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जामिया में छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग पर भूख हड़ताल, 3 सांसदों पर FIR


दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है. पिछले 14 दिनों से छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं. छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उनकी मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने और उनके साथ गलत व्यवहार करने का आरोप लगाया है. छात्रों का कहना है कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा है. छात्रों ने मीडिया से बातचीत में अपनी बात सुने जाने की मांग की है.

उधर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, जामिया प्रशासन की शिकायत पर कांग्रेस के दो सांसदों और समाजवादी पार्टी के एक सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने इनके खिलाफ ट्रेसपासिंग यानी अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में मामला दर्ज किया है.

कैंपस के अंदर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला और छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की. कैंपस के अंदर प्रदर्शन और नारेबाजी रुक-रुककर जारी है. वहीं, कैंपस के बाहर भी कुछ-कुछ देर में छात्र इकट्ठा होकर प्रदर्शन के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं.

प्रशासन ने लाइब्रेरी और कैंटीन बंद कर दी- छात्र

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी हड़ताल के बीच कई कदम उठाए हैं. छात्रों के मुताबिक, प्रशासन ने लाइब्रेरी और कैंटीन बंद कर दी है, वॉशरूम भी बंद कर दिए गए हैं और विश्वविद्यालय में चल रही पढ़ाई को ऑनलाइन कर दिया गया है. छात्रों का कहना है कि उन्हें भूख हड़ताल खत्म करने की धमकी दी जा रही है और विश्वविद्यालय को बंद कर दिया गया है.

भूख हड़ताल पर बैठे एक छात्र ने कहा, ‘जैसा कि आपको पता है, पिछले 14 दिन से हम लोग भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. दिन-ब-दिन मेरी तबीयत खराब होती जा रही है. मुझे कमजोरी महसूस होने लगी है, लेकिन जामिया प्रशासन हमारी किसी भी मांग को लेकर गंभीर नहीं है.’

छात्र ने आगे कहा कि पिछले कई दिनों से वे हड़ताल पर बैठे हैं. उनके मुताबिक, कल जामिया प्रशासन ने लाइब्रेरी बंद कर दी, कैंटीन बंद कर दी और वॉशरूम भी बंद कर दिए. विश्वविद्यालय में चल रही पढ़ाई को ऑनलाइन शुरू कर दिया गया है.

छात्रों ने पुलिस की तैनाती और छात्रों को हिरासत में लिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि आज सुबह से जामिया के चारों तरफ बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है. विश्वविद्यालय के सभी गेटों पर पुलिस मौजूद है और वहां आने वाले छात्रों को जबरन हिरासत में लिया जा रहा है. छात्रों का दावा है कि बिना किसी कारण और जानकारी के उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है.

छात्रों ने कैंपस में एक व्यक्ति के प्रवेश को लेकर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि आज, 25 अक्टूबर को दिन में एक व्यक्ति अचानक कैंपस के अंदर आया. जब छात्रों ने उसके बैग की जांच की तो उसमें आईटीबीपी की वर्दी मिली. छात्रों ने सवाल किया कि जामिया प्रशासन ने उस व्यक्ति को कैंपस के अंदर आने की अनुमति कैसे दी.

छात्रों की मांगें नहीं मानीं- रिहान

छात्र रिहान ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि कल रजिस्ट्रार आए थे, लेकिन उन्होंने छात्रों की मांगें नहीं मानीं. रिहान के मुताबिक, छात्रों को चेतावनी दी गई कि अब कैंपस में जो भी होगा, उसकी जिम्मेदारी छात्रों की होगी, प्रशासन की नहीं.

रिहान ने कहा कि इसके अलावा ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं और एक तरह से आपातकाल जैसी स्थिति बना दी गई है. उन्होंने दावा किया कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ. उनके मुताबिक, सभी विभागों में पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई और कुछ देर बाद बिजली भी बंद कर दी गई. उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह रवैया बिल्कुल सही नहीं है और इससे पता चलता है कि प्रशासन किस तरह की बर्बरता पर उतर आया है. रिहान ने आरोप लगाया कि प्रशासन अब छात्रों को अपने बच्चे नहीं, बल्कि गुंडे समझने लगा है.

रिहान ने प्रशासन की प्रेस वार्ता का जिक्र करते हुए कहा कि वहां यह भी कहा गया था कि अगर ये उनके बच्चे होते तो ऐसा नहीं करते. इस पर रिहान ने कहा, ‘बच्चे हम आपके ही हैं, लेकिन यह आपका रवैया अशोभनीय है. हमारे साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया है, उसी वजह से हमें यह कदम उठाना पड़ा है. मैं आप सबके माध्यम से यह बताना चाहता हूं.’

उन्होंने आगे कहा कि कैंपस में जो गतिविधियां चल रही हैं, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. रिहान ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के साथ गुंडों जैसा व्यवहार कर रहा है.

रिहान ने कैंपस के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कथित तौर पर जिहादी कहे जाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, ‘मैं तो अंदर भूख हड़ताल पर बैठा हूं, लेकिन हमारे कुछ साथी जो बाहर गेट पर खड़े हैं, उनको जिहादी बोला जा रहा है. यह अच्छी बात नहीं है. अगर आप ऐसी स्थिति भड़काना चाहते हैं और दंगा कराना चाहते हैं, तो यह गलत तरीका है, जिसे आपको नहीं अपनाना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि देश लोकतंत्र है और छात्र अपने अधिकारों के तहत मांग कर रहे हैं. रिहान के मुताबिक, अगर प्रशासन इस तरह की कार्रवाई करेगा तो इसका असर उन्हीं छात्रों पर पड़ेगा, जो अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

रिहान ने यह भी दावा किया कि जामिया कैंपस की तीन छात्राओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है. उनके मुताबिक, कुछ अन्य छात्रों को भी हिरासत में लिया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली पुलिस को कैंपस के अंदर आने का अधिकार किसने दिया और वह किसके आदेश पर परिसर में प्रवेश कर रही है. रिहान ने कहा कि आज सुबह पुलिसकर्मियों ने कैंपस का मुआयना भी किया.

जामिया प्रशासन छात्रों से क्यों डर रहा?

उन्होंने दोहराया कि छात्रों की लड़ाई छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर है. रिहान ने सवाल किया कि जामिया प्रशासन छात्रों से क्यों डर रहा है.

कैंपस की सुरक्षा को लेकर भी रिहान ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जामिया कैंपस को सुरक्षित बताया जाता है, लेकिन कल रात से उन्हें ऐसा महसूस नहीं हो रहा कि वे सुरक्षित हैं. रिहान के मुताबिक, करीब एक घंटे पहले एक व्यक्ति कैंपस के अंदर आया और जब उसके बैग की जांच की गई तो उसमें वर्दी मिली. उन्होंने आरोप लगाया कि कैंपस में लोगों को एक-एक करके अंदर आने दिया जा रहा है.

फिलहाल, छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर छात्रों की भूख हड़ताल और प्रदर्शन जारी है. छात्र प्रशासन से अपनी मांगें सुनने और उनके साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर जवाब देने की मांग कर रहे हैं.



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