लिए जरूरी है, न कि कोई मौसमी विलासिता, इसलिए यह बढ़ोतरी कम आय वाले लोगों के लिए विनाशकारी साबित होगी.
वहीद ने X पर J&K के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को टैग करते हुए लिखा, “ऐसे समय में जब बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई की मार जोरदार है. आम परिवार गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, सरकार ने बिजली की दरों में 6.83% की बढ़ोतरी कर दी है. वे एक महत्वाकांक्षी एजेंडे के साथ सत्ता में आए थे, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, मुफ्त गैस और मुफ्त राशन.”
आगा मुंतज़िर ने भी साधा निशाना
बडगाम से PDP विधायक आगा मुंतज़िर मेहदी ने भी सरकार को जन-विरोधी बताते हुए निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आई थी, जिसमें 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा भी शामिल था.
आगा मुंतज़िर मेहदी ने X पर लिखा, “सत्ताधारी पार्टी बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आई थी, जिसमें 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा भी शामिल था. लगभग दो साल बाद भी वह वादा पूरा नहीं हुआ है, जबकि अब उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसे देने के लिए कहा जा रहा है.”
उद्योग जगत ने भी जताई नाराजगी
फेडरेशन चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज कश्मीर (FCIK) ने भी बिजली की दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया है. संगठन का कहना है कि राज्य समर्थित मार्केटिंग इंसेंटिव की कमी के बीच बिजली की बढ़ी लागत स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है. उद्योग जगत को डर है कि ऑपरेशनल लागत बढ़ने से स्थानीय कारोबार और उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा.
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वहीं, सरकार और DISCOM अधिकारियों का कहना है कि टैरिफ में बदलाव बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है. सरकार 2420.78 करोड़ रुपये की ग्रांट-इन-एड का हवाला देते हुए कह रही है कि उसने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है. उसका तर्क है कि अगर सरकार की ओर से यह आर्थिक मदद नहीं दी जाती तो लोगों को करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ता.
अब बिजली की नई दरें 1 सितंबर से लागू होने वाली हैं. ऐसे में 31 अगस्त के प्रस्तावित सचिवालय घेराव से पहले जम्मू-कश्मीर में बिजली का मुद्दा सियासत के केंद्र में बना हुआ है.
