दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मैच ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है. यह मुकाबला 6 सितंबर से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में शुरू हुआ था. तिलक वर्मा की कप्तानी वाली साउथ जोन टीम पहली पारी में संघर्ष कर रही है. उस पर हार का संकट गहराता जा रहा है और वह 700 रन भी बना लेती है, तो भी वह हार सकती है. इसके पीछे बेहद दिलचस्प नियम छिपा है.
फाइनल मैच में ईस्ट जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 708 रन बनाए थे. कप्तान ईशान किशन ने 270 रन बनाए और कुमार कुशाग्र ने भी शतक लगाया था. साउथ जोन के सामने पहली मुसीबत फॉलो-ओं बचाने की है, जिसके लिए उसे कम से कम 508 रनों का आंकड़ा छूना होगा. अगर साउथ जोन ऐसा करने में सफल रहती है, तो भी उसपर हार का खतरा मंडराता रहेगा.
700 रन बनाकर भी हार जाएगी
दलीप ट्रॉफी का फाइनल अपने चौथे दिन में है और संभवतः यह मुकाबला ड्रॉ की तरफ बढ़ रहा है. चूंकि अब परिणाम आने की संभावना कम होती जाएगी, इसलिए विजेता का फैसला पहली पारी में बढ़त के आधार पर होगा. ईस्ट जोन बहुत अच्छी स्थिति में है, क्योंकि उसने पहली पारी में 708 रनों का विशालकाय स्कोर बना डाला था.
चूंकि फाइनल मैच ड्रॉ रहने की कगार पर है. इसलिए साउथ जोन अपनी पहली पारी में 700 रन भी बना लेती है, तो भी वह फाइनल हार जाएगी. सिर्फ यही नहीं साउथ जोन की टीम 707 रन के आंकड़े तक पहुंच जाती है, तो भी वह हारी हुई कहलाएगी, क्योंकि पहली पारी में 1 रन की बढ़त के आधार पर ईस्ट जोन चैंपियन बन जाएगा.
तीसरे दिन स्टंप्स तक साउथ जोन की टीम 242 रन के स्कोर तक 6 विकेट खो चुकी थी. कप्तान तिलक वर्मा ने एक छोर संभाले रखा और अपना अर्धशतक पूरा किया.
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ईशान किशन ने रचा था इतिहास
पहली पारी में 270 रन की पारी खेल ईशान किशन ने इतिहास रच दिया था. यह दलीप ट्रॉफी के इतिहास में ईस्ट जोन के लिए दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है. इस टीम के लिए दलीप ट्रॉफी में सबसे बड़ा स्कोर अरुण लाल के नाम है, जिन्होंने 1986 में वेस्ट जोन के खिलाफ 287 रन की पारी खेली थी.
अगर ईस्ट जोन 2026 का फाइनल मुकाबला जीत लेती है, तो यह तीसरी बार होगा जब यह टीम दलीप ट्रॉफी का खिताब जीतेगी. इससे पहले उसने 2011-12 और 2012-13 सीजन में लगातार दो बार ट्रॉफी जीती थी.
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