हर गर्मी में पानी की किल्लत झेलने वाले दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर है. राजधानी दिल्ली तक पहुंचने वाले कच्चे पानी को सुरक्षित बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मुनक नहर को पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. इस योजना के लागू होने के बाद रास्ते में होने वाली पानी की चोरी और लीकेज पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है, जिससे दिल्ली को उसके हिस्से का पूरा पानी मिल सकेगा.
दिल्ली सरकार का मानना है कि खुली नहर के जरिए पानी लाने की मौजूदा व्यवस्था में काफी नुकसान होता है. इसी वजह से अब मुनक नहर से कच्चा पानी पाइपलाइन के माध्यम से राजधानी तक पहुंचाने की योजना तैयार की गई है. इससे जल संरक्षण के साथ-साथ सप्लाई व्यवस्था भी अधिक भरोसेमंद बनने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में रास्ते में पानी का रिसाव और अवैध रूप से पानी निकाले जाने की घटनाएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. पाइपलाइन बनने के बाद ऐसी समस्याओं में भारी कमी आएगी और हरियाणा से छोड़ा गया पानी बिना नुकसान के दिल्ली तक पहुंच सकेगा.
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दिल्ली के इन इलाकों को मिलेगा सीधा फायदा
मुनक नहर से आने वाला कच्चा पानी सबसे पहले हैदरपुर जलशोधन संयंत्र पहुंचता है. जहां शोधन के बाद इसे उत्तर-पश्चिम, पश्चिम, बाहरी दिल्ली और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के कई इलाकों में सप्लाई किया जाता है. नई व्यवस्था से इन क्षेत्रों में जलापूर्ति अधिक स्थिर होने की संभावना जताई जा रही है.
दिल्ली के लिए प्रतिदिन करीब 700 क्यूसेक पानी मुनक नहर के जरिए हरियाणा से छोड़ा जाता है. हालांकि, खुले चैनल में लीकेज और अवैध रूप से टैंकरों में पानी भरने जैसी गतिविधियों के कारण बड़ी मात्रा में पानी गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है. कई बार यह नुकसान 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जिसका सीधा असर राजधानी की जलापूर्ति पर पड़ता है.
हरियाणा सरकार बिछाएगी पाइपलाइन, दिल्ली सरकार उठाएगी खर्च
इस परियोजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का कार्य हरियाणा सरकार करेगी, क्योंकि नहर की जमीन उसी के अधिकार क्षेत्र में आती है. वहीं, पूरी योजना के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी. दोनों सरकारों के बीच इस मॉडल पर सहमति बनी है.
करीब 102 किलोमीटर लंबी मुनक नहर का लगभग 17 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली की सीमा में आता है. प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पूरी पाइपलाइन परियोजना पर करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है. सरकार का लक्ष्य इस निवेश के जरिए राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था को लंबे समय के लिए अधिक सुरक्षित, आधुनिक और नुकसान-मुक्त बनाना है.
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