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Explained: IIT बॉम्बे में साहिल की खुदकुशी, प्रोफेसर का गुनाह क्या? तीसरे सुसाइड से बना पैटर्न


IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को 20 सितंबर 2026 की शाम सस्पेंड कर दिया गया. यह सस्पेंशन लगातार तीन दिन के छात्र प्रोटेस्ट के बाद हुआ. छात्रों ने 18-पॉइंट चार्टर सौंपा था, जिसमें दूल्ला के खिलाफ तुरंत एक्शन की मांग थी. IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे ने खुद प्रोटेस्टिंग छात्रों से मिलकर यह चार्टर साइन किया है. इस केस की जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है. लेकिन टीचर का गुनाह क्या है और असली विवाद किस बात पर है?

सबसे पहले यह समझिए कि 18 सितंबर को हुआ क्या था?

18 सितंबर 2026 को IIT बॉम्बे में एनर्जी साइंस डिपार्टमेंट का मिड-सेमेस्टर एग्जाम चल रहा था. प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला उस एग्जाम के इन्विजिलेटर थे. एग्जाम के दौरान उन्होंने देखा कि सेकेंड ईयर के स्टूडेंट साहिल वाकोडे के पास मोबाइल फोन है. IIT बॉम्बे का कहना है कि साहिल ने पेपर को ChatGPT पर अपलोड करके आंसर निकालने की कोशिश की थी. दूल्ला ने इसे ‘अकादमिक मैल्प्रैक्टिस’ बताकर इंस्टीट्यूट की प्रोसीजर के मुताबिक ऊपर अधिकारियों को रिपोर्ट कर दिया.

एग्जाम के बाद इंस्टीट्यूट का कहना है कि साहिल को बुलाकर समझाया गया और यह भरोसा दिलाया गया कि इस घटना का उसके करियर पर बुरा असर नहीं पड़ेगा. इंस्टीट्यूट ने यह भी कहा कि छात्र के खिलाफ कोई डिसिप्लिनरी एक्शन शुरू नहीं किया गया था. हालांकि, उसी शाम साहिल अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया.

तो इसमें टीचर का गुनाह क्या है?

यहां दो अलग-अलग बातें हैं और इन्हें अलग-अलग समझना जरूरी है…

  • बात-1: IIT के नियमों के हिसाब से देखिए. एग्जाम में बिना इजाजत मोबाइल इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन है. दूल्ला ने उसे इंस्टीट्यूट की सीनेट-अप्रूव्ड पॉलिसी के मुताबिक रिपोर्ट किया. IIT बॉम्बे का फैकल्टी फोरम खुलकर दूल्ला के साथ खड़ा है. फोरम का कहना है कि दूल्ला ने सिर्फ अपना फर्ज निभाया और इंस्टीट्यूट की प्रोसीजर फॉलो की. फोरम ने यह भी कहा कि दूल्ला की छवि खराब करना बहुत दुखद है, जबकि उन्होंने सिर्फ अपनी अकादमिक ड्यूटी निभाई.
  • बात-2: साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे का आरोप. उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि प्रोफेसर दूल्ला ने साहिल को तीन महीने तक जातिसूचक गालियां दीं और धमकाया कि उसे झूठे केस में फंसा दिया जाएगा. इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने दूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कर दी.

तो सीधी बात यह है कि अगर सिर्फ एग्जाम की घटना देखें, तो दूल्ला ने नियम के मुताबिक काम किया. अगर पिता के आरोप सही हैं तो यह सिर्फ कर्तव्य नहीं, अपराध है.

इंस्टीट्यूट का बचाव क्या है?

IIT बॉम्बे का कहना है कि किसी भी छात्र की जाति की जानकारी फैकल्टी या एडमिनिस्ट्रेशन के पास नहीं होती. डायरेक्टर शिरीष केदारे ने साफ कहा कि कैंपस में जातिगत भेदभाव नहीं है. इस केस में तो बिल्कुल भी नहीं. इंस्टीट्यूट की SC/ST सेल ने भी कहा है कि साहिल की तरफ से जातिगत भेदभाव की कोई शिकायत उनके पास कभी नहीं आई थी.

