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दिल्ली: CM रेखा गुप्ता ने कूड़े के पहाड़ के साथ क्यों ली सेल्फी? बोलीं- ‘ये आखिरी…’


दिल्ली में पुराने कूड़े के पहाड़ों को हटाने के साथ नए कचड़े का ढेर न खड़ा हो इसलिए उसके रोजाना निस्तारण पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है. सरकार ने साफ कर दिया है कि पुराने लैंडफिल को खाली करने के साथ रोज निकलने वाले नए कचरे को भी उसी रफ्तार से प्रोसेस करना होगा.

इसी कड़ी में ओखला, सिंघोला और गाजीपुर में नए कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों के साथ गाजीपुर में बायोगैस प्लांट लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को ओखला लैंडफिल साइट से इन चार परियोजनाओं का वर्चुअल शिलान्यास किया. इनके पूरा होने पर प्रतिदिन 3200 टन अतिरिक्त कचड़ा प्रसंस्कृत किया जा सकेगा.

सीएम ने कचरे के साथ ली ‘आखिरी सैल्फी’

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ओखला लैंडफिल का निरीक्षण भी किया. उन्होंने अधिकारियों से पुराने कचड़े के निस्तारण की गति, खाली हो चुकी जमीन और रोज वहां पहुंच रहे ताजे कचरे की स्थिति की जानकारी ली. कूड़े के पहाड़ के सामने तस्वीर खिंचवाते हुए उन्होंने इसे अपनी ‘आखिरी सेल्फी’ बताया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2026 तक दिल्ली को पुराने कूड़े के पहाड़ों से मुक्त करने का है. लेकिन असली चुनौती उसके बाद भी जारी रहेगी, क्योंकि अगर नया कचरा उसी तरह जमा होता रहा तो पुराने पहाड़ हटाने का फायदा टिकाऊ नहीं होगा.

ओखला में सबसे बड़ी यूनिट

नई परियोजनाओं में सबसे बड़ी क्षमता वाला संयंत्र ओखला में प्रस्तावित है. यहां रोजाना 1400 टन कचरे को प्रोसेस करने की क्षमता विकसित की जाएगी. सिंघोला में 700 टन और गाजीपुर में 800 टन प्रतिदिन क्षमता के संयंत्र लगाए जाएंगे. इसके अलावा गाजीपुर में जैविक और बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए 300 टन प्रतिदिन क्षमता वाला बायोगैस प्लांट भी स्थापित किया जाएगा.

चारों परियोजनाओं की संयुक्त क्षमता 3200 टन प्रतिदिन होगी। गाजीपुर की बायोगैस परियोजना को यमुना की सफाई से भी जोड़ा जा रहा है. योजना है कि जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर उसे उपयोगी संसाधन में बदला जाए. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन नई प्रोसेसिंग यूनिटों को जल्द तैयार करने और पूरी क्षमता के साथ संचालन में लाने के निर्देश दिए.

डेढ़ साल में 217.17 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा हटाने का दावा

निगम के अनुसार, ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइटों पर पिछले करीब डेढ़ साल में 217.17 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण किया गया है. इससे लगभग 100 एकड़ जमीन कचरे के कब्जे से मुक्त होने का दावा किया गया है. अब खाली हो रही जमीन को दूसरे कामों में इस्तेमाल करने की तैयारी है.

ओखला में कार्यक्रम स्थल के आसपास करीब तीन एकड़ जमीन पर पार्क विकसित करने की योजना बताई गई है. महापौर प्रवेश वाही के मुताबिक, जिस जगह पर अब जमीन दिखाई दे रही है, वहां करीब दो महीने पहले तक कचड़े का ढेर था. इससे पहले मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान कचड़ा हटाने की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे.

असली चुनौती नया कचरा रोकना

पुराने कूड़े को हटाना अभियान का एक हिस्सा है. दूसरी और लगातार रहने वाली चुनौती दिल्ली से हर दिन निकलने वाला नया कचड़ा है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि केवल लैंडफिल में वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट हटाना पर्याप्त नहीं होगा. रोज आने वाले फ्रेश वेस्ट के लिए भी पर्याप्त प्रोसेसिंग व्यवस्था जरूरी है.

यही वजह है कि नई क्षमता पर जोर दिया जा रहा है. मकसद यह है कि लैंडफिल से पुराना कचरा निकलता रहे और दूसरी तरफ नया कचरा वहां जमा होकर एक और पहाड़ न बना दे.



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