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देहरादून: जनगणना ड्यूटी से गायब 35 शिक्षक, अब होगी FIR, जुर्माने के साथ 3 साल हो सकती है जेल


देहरादून में जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच एक अजीब मामला सामने आया है. ड्यूटी पर लगाए गए 35 शिक्षक न तो ट्रेनिंग में पहुंचे, न ही उन इलाकों में गए जहां उन्हें मकानों की गणना करनी थी. कुछ ने तो ड्यूटी से बचने के लिए जानबूझकर गलत मोबाइल नंबर दर्ज करा दिए और कुछ फोन ही बंद करके बैठ गए. अब नगर निगम ने इन सभी के खिलाफ शहर कोतवाली में तहरीर दे दी है और मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है.

जो तस्वीर सामने आई है वह काफी चौंकाने वाली है. कई शिक्षकों ने रजिस्ट्रेशन के वक्त ही ऐसे नंबर दर्ज कराए जो असल में उनके थे ही नहीं. जिन्होंने सही नंबर दिए, उनमें से कई फोन उठाना बंद कर बैठे. नतीजा यह हुआ कि ट्रेनिंग सेशन के दौरान बार-बार कोशिश के बावजूद इन्हें संपर्क ही नहीं किया जा सका. जिम्मेदारी से इस तरह मुंह मोड़ना विभाग को भारी पड़ने वाला है क्योंकि इनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को पकड़कर ड्यूटी लगानी पड़ रही है.

ड्यूटी में लापरवाही पर जुर्माने के साथ हो सकती है जेल

नगर निगम के चार्ज अधिकारी रमेश सिंह रावत ने इसे गंभीरता से लेते हुए जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पुलिस को तहरीर सौंप दी है. इस कानून के तहत ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर जुर्माने के साथ तीन साल तक की जेल का प्रावधान है.

सिर्फ देहरादून में क्यों है यह समस्या?

जनगणना कार्य निदेशालय उत्तराखंड की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने साफ किया कि यह समस्या पूरे प्रदेश में नहीं बल्कि सिर्फ देहरादून नगर निगम क्षेत्र में आ रही है. बाकी जिलों में फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है. उन्होंने यह भी कहा कि 35 कर्मचारियों के गायब होने की आधिकारिक जानकारी उनके पास नहीं पहुंची है क्योंकि यह जिम्मेदारी प्रिंसिपल चार्ज ऑफिसर की है. हालांकि उन्होंने ट्रेनिंग में अनुपस्थिति की दिक्कत स्वीकार की.

ऐप में खराबी नहीं, चीनी ऐप्स बन सकते हैं रोड़ा!

कुछ शिक्षकों ने जनगणना पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन निदेशक ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, ”ऐप में कोई बड़ी खराबी नहीं है. हां, अगर फोन में कोई चाइनीज ऐप इंस्टॉल है तो वह जनगणना ऐप के काम में रुकावट जरूर डाल सकता है. ऐसे में कर्मचारियों को संदिग्ध ऐप्स हटाने के निर्देश दिए गए हैं.”

हर वक्त इंटरनेट की जरूरत नहीं

फील्ड में काम के लिए हर वक्त इंटरनेट की जरूरत नहीं है. एक बार ऐप डाउनलोड होने के बाद बिना नेटवर्क वाले इलाकों में भी डेटा फीड किया जा सकता है. यह डेटा दो से तीन दिन तक ऑफलाइन सेव रहेगा और नेटवर्क मिलते ही अपने आप सिंक हो जाएगा.

25,000 रुपए का दिया जाएगा मानदेय

इस बार सरकार ने जनगणनाकर्मियों को अलग से कोई डिवाइस नहीं दिया है. कर्मचारियों को अपने स्मार्टफोन से ही काम करना होगा. सरकार का तर्क है कि इससे ई-वेस्ट और सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी. बदले में इंटरनेट और ड्यूटी खर्च मिलाकर कुल 25,000 रुपए का मानदेय दिया जाएगा .पहले चरण में 9,000 और दूसरे चरण में 16,000 रुपए.

ग्राउंड पर शुरू हो चुका है काम

निदेशक के मुताबिक फील्ड में जनगणना का काम चल रहा है. नजरी नक्शे बनाए जा रहे हैं और डोर-टू-डोर सर्वे भी शुरू हो गया है. ‘हर द्वार, दस्तक’ अभियान के तहत प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की सूची तैयार कर रहे हैं. बिजली, पानी, शौचालय समेत तकरीबन 33-34 सवालों के जरिए हर परिवार की पूरी जानकारी मोबाइल ऐप में दर्ज की जा रही है. इस हफ्ते से पोर्टल पर काम की रफ्तार का रिव्यू भी शुरू होगा ताकि पता चल सके कि कहां काम धीमा है. उत्तराखंड में पहला चरण 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक चलेगा.

पहाड़ी जिलों में पहले होगी गिनती

दूसरे फेज में असली जनसंख्या गणना होगी. चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे बर्फीले जिलों में यह काम सितंबर 2026 में ही निपटा लिया जाएगा क्योंकि सर्दियों में वहां पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाता है. बाकी जिलों में मुख्य जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी.

फिलहाल 35 शिक्षकों पर तहरीर दी जा चुकी है और मुकदमा दर्ज होना तय माना जा रहा है. अगर जांच में ये दोषी साबित हुए तो जुर्माने के साथ जेल भी हो सकती है. यह मामला बाकी उन कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो सरकारी ड्यूटी को हल्के में लेने की सोच रहे हैं.



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