पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई अब इस दुनिया में नहीं रहीं. उनका 70 साल की उम्र में निधन हो गया. तीजन बाई ने रायपुर एम्स आखिरी सांस ली. वो कुछ से बीमार चल रही थीं. तीजन बाई का निधन शनिवार तड़के 3 बजकर 15 मिनट पर हुआ. उनके निधन से भारतीय लोक कला जगत शोक की लहर दौड़ गई है.
तीजन बाई ने लोक कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई. उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. तीजन बाई ने महाभारत की कथाओं को मंच प्रस्तुत किया और भारतीय लोक कला जगत में विशेष पहचान पाई.
तीजन बाई को मिले ये अवॉर्ड-सम्मान
तीजन बाई को 1988 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया. 1995 में उन्हें संगीत नाटक अकेडमी अवॉर्ड से सम्मान किया गया. 2003 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मान किया गया. 2003 में उन्हें Hon. D.Litt., Bilaspur University अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. वहीं 2016 में एम एस सुब्बालक्ष्मी शताब्दी अवॉर्ड मिला. 2019 में उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया.
तरण साहू ने जताया शोक
तरुणा साहू ने कहा, ‘मेरे लिए बहुत कठिन समय है मेरी गुरू मां नहीं रहीं. ये छत्तीसगढ़ और देश के लिए अपूर्णीय क्षति है. आने वाली पीढ़ियां उनसे सीख लेंगी. निश्चित तौर पर उनका जाना हम सबके लिए दुख का विषय है. विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.’ बता दें कि तरुणा साहू तीजन बाई के सबसे करीबी शिष्या हैं. तीजन बाई के बाद छत्तीसगढ़ की पंडवानी गायिका में इनका स्थान प्रमुख है.

तीजन बाई का जन्म भिलाई के गांव गनियारी में हुआ. उनके पिता का नाम हुनुकलाल परधा और मां का नाम सुखवती थी. तीजन बाई की पर्सनल लाइफ की बात करें को 12 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी. उन्होंने अपनी जिंदगी में काफी स्ट्रगल किया, लेकिन तीजन बाई ने कभी भी हार नहीं मारी और लोक कला को देश ही नहीं विदेशों में भी पहचान दिलाई.
बता दें कि 13 साल की उम्र में उन्होंने पड़ोसी गांव में पहली बार पब्लिक परफॉर्मेंस दी थी. उस परफॉर्मेंस के लिए उन्हें 10 रुपये मिले थे. उन्होंने ‘पांडवानी’ की ‘कापालिक’ स्टाइल में गाना गाया, वो ऐसा करने वाली पहली महिला थीं.

पीएम मोदी ने पूछा था हाल-चाल
बता दें कि 1 नवंबर 2025 को पीएम मोदी ने तीजन बाई का हाल चाल लिया था. पीएम ने तीजन बाई की बहू वेणू देशमुख से फोन पर तीजन बाई की तबियत के बारे में जानकारी ली थी. इसी के साथ उन्होंने तीजन बाई के इलाज में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया.