यानी यह आरोप पूरी तरह से साहिल के पिता की शिकायत पर टिका है. परिवार ने यह भी माना कि उन्होंने तीन महीने तक इंस्टीट्यूट में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी.

एक नजर में देखें कि प्रोफेसर दूल्ला कौन हैं?

दूल्ला IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस डिपार्टमेंट में एक दशक से ज्यादा समय से पढ़ा रहे हैं. वे पावर सिस्टम्स, स्मार्ट ग्रिड्स और रिन्यूएबल एनर्जी के स्पेशलिस्ट हैं. दुल्ला को 2021 में प्रो. एस.पी. सुखात्मे एक्सीलेंस इन टीचिंग अवार्ड भी मिल चुका है. वे IIT बॉम्बे के डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स भी रह चुके हैं. यानी वे कोई नए या अनजान फैकल्टी नहीं हैं.

छात्रों का गुस्सा किस बात पर है?

छात्रों का कहना है कि साहिल को एग्जाम हॉल से बाहर निकाला गया और सस्पेंशन की धमकी दी गई. हालांकि IIT बॉम्बे का कहना है कि कोई डिसिप्लिनरी एक्शन शुरू नहीं किया गया था. छात्रों ने 18-पॉइंट चार्टर में दूल्ला के तुरंत सस्पेंशन की मांग की, साथ ही छात्र आत्महत्या रोकने के लिए टास्क फोर्स, डिसिप्लिनरी मामलों का नया तरीका और मेंटल हेल्थ पर फैकल्टी की ट्रेनिंग जैसी मांगें भी रखीं.

छात्रों ने यह भी मांग की कि इस केस की जांच एक इंडिपेंडेंट कमेटी करे. इसमें स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव और बाहरी एक्सपर्ट शामिल हों. अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर तक और फाइनल रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक मांगी गई है.

गौरतलब है कि IIT बॉम्बे में इस साल यह तीसरी आत्महत्या है. फरवरी 2026 में होस्टल 4 में एक छात्र की मौत हुई थी, जुलाई 2026 में एक और छात्र ने खुदकुशी की और अब सितंबर में साहिल. देशभर के IITs में 2011 से 2024 के बीच 115 छात्रों ने आत्महत्या की, जिसमें लगभग 50% पिछड़े वर्गों से थे. यह आंकड़ा दिखाता है कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, एक पैटर्न है.

तो इस मामले में आगे क्या होगा?

देखिए, दो चीजें अलग-अलग हैं. एग्जाम में मोबाइल इस्तेमाल करना गलत है. दूल्ला ने उसे रिपोर्ट किया, जो उनका कर्तव्य था. सवाल यह है कि क्या सिर्फ रिपोर्ट करने से किसी छात्र की मौत होनी चाहिए?

अगर पिता के आरोप सही हैं, तो यह कर्तव्य नहीं, अपराध है. फिलहाल क्राइम ब्रांच जांच कर रही है. FIR में दूल्ला का नाम है, सस्पेंशन हो चुका है, लेकिन फैकल्टी फोरम उनके साथ खड़ा है. सच क्या है, यह जांच के बाद ही पता चलेगा.

एक बात साफ है कि IIT में स्टूडेंट्स की मौत का सिलसिला रुक नहीं रहा. सिर्फ एक प्रोफेसर को सस्पेंड करने से यह समस्या खत्म नहीं होगी. इसके लिए इंस्टीट्यूट के अंदर डिसिप्लिनरी सिस्टम, मेंटल हेल्थ सपोर्ट और जातिगत भेदभाव की शिकायतों को सुनने वाली व्यवस्था को एक साथ ठीक करना होगा.





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