गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी को कुंभ में गांजा वाले विवादित बयान के मामले में कोर्ट से राहत मिली है. इलाहाबाद हाई कोर्ट से अंसारी को अंतरिम राहत मिली है. कोर्ट ने अफजाल अंसारी को तीन हफ्ते में ट्रायल कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन दाखिल करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि अगर ऐसी कोई डिस्चार्ज एप्लीकेशन अफजाल अंसारी द्वारा फाइल की जाती है तो संबंधित कोर्ट आरोप तय करने से पहले उस पर विचार करेगा.
कोर्ट ने सांसद अफजाल अंसारी के वकील की ट्रायल कोर्ट में जमानत या अग्रिम जमानत के लिए अप्लाई करने वाली मांग को भी मंजूर कर लिया. कोर्ट ने आदेश दिया है कि आवेदक अफजाल अंसारी द्वारा संबंधित कोर्ट में जमानत या अग्रिम जमानत दाखिल करने के लिए 15 दिनों तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी याचिका
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर आवेदक संबंधित कोर्ट में याचिका दाखिल करता है तो संबंधित कोर्ट किसी भी पक्ष को बिना किसी अनावश्यक स्थगन दिए उस पर जल्दी से फैसला करेगा. सितंबर 2024 में गाजीपुर के कोतवाली थाने में दर्ज मुकदमे के बाद एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट गाजीपुर में चल रहे मुकदमे की सम्पूर्ण कार्यवाही रद्द करने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट का संज्ञान ले लिया है.
अफजाल अंसारी ने गांजे को लेकर क्या दिया था बयान?
महाकुंभ 2025 से पहले सितंबर 2024 में सपा सांसद अफजाल अंसारी ने गांजे को लेकर विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि गांजा को कानून का दर्जा देकर वैध कर दो लेकिन कानून का इतना बड़ा मखौल क्यों उड़ाते हो. लोग लाखों करोड़ों का खुलेआम गांजा पीते हैं. पूरी महफ़िल लगाकर गांजा पीते हैं. बड़े-बड़े धार्मिक आयोजनों में लोग गांजा पीते हैं. उन्होंने कहा था कि कुंभ मेले के दौरान एक मालगाड़ी गांजा भी अपर्याप्त होगी.
इस मामले में गाजीपुर के कोतवाली थाने में एसआई राज कुमार शुक्ला ने बीएनएस की धारा 353(3) में एफआईआर दर्ज कराई थी. विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने गाजीपुर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है. जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने आदेश दिया.
