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चीनी फंड से अमेरिका के दोषी वैज्ञानिक चार्ल्स लाइबर ने शेन्जेन में बनाई ब्रेन कंप्यूटर लैब, मकसद इंसान के दिमाग में चिप लगाना


अमेरिका के एक वैज्ञानिक ने शेन्जेन (चीन) में अपनी रिसर्च लैब बनाई है. इस साइंटिस्ट को अमेरिका हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में चीन से मिले पेमेंट को लेकर झूठ बोलने का दोषी ठहराया गया था. यह साइंटिस्ट अब उस तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर चीन ने पहचाना है. यह है, इंसान के दिमाग में इलेक्ट्रॉनिक्स चिप लगाना. इन वैज्ञानिक का नाम है, चार्ल्स लाइबर, उनकी उम्र 67 साल है. वह ब्रेन कम्प्यूटर इंटरफेस के क्षेत्र में जाने मानें रिसर्चर्स में से एक हैं. 

माना जा रहा है कि इस तकनीक से ALS जैसी बीमारियों में इलाज और लकवाग्रस्त मरीजों को फिर से हरकत में लाने की उम्मीद है. इसके सैन्य इस्तेमाल भी किए जा सकते हैं. अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के वैज्ञानिकों ने ब्रेन इंटरफेस को सुपर सोल्जर बनाने के तरीकों के तौर पर जांचा है. इससे मानसिक फुर्ती और हालात की समझ को बढ़ाने में मदद मिलेगी.

लाइबर पर क्या थे आरोप? 

मामला साल 2021 से जुड़ा है. लाइबर को जूरी ने दोषी पाया है. साल 2021 में उन्हें सजा सुनाई., उन पर फेडेरल जांचकर्ताओं, विदेशों से टैलेंट भर्ती करने वाले एक चीनी सरकारी कार्यक्रम से अपने संबंधों के बारे में झूठे बयान देने और एक चीनी यूनिवर्सिटी से मिले भुगतानों से जुड़े टैक्स क्राइम का आरोप था. उन्होंने दो दिन जेल और 6 महीने नजरबंदी में बिताए. उनपर 50 हजार डॉलर का जुर्माना लगाया. उन्हें इंटरनल रेवेन्यू सर्विस को 33,600 डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया. उन्होंने अपने बचाव में कहा था कि वह एक लाइलाज लिम्फोमा कैंसर से पीड़ित थे. 

चीन की सरकार कर रही फंडिंग

रॉयटर्स ने सजा सुनाए जाने के तीन साल बाद बताया था कि लाइबर चीन के सरकार फंड वाले i-Brain की देखरेख कर रहे हैं. यहां उन्हें खास नैनोफैब्रिकेशन उपकरण, प्राइमेट रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच मिली. यह लैब शेन्जेन मेडिकल एकेडमी ऑफ रिसर्च एंड ट्रांसलेशन (SMART) का ही एक हिस्सा है.

रॉयटर्स ने बताया कि उनके लैब के पास प्राइमेट (बंदरों) पर रिसर्च के लिए खास सुविधाएं और चिप बनाने के उपकरण मौजूद हैं. यह सरकारी फंडिंग से अरबों डॉलर पाने वाले सरकार समर्थित संस्थानों के एक विशाल नेटवर्क का हिस्सा है. यह ऐसे संस्थान है, जो अमेरिका के शीर्ष वैज्ञानिकों की प्रतिभाओं को वापस चीन लाने की कोशिश कर रहा है. 

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