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चीन ने J-20 फाइटर जेट LAC के करीब किया तैनात, सैटेलाइट से सामने आयी तस्वीर


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  • राफेल मीटियोर, J-20 PL-15 से अधिक प्रभावी।

करीब आठ साल बाद अपने इंजन और एवियोनिक्स को पूरी तरह अपग्रेड करने के बाद चीन का जे-20 स्टेल्थ फाइटर जेट एक बार फिर मैदान में कूद गया है. इस बार चीन ने स्वदेशी जे-20 ‘चेंगदू’ फाइटर जेट को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब अपने दो अहम एयरबेस पर तैनात किए हैं. ओपन सोर्स इंटेलिजेंस पर इन दोनों एयरबेस पर खड़े जे-20 की तस्वीरें भी सामने आई हैं. 

खास बात यह है कि जे-20 की तैनाती की ये सैटेलाइट तस्वीरें ऐसे सामने आई हैं, जब अगले कुछ हफ्तों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर आने जा रहे हैं. मौका होगा, सिंतबर के महीने में ब्रिक्स सम्मेलन का. 

हालांकि, दो साल पहले भी चीन ने इन्हें सिक्किम के करीब तिब्बत के शिगात्से एयरबेस पर तैनात किया था. उस वक्त भी ओपन सोर्स इंटेलिजेंस ने शिगात्से एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थी, जिसमें एक दर्जन जे-20 फाइटर जेट कतार में खड़े दिखाई पड़ रहे थे. उस वक्त सिक्किम के करीब हाशिमारा एयरबेस (उत्तर बंगाल) में भारतीय वायुसेना की तरफ से रफाल (राफेल) फाइटर जेट की पूरी एक स्क्वाड्रन की तैनाती के जवाब में चीन ने ऐसा किया था. 

चीन ने दो एयरबेस पर तैनात किए J-20 विमान

इस बार चीन ने जिन दो एयरबेस पर जे-20 की तैनाती की है, उनमें पहला शिंजियांग प्रांत का होटन एयरबेस और दूसरा तिब्बत का डैमशुंग एयरबेस है. होटन की पूर्वी लद्दाख के DBO से करीब 245 किलोमीटर की दूरी है और डैमशुंग की अरूणाचल प्रदेश के तवांग से करीब 350 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई ‘माइटी-ड्रैगन’ भारत के ओमनी-रोल फाइटर जेट रफाल (राफेल) को टक्कर दे पाएगा भी या नहीं. चीन में जे-20 को माइटी-ड्रैगन के नाम से जाना जाता है. 

भारत की नजर में आने पर चीन ने माइटी ड्रैगन को छिपाया

दरअसल, साल 2018 में अरुणाचल प्रदेश से सटी LAC की एयरस्पेस पर कुछ ऐसा हुआ था कि चीन ने अपने तथाकथित स्टेल्थ फाइटर जेट जे-20 को हमेशा-हमेशा के लिए पूरी दुनिया की नजरों से छिपा लिया था. उसके एक साल पहले यानी 2017 में ही चीन ने बेहद जोश खरोश के साथ स्टेल्थ फाइटर जेट जे-20 बनाने का दावा किया था. अमेरिका के एफ-22 और एफ-35 के बाद दुनिया में ये तीसरा ऐसा फाइटर जेट था, जिसे स्टेल्थ फाइटर जेट माना जा रहा था. 

‘स्टेल्थ’ यानी ऐसा लड़ाकू विमान जो दुनिया की किसी रडार और फाइटर जेट की पकड़ में ना आ सके, लेकिन भारतीय वायुसेना के सुखोई फाइटर जेट ने अरुणाचल प्रदेश से सटी चीनी एयरस्पेस में जे-20 यानी चेंगदू फाइटर जेट को डिटेक्ट कर लिया था. उस वक्त तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस बात की तस्दीक की थी. 

कभी-कभार ट्रायल पर नजर आता था माइटी ड्रैगन

अरुणाचल प्रदेश से सटी LAC की एयरस्पेस की निगहबानी के लिए भारतीय वायुसेना ने असम के तेजपुर और झाबुआ में सुखोई फाइटर जेट की पूरी स्क्वाड्रन तैनात कर रखी है. सुखोई के डिटेक्टशन के चलते एशिया के पहले स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने का दम भरने वाले चीन का सपना अधूरा रह गया. इस घटना के बाद से जे-20, जिसे चीन ने ‘माइटी-ड्रैगन’ का नाम दिया है, फिर दिखाई नहीं दिया. हालांकि, ईका-दुका शिनजियांग के होटन एयरबेस पर जरूर ट्रायल देते हुए दिखाई पड़ा. 

यही वजह है कि जब 2024 में जे-20, शिगात्से एयरबेस पर दिखाई पड़ा, तो जानकारों ने यही माना था कि हो सकता है चीन ने ट्रायल के लिए दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे एयरबेस पर चेंगदू की तैनाती की हो. क्योंकि शिगात्से में अभी भी चीन के पुराने जे-10 फाइटर जेट तैनात रहते हैं. नई सैटेलाइट तस्वीरों में जे-20 के साथ जे-10 भी दिखाई दिए थे. जे-10 रूस के मिग-21 का चीनी वर्जन है और 60 के दशक से ओपरेट किए जा रहे हैं. 

