बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जो 26 अक्टूबर तक चक्रवात का रूप ले सकता है. इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में व्यापक बारिश होने का अनुमान है. चक्रवात विकसित होने की स्थिति में 27 अक्टूबर से मध्यम से भारी बारिश शुरू हो सकती है.
वहीं, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश में 28 और 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. इस बीच, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय दो मौसमी प्रणालियों के कारण दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी है.
बंगाल की खाड़ी में दो मौसमी प्रणालियां सक्रिय
भारतीय उपमहाद्वीप में इन दिनों मौसम का जटिल रूप देखने को मिल रहा है. बंगाल की खाड़ी में दो मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं. एक ओर दक्षिण भारत में पहले से सक्रिय कम दबाव के क्षेत्र के कारण बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर अंडमान सागर से आगे बढ़ रही नई मौसमी प्रणाली पर मौसम वैज्ञानिक नजर रख रहे हैं. इस नई प्रणाली के और मजबूत होने की आशंका है.
थाईलैंड की खाड़ी और उससे सटे म्यांमार के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है. यह प्रणाली 21 अक्टूबर की रात उत्तरी अंडमान सागर में पहुंच गई थी.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकती है. इसके प्रभाव से 23 अक्टूबर तक दक्षिण-पूर्वी और उससे सटे मध्य-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है.
26 अक्टूबर तक चक्रवात में बदलने की आशंका
मौसम वैज्ञानिक सुरेंद्रनाथ पसुपालक के अनुसार, इस प्रणाली को अनुकूल मौसमी परिस्थितियां मिल रही हैं. ऐसे में इसके 26 अक्टूबर तक काफी मजबूत होने की संभावना है.
अमेरिका के राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने भी 20 अक्टूबर को जारी अपने ग्लोबल ट्रॉपिकल हैजर्ड्स आउटलुक में अगले सप्ताह इस क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने की 60 प्रतिशत संभावना जताई थी. हिंद महासागर में सक्रिय मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) भी चक्रवात बनने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है. यूरोपीय मौसम मॉडलों के पूर्वानुमान भी इस संभावना का समर्थन करते हैं.
हालांकि, IMD का कहना है कि अभी चक्रवात बनने की आधिकारिक घोषणा करना या उसके तट से टकराने की जगह बताना जल्दबाजी होगी. शुरुआती आकलन के अनुसार, यह प्रणाली पहले पश्चिम-उत्तर-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकती है और बाद में आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा के तटों की ओर मुड़ सकती है.
इसका वास्तविक रास्ता और तीव्रता उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब क्षेत्र की स्थिति तथा ऊपरी वायुमंडल में आने वाली अन्य मौसमी प्रणालियों पर निर्भर करेगी. अगले तीन दिन इस प्रणाली की दिशा और ताकत का आकलन करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे.
ओडिशा में 26 से 29 अक्टूबर तक बढ़ेगी बारिश
संभावित चक्रवाती प्रणाली को देखते हुए IMD ने ओडिशा के तटीय इलाकों में 26 से 29 अक्टूबर के बीच बारिश बढ़ने की चेतावनी दी है.
26 अक्टूबर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक, जगतसिंहपुर, पुरी, खुर्दा, नयागढ़, गंजाम और गजपति जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है.
तमिलनाडु और केरल में पहले से भारी बारिश
बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई प्रणाली के अलावा, दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में तमिलनाडु तट के पास पहले से एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है. इसके कारण पिछले 24 घंटों के दौरान तमिलनाडु और केरल में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई. इन क्षेत्रों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश हुई, जबकि रायलसीमा में भी भारी बारिश हुई.
लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है. चेन्नई समेत कई जिलों में स्कूल बंद करने पड़े हैं.
तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और केरल में 25 अक्टूबर तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी है. इसके अलावा लक्षद्वीप, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तटीय आंध्र प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान है.
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह
मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्हें समुद्र में जाने से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने को कहा गया है.
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