मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं. यहां भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई है. बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने मात दी है. बीजेपी की इस हार को लेकर चहुंओर चर्चा है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा की वजह से पार्टी चुनाव हार गई. हालांकि यह दावा सतही है. अगर नरोत्तम मिश्रा चुनाव में हार की वजह होते तो वह प्रचार के दौरान हर मौके पर आशुतोष तिवारी और बीजेपी नेतृत्व के साथ नजर नहीं आते.
आइए हम आपको बताते हैं कि दतिया में आशुतोष तिवारी की हार की वजह नरोत्तम मिश्रा कैसे नहीं हैं
नरोत्तम मिश्रा खुद अपना चुनाव डेक्लाइनिंग मार्जिन से जीत रहे थे
साल 2008 में परिसीमन के बाद दतिया सीट अस्तित्व में आई. इसके बाद से साल 2018 तक के इलेक्शन में नरोत्तम ने चुनाव जीता. हालांकि साल 2023 के चुनाव में वह हार गए. दतिया से तीन बार विधायक बनने के बाद भी नरोत्तम जब भी जीते उनकी जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं था.
साल 2008 में नरोत्तम मिश्रा ने चुनाव लड़ा और उन्होंने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजेंद्र भारती को 11 हजार 233 मतों से हराया. साल 2013 के चुनाव में मिश्रा ने कांग्रेस के उम्मीदवार राजेंद्र भारती को चुनाव हराया. मिश्रा यह चुनाव 11 हजार 697 मतों से जीते. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में दतिया से नरोत्तम फिर जीते. इस चुनाव में भारती और मिश्रा के बीच का अंतर 2 हजार 656 वोट था. साल 2023 के चुनाव में राजेंद्र भारती ने नरोत्तम को हरा दिया. वह 7,742 मतों से हार गए.
अगर नरोत्तम इफेक्ट को सच माना जाए तो साल 2023 के चुनाव में वह खुद न हारते.
राजेंद्र भारती ने खुलकर बगावत की
इस चुनाव में राजेंद्र भारती ने खुलकर बगावत की. कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान के बाद यह दावा किया. उनका दावा था कि भारती, बीजेपी के संपर्क में आए और कांग्रेस का नुकसान किया. ऐसे में भारती समर्थकों के कुछ वोट निश्चित तौर पर बीजेपी को गए होंगे. परिणाम से पहले ही कांग्रेस ने भारती को 2 अगस्त की रात पार्टी से निलंबित कर दिया था.
नरोत्तम मिश्रा से बड़ा चेहरा भारती
नरोत्तम मिश्रा, बेशक बतौर कैबिनेट मंत्री और सियासत का ब्राह्मण चेहरा थे लेकिन दतिया में राजेंद्र भारती के सियासी सफर के आगे उनका कद काफी छोटा रहा. डबरा के बाद दतिया से चुनाव लड़ रहे नरोत्तम ने भले ही भारती को कई बार हराया लेकिन पूर्व कांग्रेस नेता का परिवार लंबे वक्त से सियासत में था. बसपा, सपा, कांग्रेस, समेत सभी दलों में वह घूम कर आ चुके हैं.
नरोत्तम खुद इलेक्शन में लगे रहे
टिकट कटने के बाद समर्थकों की नाराजगी को नियंत्रित और संयमित करते हुए नरोत्तम खुद चुनाव प्रचार में लगे रहे. उन्होंने मंच से यहां तक कहा कि टिकट आशुतोष ने नहीं कटवाया. समर्थकों की नाराजगी को कुछ देर का गुस्सा बताते हुए नरोत्तम ने कहा था कि मैं और सभी पार्टी के साथ हैं.
घनश्याम सिंह खुद 2 बार के विधायक
घनश्याम सिंह खुद दो बार के विधायक थे. इसके अलावा कांग्रेस ने सामान्य निर्वाचन में भी 2023 के चुनाव में इस सीट पर जीत हासिल की थी. इस चुनाव में भी बीजेपी ने भले ही प्रचार के दौरान पूरी सरकार उतार दी हो लेकिन वह आशुतोष के पक्ष में इसे भुनाने में असफल रहे.
