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छोले भटूरों के लिए बटला या छोला, किससे बेहतरीन बनती है डिश?


छोले भटूरे का नाम सुनते ही मसालेदार चने, गर्मागर्म फूले हुए भटूरे और चटपटे अचार की याद आने लगती है. नॉर्थ इंडियन खानपान में यह व्यंजन अपनी खास पहचान रखता है. सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के भोजन तक, छोले भटूरे लोगों की पसंदीदा डिश में शामिल हैं. इसका चटपटा स्वाद, मसालों की खुशबू और नरम छोले इसे खास बनाते हैं. यही वजह है कि छोटे ठेलों से लेकर बड़े रेस्तरां तक, इस व्यंजन को पसंद किया जाता है.

हालांकि घर पर छोले भटूरे बनाते समय अक्सर एक सवाल सामने आता है कि इस डिश के लिए काबुली चने यानी छोले बेहतर हैं या बटले? दोनों का इस्तेमाल अलग-अलग तरह के व्यंजनों में किया जाता है, लेकिन इनके स्वाद, आकार, बनावट और पकाने के तरीके में अंतर होता है. ऐसे में सही दाने का चुनाव न केवल डिश के स्वाद को टेस्टी बनाता है, बल्कि उसकी ग्रेवी और बनावट को भी खास बना देता है. आइए जानते हैं कि छोले भटूरे के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर है.

काबुली चना है भटूरे का साथी

रेस्तरां में मिलने वाले छोले भटूरे के लिए काबुली चना सबसे लोकप्रिय विकल्प है. इसका रंग हल्का क्रीम या सफेद होता है और आकार सामान्य देसी चने की तुलना में बड़ा दिखाई देता है. पकने के बाद इसकी बनावट नरम और मलाईदार हो जाती है और इसकी वनावट भी बनी रहती है. काबुली चने की खासियत यह है कि यह मसालों का स्वाद अच्छी तरह सोखता है. प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और भारतीय मसालों से तैयार ग्रेवी के साथ इसका मेल बेहतरीन रहता है.  अगर आप बाजार जैसे गाढ़े, मसालेदार और स्वाद से भरपूर छोले बनाना चाहते हैं, तो काबुली चना एक शानदार विकल्प है. इसे पकाने से पहले पर्याप्त समय तक भिगोना जरूरी है, ताकि दाने अच्छी तरह गलें और उनका स्वाद निखरकर सामने आए.

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बटला भी है विकल्प

बटला शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरह की फलियों के लिए किया जाता है. कुछ जगहों पर यह मटर या मटर जैसी फसल के लिए भी जाना जाता है. इससे भी स्वादिष्ट और गाढ़ी ग्रेवी वाली डिश तैयार की जा सकती है. सूखी मटर पकने पर नरम हो जाती है और उसका कुछ हिस्सा ग्रेवी में घुलकर उसे गाढ़ापन देता है. हालांकि  इसका स्वाद और बनावट काबुली चने से अलग होते हैं. सूखी मटर का इस्तेमाल आमतौर पर मटर की सब्जी, चाट में देखने को मिलता है.

स्वाद और बनावट, काबुली चना आगे

अगर मुकाबला पारंपरिक छोले भटूरे के आधार पर की जाए, तो काबुली चना बेहतर विकल्प है. इसके बड़े दाने, भरपूर बनावट और मसालों के साथ तालमेल के कारण डिश को वही स्वाद मिलता है, जिसकी उम्मीद लोग छोले भटूरे से करते हैं. वहीं सूखी मटर कम खर्च में गाढ़ी और नरम ग्रेवी तैयार करने के लिए उपयोगी हो सकती है. हालांकि इसका इस्तेमाल करने पर डिश का स्वाद बदल जाता है.

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