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‘किसी भी कीमत पर हो डील’, ईरान से समझौते के लिए क्यों बेताब हैं ट्रंप?


अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहा युद्ध अभी तक थम नहीं सका है, न ही दोनों देशों के बीच समझौता हो सका है. पाकिस्तान ने समझौते की कोशिश जरूरी की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया. हालांकि अब एक बड़ी जानकारी सामने आई है. दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ समझौता करने के लिए बेताब हैं. वे किसी भी कीमत पर डील करना चाहते हैं. 

युद्ध की वजह से अमेरिका और ईरान को भारी नुकसान हुआ है. यूएस ने अब तक ईरान के कई ठिकानों को तबाह किया है. ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है. इन सबके बीच अहम बात यह है कि अमेरिका को यु्द्ध की वजह से मोटा पैसा खर्च करना पड़ रहा है. गोला-बारूद से लेकर फाइटर जेट तक, सब पर भारी खर्च हो रहा है. इसकी वजह से अमेरिकी को तगड़ा झटका लगा है. ‘अलजजीरा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ट्रंप अब युद्ध से छुटकारा पाना चाहते हैं और वे हर हाल में ईरान से डील करना चाहते हैं.’

अमेरिका-ईरान समझौते का तैयार हुआ ड्राफ्ट

अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते का ड्राफ्ट सामने आया, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया है. कतर के अधिकारियों के मुताबिक, US और ईरान के बीच एक संभावित समझौते के ड्राफ्ट पर चर्चा हो रही है और ये प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है. साथ ही इस बात पर जोर दिया कि ये एक अल्पकालिक कूटनीतिक समाधान के लिए है, और सीधी बातचीत के बारे में अभी कोई ठोस योजना नहीं है. 

अमेरिका-ईरान के बीच नहीं हो रही सीधी बातचीत

कतर विदेश मंत्रालय के मुताबिक अमेरिका-ईरान युद्ध को सुलझाने की कोशिशें काफी आगे बढ़ चुकी हैं. संभावित समझौते के ड्राफ्ट बांटे जा रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है. ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि बातचीत के लिए उन पर समय की कोई पाबंदी नहीं है. इस बीच ओमान के साथ बातचीत में ईरान का मकसद अस्थाई व्यवस्था करना है, जो तीन महीने तक चलेगी. 

ईरान की अमेरिका को चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद हॉर्मुज में तनाव कम हो सकता है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब दोनों ही देश सहमत होंगे. समझौते की खबरों के बीच ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर यूएस ने ईरान जहाजों के लिए हॉर्मुज में नाकेबंदी जारी रखी तो वे चुप नहीं बैठेंगे. ईरान के सैन्य अधिकारी रेजाई ने कहा कि अगर रास्ता नहीं दिया गया तो तेहरान अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाएगा.

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