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बालेन के आदेश से भारतीय सीमा पर बवाल, कस्टम ड्यूटी और भारतीय वाहनों को लेकर सख्ती से नेपाल में सियासी तूफान


नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से पड़ोसी देश में नया तूफान खड़ा हो गया है. नेपाल पुलिस ने भारत से लगने वाली सीमा शुल्क चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी है. बालेन सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि भारत से आने वाले 100 रुपये से ज्यादा की कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य रूप से वसूली जाए. 

दरअसल, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग खाने-पीने की चीजें, कपड़े और घर का अन्य सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों में जाते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय व्यापारियों के साथ ही राजस्व का भी नुकसान होता है. नेपाल के इस कदम से बॉर्डर के पास मौजूद भारतीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है. 

भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर सख्ती

इसके अलावा भारतीय सीमा से लगे मधेश प्रांत में भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों की आवाजाही पर भी सख्ती हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों का बिना इजाजत इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है. नेपाल में राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि सख्त नियमों के चलते भारत संग लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और आर्थिक रिश्ते बिगड़ने का खतरा है.

क्या कह रहीं नेपाली पार्टियां

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी, CPN-UML, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी समेत बड़े राजनीतिक दलों ने 12 अप्रैल को भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें मांग की गई कि ऐसी गाड़ियों को पहले की तरह बॉर्डर के 30 किलोमीटर के दायरे में आजादी से चलने दिया जाए.

अधिकारी ने क्या बताया

नेपाली अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद कानूनों को लागू करना है. काठमांडू टाइम्स ने सरलाही के मुख्य जिला अधिकारी रामूराज कदरिया के हवाले से बताया कि बिना कस्टम ड्यूटी दिए गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और हम बस कानून लागू कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि नियमों के बावजूद इनका पालन नहीं हो रहा है. 

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर काठमांडू टाइम्स से बताया कि पहले लोग एक दिन का टैक्स देते थे और महीनों तक गाड़ी का इस्तेमाल करते थे. अब ऐसा नहीं होगा. हालांकि इन गाड़ियों का कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का अंदाजा है कि मधेश प्रांत के 8 जिलों में 10,000 से ज्यादा भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियां चल रही होंगी. बॉर्डर इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर ज्यादा कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियां खरीदते हैं. 

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