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टैंकलेस गीजर की टेक्नोलॉजी में क्या है कमी? जानें बड़े नुकसान


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  • उच्च रखरखाव और मरम्मत खर्च, नियमित डीस्केलिंग जरूरी.

सर्दियों में सुबह नहाने से पहले गीजर चालू करना और पानी गर्म होने का इंतजार करना ज्यादातर घरों में आम है, लेकिन टैंकलेस गीजर की टेक्नोलॉजी अलग है. इसमें नल खोलते ही पानी गर्म होने लगता है. इससे टैंक में जमा पानी की गर्मी बेकार नहीं जाती और इसे लगाने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत भी नहीं पड़ती है. यही वजह है कि इसे एनर्जी बचाने के अच्छे ऑप्शन के तौर पर देखा जाता है, हालांकि हर नई टेक्नोलॉजी की तरह टैंकलेस गीजर के भी कुछ नुकसान हैं. ऐसे में इसे खरीदने से पहले इसके फायदे के साथ कुछ सीमाओं को समझना भी जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि टैंकलेस गीजर की टेक्नोलॉजी में क्या कमी है. 

टैंकलेस गीजर की टेक्नोलॉजी में क्या कमी है

1. इंस्टॉलेशन में ज्यादा खर्च –  सामान्य गीजर को बदलकर नया गीजर लगाना आसान होता है, लेकिन टैंकलेस गीजर की फिटिंग में ज्यादा काम करना पड़ सकता है. इसके लिए घर के वेंटिलेशन, गैस कनेक्शन या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में बदलाव की जरूरत हो सकती है. कई बार इसे लगाने के लिए विशेषज्ञ की मदद भी लेनी पड़ती है. इसकी इंस्टॉलेशन लागत घर की मौजूदा व्यवस्था और जरूरी फिटिंग पर निर्भर करती है. अगर पाइपलाइन, कनेक्शन या अन्य सुविधाओं में बदलाव करना पड़े, तो इसे लगवाने का कुल खर्च बढ़ सकता है. 

2.  एक साथ गर्म पानी की कमी – टैंकलेस गीजर में पानी तभी गर्म होता है, जब उसकी जरूरत होती है, लेकिन अगर कोई शॉवर ले रहा हो और उसी समय किचन में गर्म पानी का इस्तेमाल हो रहा हो, वॉशिंग मशीन चल रही हो या डिशवॉशर काम कर रहा हो, तो पानी का तापमान कम हो सकता है. इसकी वजह यह है कि गीजर एक बार में सीमित मात्रा में ही पानी गर्म कर पाता है.

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3. ठंड में घट सकती है परफॉर्मेंस – सर्दियों में जमीन से आने वाला पानी ज्यादा ठंडा होता है, इसलिए उसे तय तापमान तक गर्म करने के लिए गीजर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. अगर गीजर का तापमान 125 डिग्री फारेनहाइट पर सेट है और आने वाले पानी का तापमान 40 डिग्री है, तो उसे 70 डिग्री वाले पानी की तुलना में ज्यादा गर्म करना होगा. इससे पानी का फ्लो कम हो सकता है. इसके अलावा टैंकलेस गीजर को काम करने के लिए बिजली की जरूरत होती है. बिजली जाने पर यह काम नहीं कर पाएगा, जबकि टैंक वाले गीजर में पहले से गर्म किया गया पानी कुछ समय तक उपलब्ध रह सकता है. 

4. मेंटेनेंस और मरम्मत का खर्च –  टैंकलेस गीजर में हीट एक्सचेंजर, सेंसर, थर्मोस्टेट और कई इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स लगे होते हैं. इनमें से किसी भी हिस्से में खराबी आने पर मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है. इसके अलावा जिन जगहों पर पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल ज्यादा होते हैं, वहां ये गीजर के अंदर जमा हो सकते हैं. इससे बचने के लिए साल में कम से कम एक बार गीजर की डीस्केलिंग यानी अंदर जमे मिनरल्स की सफाई कराना जरूरी माना जाता है. 

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