उत्तर प्रदेश के आगरा में कथित चंगाई सभाओं के जरिए लोगों को जोड़कर धर्म परिवर्तन कराने के मामले में पुलिस की जांच अब पांच राज्यों तक जुड़े संपर्कों की पड़ताल कर रही है. डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार के अनुसार, एक जन्मदिन की पार्टी में लोगों को एकत्रित कर उन्हें लुभाकर धर्म परिवर्तन कराने की सूचना मिली थी.
मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें दो राजस्थान और दो आगरा के रहने वाले हैं. पूछताछ में सामने आया कि अलग-अलग राज्यों में चंगई सभाएं आयोजित कर लोगों को बीमारी और परेशानियां दूर करने के नाम पर बुलाया जाता था.
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सभाओं के जरिए बढ़ाया जाता था संपर्क
पुलिस के अनुसार, इन सभाओं के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाया जाता और उन्हें समूह में जोड़ा जाता था.जांच में करीब 30 से 40 लोगों को जोड़ने के बाद आगे नेटवर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब से जुड़े लोगों के संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है. पूछताछ के दौरान कथित ईस्ट-वेस्ट ग्रुप का भी जिक्र सामने आया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में कौन किसके संपर्क में था और अलग-अलग राज्यों में लोगों को जोड़ने की प्रक्रिया कैसे चल रही थी.
हर महीने की बनती थी रिपोर्ट
जांच के दौरान मिले दस्तावेजों में मासिक रिपोर्ट के जरिए चंगई सभाओं की संख्या और उनसे जुड़े लोगों का विवरण दर्ज किए जाने का दावा है. जुलाई की एक रिपोर्ट में राजस्थान में एक व्यक्ति द्वारा सात चंगई सभाएं आयोजित किए जाने का उल्लेख बताया गया है. सभाओं की संख्या के आधार पर भुगतान किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है. धौलपुर और झुंझुनू समेत अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण और फंड से जुड़ी रकम दर्ज होने का दावा है. एक प्रविष्टि में 67,250 रुपये की राशि का भी उल्लेख बताया गया है. हालांकि, रकम के स्रोत और भुगतान के उद्देश्य की जांच अभी जारी है.
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में जूम, सिग्नल और आईएमओ जैसे ऑनलाइन माध्यमों से प्रशिक्षण दिए जाने की बात भी सामने आई है. आरोप है कि प्रशिक्षण के जरिए लोगों से संवाद करने और उन्हें प्रभावित करने के तरीकों की जानकारी दी जाती थी. पुलिस अब चारों आरोपियों की भूमिका के साथ कथित नेटवर्क के संपर्कों, फंडिंग, प्रशिक्षण और अलग-अलग राज्यों में जुड़े लोगों की जानकारी खंगाल रही है. डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि मामले के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज के लिए पुलिस की टीमें काम कर रही हैं और दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों व बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
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