शहरों के लोगों के बीच इन दिनों घर की खाली जगह में ताजी सब्जियां उगाने का शौक तेजी से बढ़ रहा है. बाजार में मिलने वाले साग-भाजी पर अक्सर गंदे पानी और केमिकल वाले कीटनाशकों का खतरा बना रहता है. ऐसे में अगर अपनी बालकनी या छत पर एकदम ताजी, हरी पालक और मेथी मिल जाए तो मजा ही आ जाता है. पालक और मेथी दोनों ही ऐसी पत्तेदार सब्जियां हैं. जिन्हें उगाने के लिए किसी बड़े खेत की जरूरत नहीं होती.
थोड़े सी जानकारी के साथ आप इन दोनों सब्जियों को एक साथ गमलों में बड़ी सकते हैं. इन दोनों का लाइफ साइकिल और खान-पान का तरीका काफी हद तक एक जैसा होता है. इसलिए इन्हें इंटरक्रॉपिंग यानी साथ-साथ उगाना बेहद आसान और फायदेमंद सौदा साबित होता है. चलिए आपको बताते हैं कि घर की बालकनी में पालक और मेथी की यह ऑर्गेनिक जोड़ी कैसे तैयार की जाए.
ऐसे करें उगाने की शुरुआत
पालक और मेथी उगाने के लिए सबसे पहले सही गमला और उपजाऊ मिट्टी लानी होती है. चूंकि दोनों पत्तेदार सब्जियों की जड़ें बहुत गहरी नहीं जातीं. इसलिए आपको गहरे गमलों की बजाय 6 से 8 इंच गहरे और चौड़े रेक्टेंगुलर टब या ग्रो बैग का इस्तेमाल करना चाहिए. चौड़े कंटेनर में दोनों फसलों को फैलने की पूरी जगह मिलती है. गमले की तली में ड्रेनेज होल यानी पानी निकलने के छेद जरूर चेक कर लें.
अब बात करते हैं मिट्टी की जिसे एकदम हल्का और भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके लिए 50 फीसदी सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 फीसदी अच्छी तरह सड़ी हुई पुरानी गोबर की खाद और 20 फीसदी सूखी रेत को आपस में बढ़िया से मिला लें. इस तरह के पॉटिंग मिक्स में पानी ठहरता नहीं है. हवा का संचार सही रहता है और जड़ों को तेजी से फैलने के लिए भरपूर पोषक तत्व मिल जाते हैं.
बीज बोने का सही तरीका
गमले में मिट्टी भरने के बाद बीज बोने का तरीका सबसे जरूरी चीज होती है. मेथी के बीजों को बोने से पहले 4 से 6 घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगो दें इससे उनका अंकुरण बेहद तेज और स्वस्थ होता है. पालक के बीज थोड़े हार्ड होते हैं इसलिए उन्हें हाथ से हल्का सा रगड़कर बोएं. अब कंटेनर में उंगली या खुरपी से करीब आधा इंच गहरी पैरलल लाइनें खींच लें.
एक लाइन में पालक के बीज थोड़ी दूरी पर डालें और उसकी ठीक अगली लाइन में मेथी के बीज बिखेरें. लाइनों के बीच कम से कम 4 से 5 इंच का फासला रखें जिससे दोनों पौधों को धूप और हवा बराबर मिलती रहे. बीजों को हल्की मिट्टी पतली परत से ढक दें. इसके बाद स्प्रे बॉटल से हल्का पानी छिड़कें. जिससे बीज अपनी जगह से न हिलें. चार से छह दिनों के भीतर नन्हे-मुन्ने हरे पत्ते मिट्टी से बाहर झांकने लगेंगे.

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धूप, पानी का सही तालमेल बनाएं रखें
पौध निकल आने के बाद दोनों पौधों को दिनभर में कम से कम 4 से 5 घंटे की अच्छी धूप मिलनी जरूरी है. बालकनी के उस कोने में गमला रखें जहां सुबह की नर्म धूप अच्छी आती हो. पानी देते वक्त यह ध्यान रखें कि मिट्टी में सिर्फ नमी बनी रहे. ज्यादा पानी देने से जड़ों में फंगस लग सकती है और पत्तियां पीली पड़ सकती हैं. जब पौधे 20 से 25 दिन के हो जाएं.
तो हर 15 दिन में सरसों की खली का पतला पानी खाद के रूप में दें. कटाई करते समय पौधों को कभी भी जड़ से न उखाड़ें. तेज कैंची से पत्तियों को नीचे से एक या डेढ़ इंच ऊपर से काटें. ऐसा करने से तने में से नई कोपलें फूटेंगी और आप अगले दो से तीन महीनों तक एक ही गमले से लगातार चार-पांच बार ताजी पालक और खुशबूदार मेथी की ऑर्गेनिक हार्वेस्टिंग ले सकेंगे.
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