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धार भोजशाला केस: सुप्रीम कोर्ट में बोला मुस्लिम पक्ष- 800 साल पुरानी मस्जिद में नमाज रुकवा दी’,  CJI तुरंत बोले- ‘संयम रखें…’


सुप्रीम कोर्ट में धार भोजशाला मामले में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि मस्जिद में 800 सालों से नमाज हो रही थी, जिसे बंद करा दिया गया. हमें धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर दिया गया. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सभी पक्षों से संयमित रहने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट में कही गई बातों का बाहर लोग गलत अर्थ लगा सकते हैं. यह केस पहली बार लगा है. इसे जल्द से जल्द सुनने की कोशिश की जाएगी.

मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा,  ‘पहले जो स्थिति थी उसे हाई कोर्ट ने बदल दिया. हमें धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट आने का मौका तक नहीं दिया गया.’

आंख के बदले आंख दुनिया को अंधा कर देगी- सिंघवी

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘एक आंख के बदले आंख दुनिया को अंधा कर देगी. हो सकता है वहां मंदिर था. कुतुब मीनार के बारे में भी दावा है. ताज महल के बारे में भी दावा है. 700 साल तक धार भोजशाला में नमाज होती रही. अंग्रेजों के जमाने के दस्तावेज भी यह दिखाते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘नमाज के साथ बसंत पंचमी और मंगलवार को पूजा होना धार्मिक सौहार्द का अच्छा उदाहरण था. इसे नहीं बदलना चाहिए था.’ उन्होंने बेंच से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक पुरानी स्थिति बहाल की जाए.

वहीं सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘2 महीने हो गए फैसले को. तब से स्थिति बहुत बदल चुकी है.’ मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने सॉलिसिटर जनरल की इस दलील का विरोध किया.

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800 साल पुरानी मस्जिद में नमाज रुकवाना सख्त कदम- मुस्लिम पक्ष

मुस्लिम पक्ष की एक और वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा, ‘1995 में दोनों पक्षों में सहमति बनी कि दोनों सौहार्दपूर्ण तरीके से धार्मिक गतिविधि करेंगे. इस स्थिति को अचानक बदलना गलत था. 800 साल पुरानी मस्जिद है. वहां नमाज रुकवा देना बेहद सख्त कदम है.’

इसके बाद CJI ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि पहले इस केस में सलमान खुर्शीद जिरह करते रहे हैं. उन्होंने विशेष ध्यान रखा था कि समाज में कोई गलत संदेश न जाए.

सॉलिसिटर जनरल ने क्या दी दलील?

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘बस मैं यही कहना चाहता हूं कि अब 2 महीने बीत चुके हैं. हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने उसके आधार पर कुछ कदम उठाए हैं. वहां शांति बनी हुई है.’

वहीं हुजैफा अहमदी कोर्ट को आश्वस्त करने की कोशिश की कि पुरानी स्थिति बहाल की जा सकती है. इसके लिए उन्होंने 1935 और 1951 के कुछ पुराने आदेशों का हवाला भी दिया.  



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