सिक्किम बॉर्डर पर IAF की राफेल की एक पूरी स्क्वाड्रन तैनात

शिगात्से की दूरी सिक्किम बॉर्डर से महज 150 किलोमीटर है. इतनी ही दूरी सिक्किम बॉर्डर से हाशिमारा (हासीमारा) एयरबेस की है. हासीमारा में भारतीय वायुसेना के रफाल (राफेल) फाइटर जेट्स की एक पूरी स्क्वाड्रन (18 फाइटर जेट) तैनात है. 

शिगात्से (12,408 फीट) की गिनती दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस के तौर पर की जाती है. पहले नंबर पर पूर्वी लद्दाख का नियोमा एयरबेस है, जिसके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. ओपन सोर्स इंटेलिजेंस की सैटेलाइट तस्वीरों में शिगात्से एयरबेस के रनवे पर भी एक फाइटर जेट खुले हुए पैराशूट के साथ लैंड करते हुए दिखाई पड़ रहा है. ये सैटेलाइट तस्वीरें 27 मई की बताई जा रही हैं. 

भारत में पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ विमान के विकास पर काम जारी

जानकारी के मुताबिक, 2018 में जिस जे-20 फाइटर जेट को भारतीय सुखोई ने डिटेक्ट किया था, जिसमें चीन ने अब आमूल-चूल अपग्रेड किए हैं. पहले तो ये कि इसमें रूसी इंजन के बजाए अब स्वदेशी इंजन लगाया गया है. चेंगदू ट्वीन इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट है, जिसे चीन फीफ्थ जेनरेशन होने का दावा करता है. 

हालांकि, चीन के बाहर एविएशन एक्सपर्ट्स को चीन के दावे पर अभी पूरा विश्वास नहीं है. भारत के पास भी फिलहाल कोई स्टेल्थ फाइटर जेट नहीं है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पांचवीं श्रेणी के स्टेल्थ फाइटर जेट ‘AMCA’ (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के डिजाइन और डेवलपमेंट पर काम कर रहा है. AMCA के बनने में अभी 8-10 साल लग सकते हैं, लेकिन भारत के पास ओमनी-रोल रफाल (राफेल) फाइटर जेट है, जिसके बारे में कहा जाता है कि ये दुश्मन के ‘चार-चार फाइटर जेट’ के बराबर एक अकेला है. 

राफेल के न्यूक्लियर मिसाइल की सफल टेस्टिंग ने दुनिया को चौंकाया

हाल ही में फ्रांस ने अपने रफाल फाइटर जेट से न्यूक्लियर मिसाइल का परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. साल 2016 में जब भारत ने फ्रांस से 36 रफाल फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया था, तो उस वक्त खुलकर कभी ये दावा नहीं किया गया था. गुपचुप तरीके से भारतीय की रक्षा-सुरक्षा तंत्र से जुड़े सीनियर अधिकारी इस बात की तरफ इशारा जरूर करते थे, लेकिन फ्रांस ने परमाणु परीक्षण कर रफाल की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है. 

साफ है कि भारत के 36 रफाल भी इस ताकत से लैस हैं. यही वजह है कि रफाल फाइटर जेट की डील बेहद महंगी साबित हुई थी. इसके अलावा, पूर्वी लद्दाख जैसे बेहद ऊंचाई और ठंडे इलाकों में तैनाती के लिए भी फ्रांस ने भारतीय रफाल को खास तकनीक से लैस किया है. यही वजह है कि भारत आने के तुरंत बाद ही रफाल फाइटर जेट को पूर्वी लद्दाख में तैनात कर दिया गया था. रफाल के ट्रायल की भी जरूरत भी नहीं पड़ी थी. जबकि जे-20 अभी बेहद ऊंचाई वाले एयरबेस पर ट्रायल स्टेज पर है. 

चीन की पीएल-15 मिसाइल पर भारी पड़ सकता है राफेल का मीटियोर

जे-20 में चीन ने स्वदेशी ‘पीएल-15’ एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस किया है. हालांकि, इस मिसाइल की रेंज रफाल में लगी ‘मिटियोर’ मिसाइल की तरह ही करीब 200 किलोमीटर है, लेकिन रैमजेट इंजन के चलते मिटियोर मिसाइल पीएल-15 के खिलाफ बाजी मार जाती है. पीएल-15 में सोलिड रॉकेट मोटर है. इससे पीएल-15 की रेंज तो बढ़ जाती है, लेकिन ‘रैमजेट’ इंजन के चलते मिटियोर मिसाइल का ‘नो-एस्केप जोन’ काफी बड़ा है. साफ है कि भले ही रफाल 4.5 जेनरेशन का है, लेकिन जे-20 पर भारी पड़ सकता है. 

पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने भी दावा किया था कि गलवान घाटी की झड़प के बाद चीन ने भारत के एक रफाल फाइटर जेट के मुकाबले LAC पर चार जे-20 तैनात किए थे. यानी एक रफाल, चार-चार जे-20 पर भारी पड़ सकता है. 

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