दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण में बदलाव करने और यूजीसी के नियमों के विरोध में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए हैं. वे सवाल कर रहे हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है? क्या गरीब होने की वजह से उन्हें इसकी भी इजाजत नहीं दी जा रही है? एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि हमारी मांग है कि आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किए जाएं. इसका राजनीतिकरण बंद होना चाहिए. जिसे जरूरत है, उसे मदद मिले.
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (21 अगस्त) को जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच विरोध स्थल और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. वहीं इस आंदोलन पर राजनेताओं की प्रतिक्रिया आना शुरू हो गई है. नेताओं ने आरक्षण सुधार आंदोलन को खैरात, देशद्रोही और गहरी साजिश व इसे असंवैधानिक करार दिया है.
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आरक्षण के विरोध में की राज्यों से आए लोग
बता दें कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी आरक्षण हटाने को लेकर जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे. इसमें कई राज्यों से लोग पहुंचे. पुलिस ने शुक्रवार को मोर्चा संभालते हुए प्रदर्शकारियों को वहां हटा दिया. इस दौरान प्रदर्शनकारी पोस्टर-बैनर लेकर जंतर-मंतर पर पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया के जरिए जुटे हैं. लोगों के हाथों में तिरंगा झंडा भी दिखाई दिया.
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आरक्षण को जाति के आधार के बजाय आर्थिक स्थिति को देखकर दिया जाना चाहिए. आर्थिक रूप से कमजोर-गरीब लोगों को उनकी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ का प्रावधान लागू करने की भी मांग की. उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित नीतियों में बदलाव की मांग भी की.
आरक्षण सुधार आंदोलन पर क्या बोले नेता?
आरक्षण सुधार आंदोलन को लेकर नेताओं की प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है. इस बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा आरक्षण सुधार के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के खिलाफ एक और गहरी साजिश है. उन्होंने कहा कि आरक्षण पीडीए का अधिकार है किसी की इच्छा का विषय नहीं.
उन्होंने कहा कि बीजेपी व उनके संगी-साथी समय-समय पर जिस तरह कभी ‘समीक्षा’ तो कभी ‘सुधार’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग कर आरक्षण का विरोध करते हैं या कभी ‘क्रीमीलेयर’ की बात करते हैं या ‘आरक्षण त्यागने’ की सलाह देते हैं, वो सदियों से शोषित-वंचित लोगों को मिले आरक्षण के अधिकार की हकमारी की लगातार की जा रही कोशिश के अलग-अलग मुखौटे हैं. आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा”
आरक्षण हटाओ आंदोलन पर स्वामी आनंद स्वरूप की प्रतिक्रिया
स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा हमारी लड़ाई योग्यता के लिए है; चयन का एकमात्र आधार योग्यता ही होनी चाहिए. हम समानता के लिए लड़ रहे हैं. वर्षों से आरक्षण ने देश को खोखला कर दिया है. अयोग्यता को सहारा देकर, अयोग्य व्यक्तियों को व्यवस्था में शामिल किया गया, जिससे राष्ट्र को नुकसान पहुंचा. हम चाहते हैं कि आरक्षण को पहले समाप्त किया जाए. दूसरा, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम पूरे देश में तबाही मचा रहा है. यह समाज में जाति आधारित हिंसा को बढ़ावा दे रहा है, लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहा है और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर रहा है. यूजीसी भी सरकार लेकर आई है. इसलिए तीनों मांगों पर सरकार ध्यान दें और तीनों चीजों को खत्म किया जाना चाहिए.
उन्होंने आगे यह भी कहा, “श्रवण समाज यूजीसी पर आंदोलन कर रही है. वहीं बीजेपी इसको टाल रही है. डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने इस पूरे आंदोलन की हवा निकालने का प्रयास किया.” स्वामी आनंद स्वरूप ने चेतावनी देते हुए कहा, “जब तक आरक्षण, यूजीसी और एससी-एक्ट वापस नहीं होगा. तब तक यह आंदोलन चलेगा. चाहें प्रधानमंत्री को ही क्यों न वापस होना पड़े. अगर ये वापस नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री वापस होंगे.”
योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. वहीं, आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी से मंत्री संजय निषाद ने नाराजगी जताई है. निषाद समुदाय के लिए आरक्षण की मांग पर मंत्री संजय निषाद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, यह सवाल बीजेपी से पूछा जाना चाहिए, यह उनका अपना वादा है और उनके एजेंडे का हिस्सा रहा है. मैं खुद एक वकील हूं और इस मुद्दे की वकालत करता रहूंगा. जब बीजेपी विपक्ष में थी, तब वे खुद इसकी वकालत करते थे. अब पार्टी खुद ही जज हो गई है, तो उनकी जवाबदेही है.
यूपी के डिप्टी सीएम ने भी दी प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे के साथ यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं की मांगों पर केंद्रीय नेतृत्व गंभीरतापूर्वक विचार करेगा. उन्होंने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को अगले दो दिन में केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा और केंद्रीय मंत्री के साथ उनकी बैठक कराई जाएगी. जंतर-मंतर पर हुए धरना-प्रदर्शन से संबंधित पत्र हमें मिला है. हमने वह पत्र केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है. केंद्रीय नेतृत्व ने कहा है कि जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हमारे युवा साथियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.
आरक्षण सुधार आंदोलन पर बोले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शनिवार को कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांगें यदि व्यवस्थित तरीके से सामने आती हैं तो सरकार उनसे बातचीत करेगी. पासवान ने कहा, ‘आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी देश की बड़ी आबादी में नाराजगी पैदा कर सकती है. जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगें व्यवस्थित तरीके से रखेंगे तो सरकार उनसे बातचीत करेगी.’ आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू कर चुकी है.
रामदास आठवले ने आंदोलन को बताया असंवैधानिक
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शनिवार को कहा कि आरक्षण ‘‘संवैधानिक अधिकार’’ है और इसे खत्म करने की मांग को उन्होंने ‘‘असंवैधानिक’’ बताया है. राज्य मंत्री आठवले ने कहा कि कुछ लोग आरक्षण समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य ने इसके खिलाफ सोशल मीडिया अभियान चलाए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए आरक्षण खत्म करने की मांग की, जबकि कुछ अन्य ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर इसे समाप्त करने की बात कही. लेकिन, आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हमारा संवैधानिक अधिकार है. आरक्षण खत्म करने की मांग करने वाले ‘राष्ट्रद्रोही’ लोग हैं.
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