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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में उमड़ी भीड़ ने क्या कुछ कहा? अब बयान हो रहे वायरल!


राजधानी के जंतर-मंतर पर शनिवार (06 जून) को शिक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में देश के कई राज्यों से पहुंचे छात्र, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से कहा, ”अगर शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जाएगा.” उन्होंने समर्थकों से अगले शनिवार को भी जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को और मजबूत बनाने की अपील की. शिकागो से दिल्ली पहुंचे अभिजीत को पुलिस सुरक्षा के बीच सीधे प्रदर्शन स्थल तक ले जाया गया था. प्रशासन ने उन्हें सुबह से शाम तक निर्धारित समय के लिए प्रदर्शन की अनुमति दी थी.

सरकार पर युवाओं को भटकाने का आरोप

सभा को संबोधित करते हुए अभिजीत ने आरोप लगाया कि युवाओं के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर उन्हें अन्य विषयों में उलझाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों का असर सीधे छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है. दोपहर में भीषण गर्मी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें कार्यक्रम स्थल छोड़ना पड़ा. शाम होते-होते पुलिस ने प्रदर्शन स्थल खाली करवा दिया.

कॉकरोच मास्क पहनकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, कई राज्यों से जुटे छात्र

प्रदर्शन में शामिल बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रतीकात्मक रूप से कॉकरोच मास्क पहन रखे थे. कई स्कूली छात्र अपने अभिभावकों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे. प्रतिभागियों का कहना था कि NEET, CUET, CBSE और SSC जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है. नागालैंड, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों से युवा इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे.

बदलाव की शुरुआत शिक्षा से होगी

बिहार से आए छात्र आदित्य ने एबीपी लाइव की टीम से कहा कि वह देश की व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद के साथ आंदोलन में शामिल हुए हैं. उनके अनुसार वर्तमान संघर्ष केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भविष्य में स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में संख्या कम दिख सकती है, लेकिन एक मजबूत विचार पूरे देश में परिवर्तन ला सकता है. उनका विश्वास है कि आने वाले वर्षों में देश का युवा बदलाव की दिशा तय करेगा.

एक व्यक्ति भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है

वहीं, उत्तर प्रदेश के अमित कुमार ने भी एबीपी लाइव की टीम से कहा कि यदि लोगों में व्यवस्था सुधारने का संकल्प हो तो एक व्यक्ति भी परिवर्तन की शुरुआत कर सकता है. उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की मानसिक स्थिति पर कोई गंभीर चर्चा नहीं होती. उनका कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए.

युवाओं ने उठाए जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल

एक अन्य प्रदर्शनकारी युवक ने कहा कि परीक्षा विवादों पर अब तक स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है. उन्होंने आरोप लगाया कि न तो जिम्मेदारी तय की गई और न ही सार्वजनिक रूप से कोई जवाबदेही स्वीकार की गई. प्रदर्शनकारी का कहना था कि यदि शिक्षा व्यवस्था में लगातार तकनीकी और प्रशासनिक चूकें सामने आ रही हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.

पेपर लीक से करोड़ों छात्र प्रभावित

हरियाणा के हिसार से आए डॉ. रमेश ने भी एबीपी की टीम से कहा कि वर्षों से परीक्षा संबंधी विवाद छात्रों के भविष्य को प्रभावित करते रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि बार-बार सामने आने वाली पेपर लीक की घटनाओं से करोड़ों परीक्षार्थियों को नुकसान हुआ है. उनके अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होती दिखाई नहीं देती.

‘मैं अपने बच्चों के भविष्य के लिए यहां आया हूं’

दिल्ली निवासी आकाश ने भी कहा कि वह किसी राजनीतिक पहचान के बजाय एक आम नागरिक के रूप में प्रदर्शन में शामिल हुए हैं. उनका कहना था कि मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यही युवाओं के भविष्य का आधार बनती है. उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है.

जंतर-मंतर पर सुरक्षा का कड़ा घेरा

बताते चलें कि, प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या तैनात की गई थी. पूरे क्षेत्र की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया गया था. सुरक्षा एजेंसियों ने जमीन से लेकर आसमान तक गतिविधियों पर नजर बनाए रखी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो.

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