उत्तर प्रदेश में राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अभी थमा नहीं है. हर रोज नए खुलासे, दावे और वादे हो रहे हैं. इस बीच दुनिया के अजूबों में शुमार ताजमहल को लेकर भी मामला अदालत में आ चुका है. मामला भले ही अदालत में हो लेकिन यूपी और अन्य राज्यों का इतिहास देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले समय में इस पर सियासत होगी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरात्तव विभाग को नोटिस जारी कर ताजमहल के तेजोमहालय होने वाले दावे पर जवाब मांगा है. जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर मामला गर्माते हुए दिखाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर सत्ता और विरोधी पक्ष आमने सामने दिखाई दे सकते हैं. सियासी जानकारों का मानना है कि इससे खुद को हिन्दूवादी पार्टी बताने वाली भारतीय जनता पार्टी को फायदा हो सकता है.
आगरा के ताजमहल को लेकर बीते काफी समय से विवाद चला आ रहा है. मुस्लिम जहां इस मकबरा मानते हैं तो वहीं कुछ हिन्दू संगठन इसे भगवान शिव का मंदिर तेजो महालय होने का दावा करते हैं. जिसके बाद से ये मुद्दा कोर्ट में चल रहा हैं. लेकिन, अब इसे लेकर राजनीति भी तेज होती जा रही है. माना जा रहा है कि चुनाव से पहले ये एक बड़ा सियासी मुद्दा हो सकता है.
ताजमहल या तेजोमहालय का मुद्दा गर्माया
इस मामले पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पॉलिटिकल हेड डॉ. आरिफ का कहना है कि देश की सभी प्राचीन विरासत का अपना-अपना महत्व है और वह भारत की विराट व अद्भुत परंपरा को ही दर्शाते हैं. इनमें से एक ताजमहल भी है. वह भी सरकारी संस्थान की देखरेख में सकुशल संरक्षित हैं. वैसे वर्तमान समय भारत के साथ-साथ दुनिया के लिए भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिकता, तकनीक की संभावनाओं पर ज्यादा आधारित है. यह बातें हमारे छात्रों युवाओं और मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को भी प्रभावित करती है. इसलिए, अब किसी भी विरासत अथवा स्थल का नाम कुछ और होने से ज्यादा प्रभावशाली आम जन को अपने मूल भूत विषय प्रभावित करने वाले साबित हो सकते हैं.
यूपी चुनाव से पहले तेज हुई सियासत
दूसरी तरफ लेखक और पत्रकार डॉ. भानुप्रताप सिंह का मानना है कि ‘ताजमहल में बहुत सारे ऐसे चिन्ह हैं जो ये प्रदर्शित करते हैं कि इसमें कहीं न कहीं हिन्दू वास्तुकला का प्रभाव रहा है. इसमें डमरू है. मछली हैं, राम का नाम भी लिखा हुआ हैं. इन सब बातों को देखते हुए और जो बहुत सारी किवदंतियां हैं कथाएं हैं इस कारण से उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि ये ताजमहल है या तेजोमहालय.’
उन्होंने कहा कि जाहिर है चुनाव में इसका फायदा हिन्दू वादी पार्टी के रुप में प्रसिद्ध भारतीय जनता पार्टी को मिलने वाले हैं. दूसरा पक्ष भी इसका फायदा लेने का प्रयास करेगा. ताजमहल की बात आती है तो ये मामला हिन्दू-मुसलमान का हो जाता है ऐसे में ये एक बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकता है. बता दें कि ये मामला अभी कोर्ट में चल रहा है लेकिन इस पर राजनीति होना तय है. इससे पहले बाबरी विध्वंस मामले पर भी इसी तरह की राजनीति देखने को मिल चुकी है.
